रिसाली नगर निगम में टकराव तेज, आयुक्त पर वित्तीय गड़बड़ी और नियम तोड़ने के आरोप

दुर्ग-भिलाई (छ.ग.)

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महापौर परिषद ने नगरीय प्रशासन सचिव से की शिकायत, 48 घंटे में कार्रवाई की मांग; आयुक्त का पलटवार—सब कुछ नियमानुसार

दुर्ग-भिलाई क्षेत्र के रिसाली नगर निगम में प्रशासनिक खींचतान खुलकर सामने आ गई है। महापौर शशि सिन्हा और मेयर-इन-काउंसिल (MIC) के सदस्यों ने निगम आयुक्त मोनिका वर्मा पर गंभीर आरोप लगाते हुए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव और डायरेक्टर को लिखित शिकायत सौंपी है। इस शिकायत में वित्तीय अनियमितता से लेकर टेंडर प्रक्रिया में मनमाने बदलाव तक के आरोप लगाए गए हैं।

महापौर परिषद की ओर से कुल चार अलग-अलग आवेदन प्रस्तुत किए गए हैं। इनमें बजट के बिना खर्च किए जाने, जल शोधन संयंत्र की बदहाल स्थिति, प्रभारी स्वास्थ्य अधिकारी को कार्यभार न सौंपने और बिना अनुमति टेंडर शर्तों में संशोधन जैसे मुद्दे शामिल हैं। परिषद ने इन आरोपों को गंभीर बताते हुए निगम आयुक्त को 48 घंटे के भीतर पद से हटाने या निलंबित करने की मांग की है।

यह शिकायत 22 जनवरी 2026 को नवा रायपुर स्थित महानदी भवन में नगरीय प्रशासन विभाग के नाम सौंपी गई। इस दौरान महापौर के साथ एमआईसी के कई सदस्य भी मौजूद रहे।

बजट स्वीकृति के बिना खर्च का आरोप

परिषद का आरोप है कि निगम आयुक्त ने छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम के प्रावधानों के तहत तय समय-सीमा तक बजट अनुमान पेश नहीं किया। इसके बावजूद 1 दिसंबर के बाद किए गए सभी खर्चों को अवैध बताते हुए इसे गंभीर वित्तीय कदाचार करार दिया गया है। परिषद ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो मामला हाईकोर्ट और राज्यपाल तक ले जाया जाएगा।

जल शोधन संयंत्र की स्थिति पर सवाल

मोरिद जलाशय स्थित 6 एमएलडी जल शोधन संयंत्र को लेकर भी गंभीर आपत्ति जताई गई है। परिषद का कहना है कि पिछले तीन वर्षों से केमिकल हाउस जली हालत में है और आधुनिक ऑटोमेटेड सिस्टम बंद पड़ा है। इसके बावजूद मैन्युअल डोजिंग के जरिए पानी की आपूर्ति की जा रही है, जिससे हजारों लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा बना हुआ है। परिषद ने मामले की जांच आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो से कराने की मांग की है।

स्वास्थ्य अधिकारी और टेंडर प्रक्रिया विवाद

शासन द्वारा नियुक्त प्रभारी स्वास्थ्य अधिकारी को कार्यभार न सौंपने और नियमों के विपरीत एक स्वच्छता पर्यवेक्षक को जिम्मेदारी देने का भी आरोप लगाया गया है। इसके अलावा परिषद ने बिना एमआईसी की अनुमति टेंडर शर्तों में बदलाव को पारदर्शिता के खिलाफ बताया है।

आयुक्त का पक्ष

इन सभी आरोपों पर निगम आयुक्त मोनिका वर्मा ने सफाई देते हुए कहा कि निगम में सभी कार्य नियमों और प्रक्रियाओं के तहत किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि टेंडर को आपत्ति के बाद हटा दिया गया है और जल शोधन संयंत्र के ऑटोमैटिक सिस्टम को दोबारा शुरू करने के लिए उच्च कार्यालय को पत्र भेजा गया है। आयुक्त का कहना है कि शिकायतों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है और कई मुद्दों का समाधान पहले ही किया जा चुका है।

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