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प्राडा के साथ वैश्विक पटल पर चमका भारतीय हुनर: कोल्हापुरी चप्पल अब दुनिया के लग्जरी फैशन मार्केट में
Digital Desk
भारतीय शिल्प कौशल और स्वदेशी कला के लिए आज का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है। दुनिया के मशहूर लग्जरी फैशन हाउस प्राडा (Prada) ने सोमवार को अपनी विशेष 'लिमिटेड एडिशन' सैंडल श्रृंखला लॉन्च की है, जो सीधे तौर पर भारत की पारंपरिक कोल्हापुरी चप्पलों से प्रेरित है।
'PRADA Made in India x Inspired by Kolhapuri Chappals' प्रोजेक्ट के तहत इन सैंडल्स को दुनिया भर के 40 चुनिंदा प्राडा स्टोर्स और उनके ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर पेश किया गया है।
महाराष्ट्र के शिल्पकारों का वैश्विक सम्मान
इन सैंडल्स का निर्माण महाराष्ट्र और कर्नाटक के उन कारीगरों द्वारा किया गया है, जो पीढ़ियों से इस हस्तशिल्प को जीवित रखे हुए हैं। लिडकॉम (LIDCOM) की प्रबंध निदेशक, श्रीमती प्रेरणा देशभ्रतार (IAS) ने इसे एक ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कहा:
"यह सदियों पुराने भारतीय शिल्प और उस संस्था के लिए वैश्विक मान्यता का क्षण है, जिसने दशकों तक इस कला को संरक्षित करने और कारीगरों को सम्मान दिलाने के लिए काम किया है।"
मुख्यमंत्री ने जताया गर्व
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस ने इस लॉन्च को राष्ट्रीय गौरव का विषय बताया। उन्होंने कहा, "महाराष्ट्र के चमड़ा कारीगरों के हाथों से निकली कोल्हापुरी चप्पल आज 40 अंतरराष्ट्रीय स्टोर्स की शोभा बढ़ा रही है। यह दुनिया को दिखा रहा है कि 'मेड इन इंडिया' का असल मतलब क्या है।"
विवाद से विकास तक का सफर
यह साझेदारी एक विवाद के बाद शुरू हुई थी। प्राडा के 'स्प्रिंग 2026 मेंसवेयर' कलेक्शन में कोल्हापुरी चप्पल से मिलती-जुलती सैंडल्स दिखने पर ऑनलाइन काफी विरोध हुआ था। हालांकि, प्राडा ने इसे केवल एक बयान तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उनके प्रतिनिधिमंडल ने कोल्हापुर के कारीगरों और लिडकॉम की सुविधाओं का दौरा किया। कई दौर की बातचीत के बाद, मुंबई में इटली के महावाणिज्य दूतावास में एक MoU पर हस्ताक्षर किए गए।
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कारीगरों के लिए सुनहरा भविष्य
यह समझौता केवल जूतों की बिक्री तक सीमित नहीं है:
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प्रशिक्षण प्रोग्राम: प्राडा तीन साल के लिए NIFT और कर्नाटक इंस्टीट्यूट ऑफ लेदर एंड फैशन टेक्नोलॉजी (KILT) में प्रशिक्षण कार्यक्रमों का पूरा खर्च उठाएगा।
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इटली में उच्च शिक्षा: सबसे कुशल कारीगरों को इटली स्थित 'प्राडा एकेडमी' में उन्नत प्रशिक्षण के लिए चुना जाएगा।
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सामाजिक न्याय: महाराष्ट्र के सामाजिक न्याय मंत्री श्री संजय शिरसाट ने कहा कि यह कारीगरों के पसीने और मेहनत का सम्मान है, जिससे उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की शक्ति मिलेगी।
क्या है लिडकॉम (LIDCOM)?
'संत रोहिदास चर्मोद्योग एवं चर्मकार विकास महामंडल' (लिडकॉम) की स्थापना 1 मई 1974 को महाराष्ट्र के सामाजिक न्याय विभाग के तहत हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य चमड़ा उद्योग से जुड़े कारीगरों के हितों की रक्षा करना है। 2009 में कोल्हापुरी चप्पल को मिले GI टैग ने इस साझेदारी को कानूनी और सांस्कृतिक मजबूती प्रदान की है।
मुख्य बिंदु:
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40 स्टोर्स: दुनिया भर के प्रमुख शहरों में बिक्री शुरू।
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GI टैग: 2009 में मिली पहचान ने वैश्विक सौदे में निभाई अहम भूमिका।
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कौशल विकास: भारतीय कारीगरों को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण।
यह साझेदारी भारतीय हस्तशिल्प क्षेत्र के लिए एक मिसाल है कि कैसे अपनी जड़ों और बौद्धिक संपदा (IP) की रक्षा करते हुए वैश्विक ब्रांडों के साथ बराबरी से बातचीत की जा सकती है।
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प्राडा के साथ वैश्विक पटल पर चमका भारतीय हुनर: कोल्हापुरी चप्पल अब दुनिया के लग्जरी फैशन मार्केट में
Digital Desk
'PRADA Made in India x Inspired by Kolhapuri Chappals' प्रोजेक्ट के तहत इन सैंडल्स को दुनिया भर के 40 चुनिंदा प्राडा स्टोर्स और उनके ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर पेश किया गया है।
महाराष्ट्र के शिल्पकारों का वैश्विक सम्मान
इन सैंडल्स का निर्माण महाराष्ट्र और कर्नाटक के उन कारीगरों द्वारा किया गया है, जो पीढ़ियों से इस हस्तशिल्प को जीवित रखे हुए हैं। लिडकॉम (LIDCOM) की प्रबंध निदेशक, श्रीमती प्रेरणा देशभ्रतार (IAS) ने इसे एक ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कहा:
"यह सदियों पुराने भारतीय शिल्प और उस संस्था के लिए वैश्विक मान्यता का क्षण है, जिसने दशकों तक इस कला को संरक्षित करने और कारीगरों को सम्मान दिलाने के लिए काम किया है।"
मुख्यमंत्री ने जताया गर्व
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस ने इस लॉन्च को राष्ट्रीय गौरव का विषय बताया। उन्होंने कहा, "महाराष्ट्र के चमड़ा कारीगरों के हाथों से निकली कोल्हापुरी चप्पल आज 40 अंतरराष्ट्रीय स्टोर्स की शोभा बढ़ा रही है। यह दुनिया को दिखा रहा है कि 'मेड इन इंडिया' का असल मतलब क्या है।"
विवाद से विकास तक का सफर
यह साझेदारी एक विवाद के बाद शुरू हुई थी। प्राडा के 'स्प्रिंग 2026 मेंसवेयर' कलेक्शन में कोल्हापुरी चप्पल से मिलती-जुलती सैंडल्स दिखने पर ऑनलाइन काफी विरोध हुआ था। हालांकि, प्राडा ने इसे केवल एक बयान तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उनके प्रतिनिधिमंडल ने कोल्हापुर के कारीगरों और लिडकॉम की सुविधाओं का दौरा किया। कई दौर की बातचीत के बाद, मुंबई में इटली के महावाणिज्य दूतावास में एक MoU पर हस्ताक्षर किए गए।
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कारीगरों के लिए सुनहरा भविष्य
यह समझौता केवल जूतों की बिक्री तक सीमित नहीं है:
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प्रशिक्षण प्रोग्राम: प्राडा तीन साल के लिए NIFT और कर्नाटक इंस्टीट्यूट ऑफ लेदर एंड फैशन टेक्नोलॉजी (KILT) में प्रशिक्षण कार्यक्रमों का पूरा खर्च उठाएगा।
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इटली में उच्च शिक्षा: सबसे कुशल कारीगरों को इटली स्थित 'प्राडा एकेडमी' में उन्नत प्रशिक्षण के लिए चुना जाएगा।
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सामाजिक न्याय: महाराष्ट्र के सामाजिक न्याय मंत्री श्री संजय शिरसाट ने कहा कि यह कारीगरों के पसीने और मेहनत का सम्मान है, जिससे उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की शक्ति मिलेगी।
क्या है लिडकॉम (LIDCOM)?
'संत रोहिदास चर्मोद्योग एवं चर्मकार विकास महामंडल' (लिडकॉम) की स्थापना 1 मई 1974 को महाराष्ट्र के सामाजिक न्याय विभाग के तहत हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य चमड़ा उद्योग से जुड़े कारीगरों के हितों की रक्षा करना है। 2009 में कोल्हापुरी चप्पल को मिले GI टैग ने इस साझेदारी को कानूनी और सांस्कृतिक मजबूती प्रदान की है।
मुख्य बिंदु:
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40 स्टोर्स: दुनिया भर के प्रमुख शहरों में बिक्री शुरू।
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GI टैग: 2009 में मिली पहचान ने वैश्विक सौदे में निभाई अहम भूमिका।
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कौशल विकास: भारतीय कारीगरों को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण।
यह साझेदारी भारतीय हस्तशिल्प क्षेत्र के लिए एक मिसाल है कि कैसे अपनी जड़ों और बौद्धिक संपदा (IP) की रक्षा करते हुए वैश्विक ब्रांडों के साथ बराबरी से बातचीत की जा सकती है।
