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छत्तीसगढ़ में कथित CGMSC स्कैम में EOW का एक्शन, पांच आरोपी गिरफ्तार - EOW ACTION IN CGMSC
Raipur, CG
छत्तीसगढ़ में सीजीएमएससी स्कैम को लेकर कार्रवाई हुई है.
छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो और आर्थिक अपराध शाखा ( ACB And EOW) ने छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन में कथित घोटाले को लेकर पांच पूर्व अधिकारियों को अरेस्ट किया है. साल 2023 का यह घोटाला बताया जा रहा है. एसीबी और ईओडब्ल्यू का कहना है कि साल 2023 में चिकित्सा उपकरण और अभिकर्मक रसायनों की खरीद में कथित अनियमितता पर यह एक्शन लिया गया है.
किन लोगों की हुई गिरफ्तारी?: इस एक्शन पर EOW और ACB के एक अधिकारी ने जानकारी दी है. उन्होंने कहा कि सीजीएमएससीएल) में तत्कालीन पदस्थ बसंत कुमार कौशिक, छिरोद रौतिया, कमलकांत पाटनवार, डॉ. अनिल परसाई और दीपक कुमार बांधे को शुक्रवार रात गिरफ्तार किया गया.
जांच एजेंसी ने क्या कहा ?: इस कथित घोटाले में एक्शन के बाद जांच एजेंसी ने कहा कि बसंत कुमार कौशिक उस समय अहम पद पर थे. वे सीजीएमएससीएल के प्रभारी महाप्रबंधक, उपकरण और उप प्रबंधक, क्रय एवं संचालन के पद पर तैनात थे. इसके अलावा छिरोद रौतिया और दीपक कुमार बांधे बायोमेडिकल इंजीनियर के पद पर तैनात थे. कमलकांत पाटनवार उस समय उप प्रबंधक, उपकरण और परसाई उप निदेशक, स्टोर थे.
किन धाराओं के तहत हुई कार्रवाई?: ईओडब्ल्यू की तरफ से कहा गया कि भारतीय दंड संहिता की धारा 409 (आपराधिक विश्वासघात), 120 (बी) (आपराधिक साजिश) के अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया है. पांचों आरोपियों को शनिवार को विशेष एसीबी/ईओडब्ल्यू अदालत में पेश किया गया. विशेष न्यायाधीश अतुल श्रीवास्तव ने एजेंसी को 28 मार्च तक उनकी सात दिन की हिरासत रिमांड की मंजूरी दी है.
घोटाले में कब कब हुआ एक्शन?: 22 जनवरी को एसीबी/ईओडब्ल्यू ने सीजीएमएससीएल (रायपुर) और स्वास्थ्य सेवा निदेशालय के अधिकारियों के साथ-साथ चार फर्मों पर केस दर्ज किया गया. इसमें मोक्षित कॉरपोरेशन (दुर्ग), सीबी कॉरपोरेशन (दुर्ग), रिकॉर्ड्स एंड मेडिकेयर सिस्टम एचएसआईआईडीसी (पंचकुला, हरियाणा) और श्री शारदा इंडस्ट्रीज (रायपुर) और अन्य के खिलाफ सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने का केस दर्ज हुआ है. इस केस में पहले मोक्षित कॉरपोरेशन के निदेशक शशांक चोपड़ा को 29 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था. एसीबी/ईओडब्ल्यू ने पहले कहा था कि कथित घोटाले में स्वास्थ्य केंद्रों में इन वस्तुओं की आवश्यकता/उपलब्धता सुनिश्चित किए बिना अभिकर्मकों और उपकरणों की खरीद शामिल थी.
जांच में क्या खुलासे हुए?: जांच में जो खुलासा किया गया है. उसके मुताबिक सीजीएमएससीएल ने मोक्षित कॉरपोरेशन और उसकी फर्जी कंपनी के साथ मिलीभगत करके जनवरी 2022 से 31 अक्टूबर 2023 के बीच अरबों रुपये की खरीदारी की है. ब्लड सैंपल जुटाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली ईडीटीए ट्यूब मोक्षित कॉरपोरेशन से 2,352 रुपये प्रति ट्यूब की दर से खरीदी गई थी, जबकि अन्य संस्थानों ने इसे अधिकतम 8.50 रुपये में खरीदा था. इसके अलावा सीबीसी मशीन जो खुले बाजार में 5,00,000 रुपये में मिलती है. उसे मोक्षित कॉरपोरेशन ने सीजीएमएससी को 17 लाख रुपये में मुहैया कराई थी. इस तरह के खुलासों के बाद लगातार जांच ऐजेंसी हरकत में है.
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छत्तीसगढ़ में कथित CGMSC स्कैम में EOW का एक्शन, पांच आरोपी गिरफ्तार - EOW ACTION IN CGMSC
Raipur, CG
छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो और आर्थिक अपराध शाखा ( ACB And EOW) ने छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन में कथित घोटाले को लेकर पांच पूर्व अधिकारियों को अरेस्ट किया है. साल 2023 का यह घोटाला बताया जा रहा है. एसीबी और ईओडब्ल्यू का कहना है कि साल 2023 में चिकित्सा उपकरण और अभिकर्मक रसायनों की खरीद में कथित अनियमितता पर यह एक्शन लिया गया है.
किन लोगों की हुई गिरफ्तारी?: इस एक्शन पर EOW और ACB के एक अधिकारी ने जानकारी दी है. उन्होंने कहा कि सीजीएमएससीएल) में तत्कालीन पदस्थ बसंत कुमार कौशिक, छिरोद रौतिया, कमलकांत पाटनवार, डॉ. अनिल परसाई और दीपक कुमार बांधे को शुक्रवार रात गिरफ्तार किया गया.
जांच एजेंसी ने क्या कहा ?: इस कथित घोटाले में एक्शन के बाद जांच एजेंसी ने कहा कि बसंत कुमार कौशिक उस समय अहम पद पर थे. वे सीजीएमएससीएल के प्रभारी महाप्रबंधक, उपकरण और उप प्रबंधक, क्रय एवं संचालन के पद पर तैनात थे. इसके अलावा छिरोद रौतिया और दीपक कुमार बांधे बायोमेडिकल इंजीनियर के पद पर तैनात थे. कमलकांत पाटनवार उस समय उप प्रबंधक, उपकरण और परसाई उप निदेशक, स्टोर थे.
किन धाराओं के तहत हुई कार्रवाई?: ईओडब्ल्यू की तरफ से कहा गया कि भारतीय दंड संहिता की धारा 409 (आपराधिक विश्वासघात), 120 (बी) (आपराधिक साजिश) के अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया है. पांचों आरोपियों को शनिवार को विशेष एसीबी/ईओडब्ल्यू अदालत में पेश किया गया. विशेष न्यायाधीश अतुल श्रीवास्तव ने एजेंसी को 28 मार्च तक उनकी सात दिन की हिरासत रिमांड की मंजूरी दी है.
घोटाले में कब कब हुआ एक्शन?: 22 जनवरी को एसीबी/ईओडब्ल्यू ने सीजीएमएससीएल (रायपुर) और स्वास्थ्य सेवा निदेशालय के अधिकारियों के साथ-साथ चार फर्मों पर केस दर्ज किया गया. इसमें मोक्षित कॉरपोरेशन (दुर्ग), सीबी कॉरपोरेशन (दुर्ग), रिकॉर्ड्स एंड मेडिकेयर सिस्टम एचएसआईआईडीसी (पंचकुला, हरियाणा) और श्री शारदा इंडस्ट्रीज (रायपुर) और अन्य के खिलाफ सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने का केस दर्ज हुआ है. इस केस में पहले मोक्षित कॉरपोरेशन के निदेशक शशांक चोपड़ा को 29 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था. एसीबी/ईओडब्ल्यू ने पहले कहा था कि कथित घोटाले में स्वास्थ्य केंद्रों में इन वस्तुओं की आवश्यकता/उपलब्धता सुनिश्चित किए बिना अभिकर्मकों और उपकरणों की खरीद शामिल थी.
जांच में क्या खुलासे हुए?: जांच में जो खुलासा किया गया है. उसके मुताबिक सीजीएमएससीएल ने मोक्षित कॉरपोरेशन और उसकी फर्जी कंपनी के साथ मिलीभगत करके जनवरी 2022 से 31 अक्टूबर 2023 के बीच अरबों रुपये की खरीदारी की है. ब्लड सैंपल जुटाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली ईडीटीए ट्यूब मोक्षित कॉरपोरेशन से 2,352 रुपये प्रति ट्यूब की दर से खरीदी गई थी, जबकि अन्य संस्थानों ने इसे अधिकतम 8.50 रुपये में खरीदा था. इसके अलावा सीबीसी मशीन जो खुले बाजार में 5,00,000 रुपये में मिलती है. उसे मोक्षित कॉरपोरेशन ने सीजीएमएससी को 17 लाख रुपये में मुहैया कराई थी. इस तरह के खुलासों के बाद लगातार जांच ऐजेंसी हरकत में है.
