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दुर्ग में H1N1 का बढ़ता असर, एक दिन में 5 नए केस; 10 मरीजों का इलाज जारी
दुर्ग (छ.ग.)
5 अगस्त से अब तक 22 संक्रमित मिले; 7 अस्पताल में भर्ती और 3 होम आइसोलेशन में, जिले में 158 बेड रिजर्व
दुर्ग जिले में इन्फ्लुएंजा एच1एन1 के मामलों में अचानक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। स्वास्थ्य विभाग की 3 सितंबर की स्थिति रिपोर्ट में एक ही दिन में 5 नए संक्रमित मिलने की जानकारी सामने आई। इसके बाद 5 अगस्त से अब तक जिले में दर्ज कुल मामलों की संख्या 22 हो गई है। नए संक्रमितों में से दो मरीजों को निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। तीन अन्य मरीजों को डॉक्टरों की निगरानी में घर पर ही अलग रखकर उपचार दिया जा रहा है।
अभी 10 मरीज उपचाराधीन
जिले में इस समय कुल 10 मरीजों का इलाज चल रहा है। इनमें 7 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि 3 घर पर रहकर चिकित्सकीय निगरानी में हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार उपचार ले रहे सभी मरीजों की स्थिति फिलहाल सामान्य है। मामलों में वृद्धि के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों की तैयारियों की समीक्षा शुरू कर दी है, ताकि जरूरत पड़ने पर मरीजों के लिए अलग उपचार व्यवस्था तुरंत उपलब्ध कराई जा सके।
23 वार्ड में 158 बेड की व्यवस्था
संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए जिले के स्वास्थ्य संस्थानों में अलग उपचार व्यवस्था तैयार की गई है। विभाग के मुताबिक 23 अलग वार्डों में 158 बेड रिजर्व रखे गए हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य मरीजों की संख्या बढ़ने की स्थिति में उन्हें अलग रखकर उपचार उपलब्ध कराना है। अस्पतालों में उपलब्ध संसाधनों और आइसोलेशन व्यवस्था की भी समीक्षा की जा रही है।
पाटन से निकुम तक स्वास्थ्य केंद्रों का निरीक्षण
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने तैयारियों का जायजा लेने के लिए कई स्वास्थ्य केंद्रों का निरीक्षण किया। टीम पाटन, निकुम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और बटरेल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची। निरीक्षण के दौरान अलग वार्ड, बेड की उपलब्धता और मरीजों के उपचार से संबंधित व्यवस्थाओं को देखा गया। अधिकारियों ने संभावित रूप से मरीजों की संख्या बढ़ने की स्थिति में उपलब्ध सुविधाओं की भी समीक्षा की।
H1N1 के लक्षणों पर नजर
एच1एन1 इन्फ्लुएंजा वायरस का एक प्रकार है। संक्रमण में बुखार, खांसी, गले में दर्द, शरीर में दर्द और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ मामलों में संक्रमण गंभीर होकर फेफड़ों को प्रभावित कर सकता है। संक्रमण से बचाव के लिए खांसते या छींकते समय मुंह ढंकना, हाथों की स्वच्छता बनाए रखना और लक्षण होने पर अन्य लोगों से दूरी रखना जैसी सावधानियां महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
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