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छत्तीसगढ़ डिजिटल अरेस्ट ठगी: रिटायर्ड प्रोफेसर से 1.4 करोड़ की ठगी
बिलासपुर (छ.ग.)
7 दिनों तक बंधक बनाकर महिला से करोड़ों वसूले, पुलिस जांच शुरू
देशभर में इन दिनों साइबर ठगी के लगातार कई मामलें सामने आ रहे हैं ।ऐसा ही एक चौकानें वाला मामला छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से सामने आया है। बता दें, इस मामले ने कानून-व्यवस्था और डिजिटल सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।बिलासपुर की एक रिटायर्ड महिला प्रोफेसर को कथित तौर पर सात दिनों तक “डिजिटल अरेस्ट” में रखकर उनसे करीब 1.4 करोड़ रुपए ठग लिए गए। आरोपियों ने खुद को पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय (ED) का अधिकारी बताकर महिला को टेरर फंडिंग जैसे गंभीर आरोपों में फंसाने का डर दिखाया। इस दौरान फर्जी दस्तावेज, वारंट और नोटिस भेजकर मानसिक दबाव बनाया गया और महिला को घर से बाहर निकलने तक नहीं दिया गया।
मामला सिविल लाइन थाना क्षेत्र का है, जहां पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, यह घटना 20 अप्रैल से 27 अप्रैल के बीच हुई, जब ठगों ने योजनाबद्ध तरीके से महिला को निशाना बनाया और धीरे-धीरे बड़ी रकम ट्रांसफर करवाई।
ठगों ने व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए संपर्क किया और खुद को पुलिस अधिकारी “संजय PSI” बताया। शुरुआती बातचीत में ही उन्होंने महिला को बताया कि उनका नाम एक प्रतिबंधित संगठन से जुड़ा है और उन पर टेरर फंडिंग का आरोप है। इसके बाद फर्जी बैंक स्टेटमेंट और दस्तावेज दिखाकर उन्हें डराया गया।
डिजिटल अरेस्ट का जाल
वीडियो कॉल पर घंटों तक महिला को रोके रखा गया और कहा गया कि उनका फोन निगरानी में है।ठगों ने सुप्रीम कोर्ट और ED के फर्जी नोटिस भेजकर गिरफ्तारी का भय पैदा किया।इस दौरान महिला को किसी से संपर्क न करने की सख्त हिदायत दी गई।डर और दबाव में आकर उन्होंने 21 से 24 अप्रैल के बीच अलग-अलग किस्तों में कुल 1 करोड़ 4 लाख 80 हजार रुपए चार बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए।इसके बाद भी ठगों ने 50 लाख रुपए की अतिरिक्त मांग की और बेटे-पोते को जेल भेजने की धमकी दी।
ऐसे खुला मामला
जब महिला के खाते में पैसे खत्म हो गए, तब उन्होंने अपने बेटे को फोन कर मदद मांगी।बेटे को शक हुआ और वह तुरंत बिलासपुर पहुंचा।पूछताछ में पूरी घटना सामने आई, जिसके बाद साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने फर्जी पहचान और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर इस ठगी को अंजाम दिया।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि “डिजिटल अरेस्ट” जैसे मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। खासकर बुजुर्ग, रिटायर्ड कर्मचारी और कारोबारी इस तरह के साइबर अपराधियों के निशाने पर हैं। पिछले कुछ महीनों में ऐसे मामलों में 30 से 40 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है।
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छत्तीसगढ़ डिजिटल अरेस्ट ठगी: रिटायर्ड प्रोफेसर से 1.4 करोड़ की ठगी
बिलासपुर (छ.ग.)
देशभर में इन दिनों साइबर ठगी के लगातार कई मामलें सामने आ रहे हैं ।ऐसा ही एक चौकानें वाला मामला छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से सामने आया है। बता दें, इस मामले ने कानून-व्यवस्था और डिजिटल सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।बिलासपुर की एक रिटायर्ड महिला प्रोफेसर को कथित तौर पर सात दिनों तक “डिजिटल अरेस्ट” में रखकर उनसे करीब 1.4 करोड़ रुपए ठग लिए गए। आरोपियों ने खुद को पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय (ED) का अधिकारी बताकर महिला को टेरर फंडिंग जैसे गंभीर आरोपों में फंसाने का डर दिखाया। इस दौरान फर्जी दस्तावेज, वारंट और नोटिस भेजकर मानसिक दबाव बनाया गया और महिला को घर से बाहर निकलने तक नहीं दिया गया।
मामला सिविल लाइन थाना क्षेत्र का है, जहां पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, यह घटना 20 अप्रैल से 27 अप्रैल के बीच हुई, जब ठगों ने योजनाबद्ध तरीके से महिला को निशाना बनाया और धीरे-धीरे बड़ी रकम ट्रांसफर करवाई।
ठगों ने व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए संपर्क किया और खुद को पुलिस अधिकारी “संजय PSI” बताया। शुरुआती बातचीत में ही उन्होंने महिला को बताया कि उनका नाम एक प्रतिबंधित संगठन से जुड़ा है और उन पर टेरर फंडिंग का आरोप है। इसके बाद फर्जी बैंक स्टेटमेंट और दस्तावेज दिखाकर उन्हें डराया गया।
डिजिटल अरेस्ट का जाल
वीडियो कॉल पर घंटों तक महिला को रोके रखा गया और कहा गया कि उनका फोन निगरानी में है।ठगों ने सुप्रीम कोर्ट और ED के फर्जी नोटिस भेजकर गिरफ्तारी का भय पैदा किया।इस दौरान महिला को किसी से संपर्क न करने की सख्त हिदायत दी गई।डर और दबाव में आकर उन्होंने 21 से 24 अप्रैल के बीच अलग-अलग किस्तों में कुल 1 करोड़ 4 लाख 80 हजार रुपए चार बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए।इसके बाद भी ठगों ने 50 लाख रुपए की अतिरिक्त मांग की और बेटे-पोते को जेल भेजने की धमकी दी।
ऐसे खुला मामला
जब महिला के खाते में पैसे खत्म हो गए, तब उन्होंने अपने बेटे को फोन कर मदद मांगी।बेटे को शक हुआ और वह तुरंत बिलासपुर पहुंचा।पूछताछ में पूरी घटना सामने आई, जिसके बाद साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने फर्जी पहचान और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर इस ठगी को अंजाम दिया।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि “डिजिटल अरेस्ट” जैसे मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। खासकर बुजुर्ग, रिटायर्ड कर्मचारी और कारोबारी इस तरह के साइबर अपराधियों के निशाने पर हैं। पिछले कुछ महीनों में ऐसे मामलों में 30 से 40 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है।
