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रेफर-रेफर के फेर में गई युवक की जान: डॉक्टरों की लापरवाही और देरी बनी मौत की वजह, परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
Baloda Bazar, cg
बलौदाबाजार-रायपुर मार्ग पर हुए एक सड़क हादसे में घायल युवक की जान समय पर इलाज न मिलने और डॉक्टरों की लापरवाही के कारण चली गई।
हादसे के बाद से लेकर अंतिम सांस तक, युवक ने मदद की उम्मीद में कई अस्पतालों के चक्कर लगाए लेकिन रेफर की प्रक्रिया और इलाज में देरी उसकी मौत का कारण बन गई।
घटना पलारी थाना क्षेत्र के बिनौरी मोड़ की है। जानकारी के अनुसार, शुक्रवार शाम करीब साढ़े चार बजे एक तेज रफ्तार ट्रक ने बाइक सवार युवक को टक्कर मार दी, जिससे उसका एक पैर गंभीर रूप से घायल हो गया। मौके पर मौजूद लोगों ने जब देखा कि एम्बुलेंस नहीं पहुंची, तो थानेदार ने निजी मालवाहक वाहन की मदद से घायल को पलारी के सरकारी अस्पताल पहुंचाया।
परिजनों की अनुपस्थिति में ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर आदित्य वर्मा ने प्राथमिक इलाज किए बिना ही युवक को दूसरे अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। प्रत्यक्षदर्शी और पूर्व सैनिक भरत ठाकुर ने मौके पर प्राथमिक इलाज देते हुए भीड़ से स्कार्फ मंगवाकर घायल के पैर की पट्टी खुद बांधी।
कुछ समय बाद परिजन अस्पताल पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि मरीज को जिला अस्पताल भेजा गया है। जब वे वहां पहुंचे, तो मरीज वहां नहीं मिला। बाद में पुलिस के माध्यम से जानकारी मिली कि युवक को जिला मुख्यालय स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
परिजनों ने आरोप लगाया कि निजी अस्पताल ने पहले मोटी रकम मांगी और फिर इलाज के दौरान युवक की मौत हो गई। आरोप ये भी है कि शव देने के बदले अस्पताल प्रबंधन ने 58 हजार रुपए मांगे, जबकि परिजनों के पास सिर्फ 10 हजार ही थे।
इस पूरे घटनाक्रम में घायल की हालत शुरू में स्थिर बताई जा रही थी, लेकिन बार-बार रेफर करने और इलाज में देरी की वजह से उसकी स्थिति बिगड़ती गई। परिजनों ने सरकारी और निजी दोनों अस्पतालों पर लापरवाही, अमानवीय व्यवहार और इलाज को लेकर व्यावसायिक लालच का गंभीर आरोप लगाया है।
स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने अब तक कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है। परिजन न्याय और जांच की मांग कर रहे हैं।
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रेफर-रेफर के फेर में गई युवक की जान: डॉक्टरों की लापरवाही और देरी बनी मौत की वजह, परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
Baloda Bazar, cg
हादसे के बाद से लेकर अंतिम सांस तक, युवक ने मदद की उम्मीद में कई अस्पतालों के चक्कर लगाए लेकिन रेफर की प्रक्रिया और इलाज में देरी उसकी मौत का कारण बन गई।
घटना पलारी थाना क्षेत्र के बिनौरी मोड़ की है। जानकारी के अनुसार, शुक्रवार शाम करीब साढ़े चार बजे एक तेज रफ्तार ट्रक ने बाइक सवार युवक को टक्कर मार दी, जिससे उसका एक पैर गंभीर रूप से घायल हो गया। मौके पर मौजूद लोगों ने जब देखा कि एम्बुलेंस नहीं पहुंची, तो थानेदार ने निजी मालवाहक वाहन की मदद से घायल को पलारी के सरकारी अस्पताल पहुंचाया।
परिजनों की अनुपस्थिति में ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर आदित्य वर्मा ने प्राथमिक इलाज किए बिना ही युवक को दूसरे अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। प्रत्यक्षदर्शी और पूर्व सैनिक भरत ठाकुर ने मौके पर प्राथमिक इलाज देते हुए भीड़ से स्कार्फ मंगवाकर घायल के पैर की पट्टी खुद बांधी।
कुछ समय बाद परिजन अस्पताल पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि मरीज को जिला अस्पताल भेजा गया है। जब वे वहां पहुंचे, तो मरीज वहां नहीं मिला। बाद में पुलिस के माध्यम से जानकारी मिली कि युवक को जिला मुख्यालय स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
परिजनों ने आरोप लगाया कि निजी अस्पताल ने पहले मोटी रकम मांगी और फिर इलाज के दौरान युवक की मौत हो गई। आरोप ये भी है कि शव देने के बदले अस्पताल प्रबंधन ने 58 हजार रुपए मांगे, जबकि परिजनों के पास सिर्फ 10 हजार ही थे।
इस पूरे घटनाक्रम में घायल की हालत शुरू में स्थिर बताई जा रही थी, लेकिन बार-बार रेफर करने और इलाज में देरी की वजह से उसकी स्थिति बिगड़ती गई। परिजनों ने सरकारी और निजी दोनों अस्पतालों पर लापरवाही, अमानवीय व्यवहार और इलाज को लेकर व्यावसायिक लालच का गंभीर आरोप लगाया है।
स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने अब तक कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है। परिजन न्याय और जांच की मांग कर रहे हैं।
