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बलरामपुर में बांध टूटा, चार की मौत और कई लापता: फसलें-घर बह गए, प्रशासन ने तेज़ की तलाश
Balrampur, CG
बलरामपुर ज़िले में मंगलवार देर रात भारी बारिश के बीच लुत्तीसढ़सा गांव स्थित 40 साल पुराना मिट्टी का बांध टूट गया। हादसे में अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि एक ही परिवार के तीन लोग अभी लापता हैं।
प्रशासन और बचाव दल लगातार तलाश में जुटे हुए हैं।
कैसे हुआ हादसा
बताया जा रहा है कि 1981 में बना यह बांध पिछले दो दिनों की भारी बारिश से लबालब भर गया था। मंगलवार रात करीब 11 से 11:30 बजे के बीच बांध का किनारा टूट गया और अचानक निचले इलाकों में पानी का सैलाब उतर आया। देखते ही देखते चार घर बह गए और कई लोग इसकी चपेट में आ गए।
जान बचाने की जद्दोजहद
स्थानीय लोगों ने बताया कि पानी का तेज़ बहाव पहले कालीचरण टोप्पो के घर पहुंचा। परिवार के कई सदस्य बह गए लेकिन कालीचरण ने बांस पकड़कर अपनी जान बचाई, वहीं उसकी पत्नी दीवार के नीचे दब गई, जिन्हें बाद में घायल अवस्था में निकाला गया। कुछ लोगों ने तैरकर किसी तरह अपनी जान बचाई।
मृतक और लापता
हादसे में गणेश खैरबार का छह साल का बेटा कार्तिक और गांव की 30 वर्षीय महिला चिंता का शव बुधवार सुबह बरामद हुआ। मंगलवार रात ही दो अन्य शव झाड़ियों से मिले थे। जबकि गणेश खैरबार, उसका चार वर्षीय बेटा और एक अन्य बच्ची अभी लापता हैं।
फसलें और मवेशी बह गए
बांध के टूटने से गांव के खेतों में लगी सैकड़ों एकड़ धान और टमाटर की फसल पूरी तरह तबाह हो गई। करीब 60 बकरियां और कई मवेशी भी पानी में बह गए। बांध के पानी ने सड़कों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया है।
राजनीतिक आरोप
घटनास्थल पर पहुंचे पूर्व विधायक बृहस्पति सिंह ने कहा कि ग्रामीणों ने पहले ही बांध की जर्जर स्थिति की सूचना अधिकारियों को दी थी, लेकिन मरम्मत नहीं की गई। उनकी माने तो विभाग की लापरवाही से यह बड़ा हादसा हुआ है।
प्रशासन सतर्क
बलरामपुर में इस साल औसत से 59% ज्यादा बारिश हुई है। जिले के कई बांध लबालब भर चुके हैं। प्रशासन ने पुराने बांधों के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की अपील की है और निगरानी बढ़ा दी है।
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बलरामपुर में बांध टूटा, चार की मौत और कई लापता: फसलें-घर बह गए, प्रशासन ने तेज़ की तलाश
Balrampur, CG
प्रशासन और बचाव दल लगातार तलाश में जुटे हुए हैं।
कैसे हुआ हादसा
बताया जा रहा है कि 1981 में बना यह बांध पिछले दो दिनों की भारी बारिश से लबालब भर गया था। मंगलवार रात करीब 11 से 11:30 बजे के बीच बांध का किनारा टूट गया और अचानक निचले इलाकों में पानी का सैलाब उतर आया। देखते ही देखते चार घर बह गए और कई लोग इसकी चपेट में आ गए।
जान बचाने की जद्दोजहद
स्थानीय लोगों ने बताया कि पानी का तेज़ बहाव पहले कालीचरण टोप्पो के घर पहुंचा। परिवार के कई सदस्य बह गए लेकिन कालीचरण ने बांस पकड़कर अपनी जान बचाई, वहीं उसकी पत्नी दीवार के नीचे दब गई, जिन्हें बाद में घायल अवस्था में निकाला गया। कुछ लोगों ने तैरकर किसी तरह अपनी जान बचाई।
मृतक और लापता
हादसे में गणेश खैरबार का छह साल का बेटा कार्तिक और गांव की 30 वर्षीय महिला चिंता का शव बुधवार सुबह बरामद हुआ। मंगलवार रात ही दो अन्य शव झाड़ियों से मिले थे। जबकि गणेश खैरबार, उसका चार वर्षीय बेटा और एक अन्य बच्ची अभी लापता हैं।
फसलें और मवेशी बह गए
बांध के टूटने से गांव के खेतों में लगी सैकड़ों एकड़ धान और टमाटर की फसल पूरी तरह तबाह हो गई। करीब 60 बकरियां और कई मवेशी भी पानी में बह गए। बांध के पानी ने सड़कों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया है।
राजनीतिक आरोप
घटनास्थल पर पहुंचे पूर्व विधायक बृहस्पति सिंह ने कहा कि ग्रामीणों ने पहले ही बांध की जर्जर स्थिति की सूचना अधिकारियों को दी थी, लेकिन मरम्मत नहीं की गई। उनकी माने तो विभाग की लापरवाही से यह बड़ा हादसा हुआ है।
प्रशासन सतर्क
बलरामपुर में इस साल औसत से 59% ज्यादा बारिश हुई है। जिले के कई बांध लबालब भर चुके हैं। प्रशासन ने पुराने बांधों के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की अपील की है और निगरानी बढ़ा दी है।
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