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कोंडागांव में 1.70 करोड़ की साइबर ठगी का खुलासा: 11 राज्यों में फैले गैंग के 5 आरोपी गिरफ्तार, छत्तीसगढ़-यूपी से जुड़े तार
Kondagaon, CG
जिले के फरसगांव थाना क्षेत्र में 1.70 करोड़ रुपए की अंतरराज्यीय साइबर ठगी का खुलासा हुआ है। पुलिस ने एक संगठित साइबर अपराध गिरोह के 5 सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जो देश के 11 राज्यों में सक्रिय थे।
ये आरोपी ग्रामीणों के नाम पर म्यूल अकाउंट खोलवाकर उनके एटीएम और सिम कार्ड गिरोह को बेचते थे, जिनका उपयोग ऑनलाइन ठगी और डिजिटल ट्रांजैक्शन में किया जाता था।
गिरफ्तार आरोपी और उनका नेटवर्क
कोंडागांव पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है:
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भावेश तारम – ग्राम पथर्री, थाना फरसगांव, जिला कोंडागांव
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विवेक जायसवाल – प्रयागराज, उत्तर प्रदेश
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विवेक सिंह – प्रयागराज, उत्तर प्रदेश
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दिलीप साहू – बिलासपुर, छत्तीसगढ़
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राकेश कुमार साहू – बिलासपुर, छत्तीसगढ़
इनमें से चार को प्रयागराज और बिलासपुर से दबिश देकर गिरफ्तार किया गया, जबकि मुख्य आरोपी भावेश तारम को कोंडागांव के फरसगांव क्षेत्र से पकड़ा गया।
खुफिया जानकारी और टेक्निकल ट्रेसिंग से कामयाबी
फरसगांव एसडीओपी अभिनव उपाध्याय के नेतृत्व में गठित साइबर सेल टीम ने तकनीकी विश्लेषण, डिजिटल ट्रांजैक्शन ट्रैकिंग और बैंकिंग रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की। इसके साथ ही खुफिया सूचना के आधार पर दबिश देकर पूरे नेटवर्क को पकड़ने में सफलता मिली।
कैसे करते थे ठगी? ग्रामीणों से खाते खुलवाकर बेचते थे सिम-एटीएम
गिरोह के सदस्य ग्रामीण और बेरोजगार लोगों को लालच देकर उनके नाम से बैंक खाते खुलवाते थे। फिर उनके एटीएम कार्ड, पासबुक और मोबाइल सिम साइबर ठगों को बेच देते थे। इन खातों का इस्तेमाल धोखाधड़ी से आए पैसे की आवाजाही में किया जाता था।
17 मामलों में फरार, अब न्यायिक रिमांड पर
पुलिस जांच में सामने आया कि यह गिरोह 17 अलग-अलग साइबर अपराध मामलों में फरार था। सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अब कॉल डिटेल्स, बैंकिंग व्यवहार और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क को तोड़ा जा सके।
छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश बन चुके थे ठगी का बेस
जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह की मुख्य गतिविधियाँ छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश से संचालित हो रही थीं। प्रयागराज और बिलासपुर इसके मुख्य ठिकाने थे। यहां से पूरे देश में साइबर धोखाधड़ी को अंजाम दिया जाता था।
पुलिस की अपील – खाते और दस्तावेज किसी को न सौंपें
पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि अपना बैंक खाता, एटीएम, सिम या कोई भी व्यक्तिगत दस्तावेज किसी के कहने पर न दें। यह साइबर अपराध में इस्तेमाल हो सकते हैं, जिससे आप खुद भी कानूनी पचड़े में फंस सकते हैं।
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कोंडागांव में 1.70 करोड़ की साइबर ठगी का खुलासा: 11 राज्यों में फैले गैंग के 5 आरोपी गिरफ्तार, छत्तीसगढ़-यूपी से जुड़े तार
Kondagaon, CG
ये आरोपी ग्रामीणों के नाम पर म्यूल अकाउंट खोलवाकर उनके एटीएम और सिम कार्ड गिरोह को बेचते थे, जिनका उपयोग ऑनलाइन ठगी और डिजिटल ट्रांजैक्शन में किया जाता था।
गिरफ्तार आरोपी और उनका नेटवर्क
कोंडागांव पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है:
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भावेश तारम – ग्राम पथर्री, थाना फरसगांव, जिला कोंडागांव
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विवेक जायसवाल – प्रयागराज, उत्तर प्रदेश
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विवेक सिंह – प्रयागराज, उत्तर प्रदेश
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दिलीप साहू – बिलासपुर, छत्तीसगढ़
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राकेश कुमार साहू – बिलासपुर, छत्तीसगढ़
इनमें से चार को प्रयागराज और बिलासपुर से दबिश देकर गिरफ्तार किया गया, जबकि मुख्य आरोपी भावेश तारम को कोंडागांव के फरसगांव क्षेत्र से पकड़ा गया।
खुफिया जानकारी और टेक्निकल ट्रेसिंग से कामयाबी
फरसगांव एसडीओपी अभिनव उपाध्याय के नेतृत्व में गठित साइबर सेल टीम ने तकनीकी विश्लेषण, डिजिटल ट्रांजैक्शन ट्रैकिंग और बैंकिंग रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की। इसके साथ ही खुफिया सूचना के आधार पर दबिश देकर पूरे नेटवर्क को पकड़ने में सफलता मिली।
कैसे करते थे ठगी? ग्रामीणों से खाते खुलवाकर बेचते थे सिम-एटीएम
गिरोह के सदस्य ग्रामीण और बेरोजगार लोगों को लालच देकर उनके नाम से बैंक खाते खुलवाते थे। फिर उनके एटीएम कार्ड, पासबुक और मोबाइल सिम साइबर ठगों को बेच देते थे। इन खातों का इस्तेमाल धोखाधड़ी से आए पैसे की आवाजाही में किया जाता था।
17 मामलों में फरार, अब न्यायिक रिमांड पर
पुलिस जांच में सामने आया कि यह गिरोह 17 अलग-अलग साइबर अपराध मामलों में फरार था। सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अब कॉल डिटेल्स, बैंकिंग व्यवहार और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क को तोड़ा जा सके।
छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश बन चुके थे ठगी का बेस
जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह की मुख्य गतिविधियाँ छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश से संचालित हो रही थीं। प्रयागराज और बिलासपुर इसके मुख्य ठिकाने थे। यहां से पूरे देश में साइबर धोखाधड़ी को अंजाम दिया जाता था।
पुलिस की अपील – खाते और दस्तावेज किसी को न सौंपें
पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि अपना बैंक खाता, एटीएम, सिम या कोई भी व्यक्तिगत दस्तावेज किसी के कहने पर न दें। यह साइबर अपराध में इस्तेमाल हो सकते हैं, जिससे आप खुद भी कानूनी पचड़े में फंस सकते हैं।
