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अफसर की हत्या के आरोप में जेल गया इंजीनियर बाइज्जत-बरी: कोर्ट ने कहा— हादसे में हुई मौत, 8 महीने बाद बेगुनाही साबित
Bhilai, CG
भिलाई की सीमेंट फैक्ट्री में अफसर की संदिग्ध मौत के बाद हत्या के आरोप में पकड़ा गया इंजीनियर संजय तिवारी अब बरी; कोर्ट ने माना— अभियोजन साक्ष्य पेश करने में नाकाम रहा
छत्तीसगढ़ के दुर्ग-भिलाई से एक बड़ा न्यायिक फैसला सामने आया है। कोल हैंडलिंग प्लांट (CHP) के हेड आर. बालाराजू की संदिग्ध मौत के मामले में हत्या के आरोप में गिरफ्तार इंजीनियर संजय तिवारी को कोर्ट ने बाइज्जत बरी कर दिया है। करीब आठ महीने जेल में बिताने के बाद अदालत ने माना कि यह हत्या नहीं, बल्कि एक हादसा था।
भिलाई की एक निजी सीमेंट फैक्ट्री में 4 जून 2024 को आर. बालाराजू का शव खून से लथपथ हालत में मिला था। प्रारंभिक जांच में पुलिस ने इसे हत्या का मामला मानते हुए उसी प्लांट के मैकेनिकल इंजीनियर और सीएचपी इंचार्ज संजय तिवारी को गिरफ्तार कर लिया था। तिवारी के कपड़ों पर खून के निशान पाए जाने और दोनों के बीच विवाद की खबरों के चलते पुलिस ने उन्हें मुख्य आरोपी बनाया था।
संजय तिवारी को 4 जून 2024 को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, जहां उन्होंने करीब 255 दिन यानी आठ महीने तक सजा भुगती। लेकिन मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष हत्या का कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि “मृतक की मौत दुर्घटनात्मक प्रतीत होती है, और अभियोजन इस बात को साबित करने में असफल रहा कि अभियुक्त ने जानबूझकर हत्या की।”
कोर्ट के फैसले के बाद उठे सवाल
जिला अदालत के इस निर्णय ने एक बार फिर पुलिस जांच की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। न्यायालय ने पाया कि जांच एजेंसी ने केवल संदेह और सतही तथ्यों के आधार पर गिरफ्तारी की थी, जबकि घटनास्थल से मिले वैज्ञानिक प्रमाण हत्या की पुष्टि नहीं करते थे।
‘पत्नी ने साथ छोड़ा, समाज ने मुंह मोड़ लिया’
रिहाई के बाद मीडिया से बातचीत में इंजीनियर संजय तिवारी ने कहा, “जेल से निकलने तक सब कुछ बदल चुका था। पत्नी ने साथ छोड़ दिया, समाज ने ठुकरा दिया और नौकरी भी चली गई। अब मैं सिर्फ अपनी जिंदगी को फिर से शुरू करना चाहता हूं।”
कानूनी विशेषज्ञों की राय
कानूनी जानकारों का कहना है कि इस मामले ने न्यायिक व्यवस्था में ‘साक्ष्य की ठोसता’ के महत्व को रेखांकित किया है। यदि जांच प्रारंभिक तथ्यों के आधार पर जल्दबाजी में होती है, तो निर्दोष व्यक्ति को भी गंभीर परिणाम झेलने पड़ सकते हैं।
आगे की कार्रवाई
पुलिस सूत्रों के अनुसार, अब इस केस की पूरी जांच रिपोर्ट की समीक्षा की जाएगी। फैक्ट्री प्रबंधन ने भी आंतरिक सुरक्षा और निगरानी प्रणाली को दुरुस्त करने का निर्णय लिया है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
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छत्तीसगढ़ के दुर्ग-भिलाई से एक बड़ा न्यायिक फैसला सामने आया है। कोल हैंडलिंग प्लांट (CHP) के हेड आर. बालाराजू की संदिग्ध मौत के मामले में हत्या के आरोप में गिरफ्तार इंजीनियर संजय तिवारी को कोर्ट ने बाइज्जत बरी कर दिया है। करीब आठ महीने जेल में बिताने के बाद अदालत ने माना कि यह हत्या नहीं, बल्कि एक हादसा था।
भिलाई की एक निजी सीमेंट फैक्ट्री में 4 जून 2024 को आर. बालाराजू का शव खून से लथपथ हालत में मिला था। प्रारंभिक जांच में पुलिस ने इसे हत्या का मामला मानते हुए उसी प्लांट के मैकेनिकल इंजीनियर और सीएचपी इंचार्ज संजय तिवारी को गिरफ्तार कर लिया था। तिवारी के कपड़ों पर खून के निशान पाए जाने और दोनों के बीच विवाद की खबरों के चलते पुलिस ने उन्हें मुख्य आरोपी बनाया था।
संजय तिवारी को 4 जून 2024 को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, जहां उन्होंने करीब 255 दिन यानी आठ महीने तक सजा भुगती। लेकिन मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष हत्या का कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि “मृतक की मौत दुर्घटनात्मक प्रतीत होती है, और अभियोजन इस बात को साबित करने में असफल रहा कि अभियुक्त ने जानबूझकर हत्या की।”
कोर्ट के फैसले के बाद उठे सवाल
जिला अदालत के इस निर्णय ने एक बार फिर पुलिस जांच की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। न्यायालय ने पाया कि जांच एजेंसी ने केवल संदेह और सतही तथ्यों के आधार पर गिरफ्तारी की थी, जबकि घटनास्थल से मिले वैज्ञानिक प्रमाण हत्या की पुष्टि नहीं करते थे।
‘पत्नी ने साथ छोड़ा, समाज ने मुंह मोड़ लिया’
रिहाई के बाद मीडिया से बातचीत में इंजीनियर संजय तिवारी ने कहा, “जेल से निकलने तक सब कुछ बदल चुका था। पत्नी ने साथ छोड़ दिया, समाज ने ठुकरा दिया और नौकरी भी चली गई। अब मैं सिर्फ अपनी जिंदगी को फिर से शुरू करना चाहता हूं।”
कानूनी विशेषज्ञों की राय
कानूनी जानकारों का कहना है कि इस मामले ने न्यायिक व्यवस्था में ‘साक्ष्य की ठोसता’ के महत्व को रेखांकित किया है। यदि जांच प्रारंभिक तथ्यों के आधार पर जल्दबाजी में होती है, तो निर्दोष व्यक्ति को भी गंभीर परिणाम झेलने पड़ सकते हैं।
आगे की कार्रवाई
पुलिस सूत्रों के अनुसार, अब इस केस की पूरी जांच रिपोर्ट की समीक्षा की जाएगी। फैक्ट्री प्रबंधन ने भी आंतरिक सुरक्षा और निगरानी प्रणाली को दुरुस्त करने का निर्णय लिया है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
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