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जशपुर में एनसीसी कैडेट्स के लिए फ्लाइंग ट्रेनिंग, 90 बच्चे आसमान में भर रहे उड़ान
Jashpur, cg
जशपुर में एनसीसी कैडेट्स के लिए फ्लाइंग ट्रेनिंग की शुरुआत की गई है.जिसमें 90 बच्चों को ट्रेनिंग दी जा रही है.
छत्तीसगढ़ के जशपुर के आगडीह हवाई पट्टी पर अब एनसीसी कैडेट्स को हवा में उड़ान भरने का सुनहरा मौका मिल रहा है.3 सीजी एयर स्क्वॉड्रन रायपुर के बैनर तले इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम को शुरु किया गया है.जिसके तहत राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) निदेशालय मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ ने अपने सबसे बड़े समूह मुख्यालय, रायपुर के तत्वावधान में फ्लाइंग प्रशिक्षण की सुविधा जशपुर तक बढ़ाई है. इससे पहले ये ट्रेनिंग केवल रायपुर हवाई अड्डे तक सीमित था.
एविएशन फील्ड के लिए बड़ा मौका : इस प्रशिक्षण में एनसीसी सीनियर डिवीजन के कैडेट्स लड़के और लड़कियां दोनों शामिल हैं. जिन्हें टू सीटर माइक्रो लाइट एयरक्राफ्ट के माध्यम से उड़ान भरने का अनुभव दिया जा रहा है. प्रशिक्षण के दौरान कैडेट्स को छोटे हवाई जहाज से उड़ान भरने, रनवे पर लैंड करने, विमान के कॉकपिट और उसके हिस्सों के संचालन की बुनियादी जानकारी प्रदान की जा रही है. यह पहल उन युवा एविएटर्स (विमान चालकों) के लिए एक बड़ा अवसर है जो भविष्य में इस क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं. दूरस्थ क्षेत्रों में स्थित कैडेट्स को होने वाली चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए, इस पायलट परियोजना के तहत प्रशिक्षण को सुलभ बनाते हुए भी उच्च स्तरीय प्रशिक्षण गुणवत्ता और विमानन सुरक्षा सुनिश्चित की गई है.


किनकी देखरेख में हो रही है ट्रेनिंग : इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के संचालन और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करने की पूरी जिम्मेदारी रायपुर स्थित नंबर 3 छत्तीसगढ़ एनसीसी एयर स्क्वॉड्रन निभा रहे हैं. जशपुर के आगडीह हवाई अड्डे पर एनसीसी के एयर विंग के कैडेट्स इस पूरे प्रशिक्षण अभियान की 10 सदस्यीय तकनीकी टीम के सदस्यों और विमान उड़ाने का प्रशिक्षण दे रहे हैं. 2007 बैच के विंग कमांडर विवेक कुमार साहू ने बताया कि इस महीने के 7 तारीख से संचालित की जा रही. इस प्रशिक्षण में फिलहाल 35 प्रशिक्षु कैडेट्स हिस्सा ले रहे हैं. इस माह के अंत तक 100 कैडेट्स को इस विमान के उड़ान और नियंत्रण का प्रशिक्षण दिया जाएगा.

एयर फोर्स और एविएशन के क्षेत्र में करियर के रूप में इसे चुनने वाले युवाओं के लिए यह प्रशिक्षण बेहद कारगर है. सबसे पहले मैंने भी एनसीसी कैडेट्स के रूप में उड़ान भरी थी जो आगे चलकर उनके करियर के लिए मील का पत्थर साबित हुआ. एक कैडेट्स के लिए एयरफोर्स या एविएशन क्षेत्र में जाने वाले युवा के लिए यह प्रशिक्षण फ्लाइंग स्कूल में प्रवेश के लिए सहायक सिद्ध होता है- विवेक साहू, विंग कमांडर

पहले माना एयरपोर्ट में दी जा रही थी ट्रेनिंग : विंग कमांडर वीके साहू ने बताया की रायपुर के माना स्थिति स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डे पर इस प्रशिक्षण का संचालन किया जा रहा था. लेकिन माना एयरपोर्ट में एयर ट्रैफिक के दबाव और उसके बीच 100 कैडेट्स को एयरक्राफ्ट उड़ान का प्रशिक्षण देने में कई प्रकार की दिक्कतें आ रही थी. इसके बाद इस प्रशिक्षण को प्रदेश के किसी और छोटे हवाई अड्डे या रनवे पर शिफ्ट करने का निर्णय लिया गया. इसके बाद जशपुर के आगडीह हवाई अड्डे का चयन किया गया. यहां का शांत वातावरण और रनवे इस प्रशिक्षण के लिए बहुत अच्छा साबित हुआ है. यह पूरा प्रशिक्षण और एयर एनसीसी के कैडेट्स के साथ जशपुर के लिए भी मील का पत्थर साबित होगा.

एयरफोर्स का सपना देखने वालों के लिए सुनहरा अवसर : माइक्रो लाइट एयरक्राफ्ट के उड़ान के प्रशिक्षण में शामिल एयर एनसीसी कैडेट्स उमेश कुमार साहू ने बताया कि हम जशपुर फ्लाइंग के लिए आए हुए हैं. एनसीसी एयर विंग में यह एक ट्रेनिंग का हिस्सा होता है.जो हमें जशपुर में दी जा रही है, इस दौरान हमें विमान उड़ाने की तकनीकी बिंदुओं पर जानकारी दी जा रही है. साथ ही उड़ाने और उतरने की तरीका भी सिखाया जा रहे हैं.मैं आगे चलकर एयरफोर्स में जाना चाहता हूं. एनसीसी एयर विंग की कैडेट संजू सिन्हा बताती है कि वह रायपुर से आई हैं और जशपुर के प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं.
रायपुर के माना एयरपोर्ट पर भी इससे पहले एयर एनसीसी का प्रशिक्षण लिया है, लेकिन जशपुर की शांत फिजा यहां का एयरनॉट, एनवायरनमेंट में पायलट के बगल में को पायलट के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त करना एक अनूठा अनुभव है. यहां सुरक्षा और सुविधा के तमाम इंतजाम बेहद अच्छे हैं. आगे चलकर मैं फ्लाइंग ऑफिसर बनना चाहती हूं.इसलिए कोर्स ज्वाइन किया है - संजू सिन्हा, एनसीसी एयर विंग कैडेट
किस ट्रेनी एयरक्रॉफ्ट से दी जा रही है ट्रेनिंग - जिस टू सीटर माइक्रो लाइट एयरक्राफ्ट से एयर एनसीसी के कैडेट्स को उड़ान का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, वो एक घंटे की उड़ान में 13 लीटर ईंधन खर्च करता है. इसमें 50 लीटर एवियशन फ्यूल भरने की क्षमता है. इसे 20000 फुट की ऊंचाई पर उड़ाया जा सकता है. लेकिन फिलहाल लगभग 1000 फुट की ऊंचाई पर प्रशिक्षु कैडेट्स को इसे उड़ाना सिखाया जा रहा है. रायपुर से जशपुर तक उड़कर आने में इस विमान को 2 घंटे 5 मिनट का समय लगा.
आपको बता दें कि ये पहल राज्य में दीर्घकालिक विमानन प्रशिक्षण अवसंरचना (इंफ्रास्ट्रक्चर) विकसित करने की व्यापक योजना का हिस्सा है. जैसे-जैसे यह कार्यक्रम आगे बढ़ेगा, इसके लिए अतिरिक्त सुविधाओं और संसाधनों का विकास किया जाएगा. जिससे छत्तीसगढ़ के अधिक से अधिक कैडेट्स को व्यावसायिक फ्लाइंग प्रशिक्षण का लाभ मिल सके. यह कदम राज्य में एविएशन प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने, भारतीय वायुसेना और विमानन क्षेत्र में कैडेट्स के उज्ज्वल भविष्य के लिए आवश्यक कौशल प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है.
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जशपुर में एनसीसी कैडेट्स के लिए फ्लाइंग ट्रेनिंग, 90 बच्चे आसमान में भर रहे उड़ान
Jashpur, cg
छत्तीसगढ़ के जशपुर के आगडीह हवाई पट्टी पर अब एनसीसी कैडेट्स को हवा में उड़ान भरने का सुनहरा मौका मिल रहा है.3 सीजी एयर स्क्वॉड्रन रायपुर के बैनर तले इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम को शुरु किया गया है.जिसके तहत राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) निदेशालय मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ ने अपने सबसे बड़े समूह मुख्यालय, रायपुर के तत्वावधान में फ्लाइंग प्रशिक्षण की सुविधा जशपुर तक बढ़ाई है. इससे पहले ये ट्रेनिंग केवल रायपुर हवाई अड्डे तक सीमित था.
एविएशन फील्ड के लिए बड़ा मौका : इस प्रशिक्षण में एनसीसी सीनियर डिवीजन के कैडेट्स लड़के और लड़कियां दोनों शामिल हैं. जिन्हें टू सीटर माइक्रो लाइट एयरक्राफ्ट के माध्यम से उड़ान भरने का अनुभव दिया जा रहा है. प्रशिक्षण के दौरान कैडेट्स को छोटे हवाई जहाज से उड़ान भरने, रनवे पर लैंड करने, विमान के कॉकपिट और उसके हिस्सों के संचालन की बुनियादी जानकारी प्रदान की जा रही है. यह पहल उन युवा एविएटर्स (विमान चालकों) के लिए एक बड़ा अवसर है जो भविष्य में इस क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं. दूरस्थ क्षेत्रों में स्थित कैडेट्स को होने वाली चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए, इस पायलट परियोजना के तहत प्रशिक्षण को सुलभ बनाते हुए भी उच्च स्तरीय प्रशिक्षण गुणवत्ता और विमानन सुरक्षा सुनिश्चित की गई है.


किनकी देखरेख में हो रही है ट्रेनिंग : इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के संचालन और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करने की पूरी जिम्मेदारी रायपुर स्थित नंबर 3 छत्तीसगढ़ एनसीसी एयर स्क्वॉड्रन निभा रहे हैं. जशपुर के आगडीह हवाई अड्डे पर एनसीसी के एयर विंग के कैडेट्स इस पूरे प्रशिक्षण अभियान की 10 सदस्यीय तकनीकी टीम के सदस्यों और विमान उड़ाने का प्रशिक्षण दे रहे हैं. 2007 बैच के विंग कमांडर विवेक कुमार साहू ने बताया कि इस महीने के 7 तारीख से संचालित की जा रही. इस प्रशिक्षण में फिलहाल 35 प्रशिक्षु कैडेट्स हिस्सा ले रहे हैं. इस माह के अंत तक 100 कैडेट्स को इस विमान के उड़ान और नियंत्रण का प्रशिक्षण दिया जाएगा.

एयर फोर्स और एविएशन के क्षेत्र में करियर के रूप में इसे चुनने वाले युवाओं के लिए यह प्रशिक्षण बेहद कारगर है. सबसे पहले मैंने भी एनसीसी कैडेट्स के रूप में उड़ान भरी थी जो आगे चलकर उनके करियर के लिए मील का पत्थर साबित हुआ. एक कैडेट्स के लिए एयरफोर्स या एविएशन क्षेत्र में जाने वाले युवा के लिए यह प्रशिक्षण फ्लाइंग स्कूल में प्रवेश के लिए सहायक सिद्ध होता है- विवेक साहू, विंग कमांडर

पहले माना एयरपोर्ट में दी जा रही थी ट्रेनिंग : विंग कमांडर वीके साहू ने बताया की रायपुर के माना स्थिति स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डे पर इस प्रशिक्षण का संचालन किया जा रहा था. लेकिन माना एयरपोर्ट में एयर ट्रैफिक के दबाव और उसके बीच 100 कैडेट्स को एयरक्राफ्ट उड़ान का प्रशिक्षण देने में कई प्रकार की दिक्कतें आ रही थी. इसके बाद इस प्रशिक्षण को प्रदेश के किसी और छोटे हवाई अड्डे या रनवे पर शिफ्ट करने का निर्णय लिया गया. इसके बाद जशपुर के आगडीह हवाई अड्डे का चयन किया गया. यहां का शांत वातावरण और रनवे इस प्रशिक्षण के लिए बहुत अच्छा साबित हुआ है. यह पूरा प्रशिक्षण और एयर एनसीसी के कैडेट्स के साथ जशपुर के लिए भी मील का पत्थर साबित होगा.

एयरफोर्स का सपना देखने वालों के लिए सुनहरा अवसर : माइक्रो लाइट एयरक्राफ्ट के उड़ान के प्रशिक्षण में शामिल एयर एनसीसी कैडेट्स उमेश कुमार साहू ने बताया कि हम जशपुर फ्लाइंग के लिए आए हुए हैं. एनसीसी एयर विंग में यह एक ट्रेनिंग का हिस्सा होता है.जो हमें जशपुर में दी जा रही है, इस दौरान हमें विमान उड़ाने की तकनीकी बिंदुओं पर जानकारी दी जा रही है. साथ ही उड़ाने और उतरने की तरीका भी सिखाया जा रहे हैं.मैं आगे चलकर एयरफोर्स में जाना चाहता हूं. एनसीसी एयर विंग की कैडेट संजू सिन्हा बताती है कि वह रायपुर से आई हैं और जशपुर के प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं.
रायपुर के माना एयरपोर्ट पर भी इससे पहले एयर एनसीसी का प्रशिक्षण लिया है, लेकिन जशपुर की शांत फिजा यहां का एयरनॉट, एनवायरनमेंट में पायलट के बगल में को पायलट के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त करना एक अनूठा अनुभव है. यहां सुरक्षा और सुविधा के तमाम इंतजाम बेहद अच्छे हैं. आगे चलकर मैं फ्लाइंग ऑफिसर बनना चाहती हूं.इसलिए कोर्स ज्वाइन किया है - संजू सिन्हा, एनसीसी एयर विंग कैडेट
किस ट्रेनी एयरक्रॉफ्ट से दी जा रही है ट्रेनिंग - जिस टू सीटर माइक्रो लाइट एयरक्राफ्ट से एयर एनसीसी के कैडेट्स को उड़ान का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, वो एक घंटे की उड़ान में 13 लीटर ईंधन खर्च करता है. इसमें 50 लीटर एवियशन फ्यूल भरने की क्षमता है. इसे 20000 फुट की ऊंचाई पर उड़ाया जा सकता है. लेकिन फिलहाल लगभग 1000 फुट की ऊंचाई पर प्रशिक्षु कैडेट्स को इसे उड़ाना सिखाया जा रहा है. रायपुर से जशपुर तक उड़कर आने में इस विमान को 2 घंटे 5 मिनट का समय लगा.
आपको बता दें कि ये पहल राज्य में दीर्घकालिक विमानन प्रशिक्षण अवसंरचना (इंफ्रास्ट्रक्चर) विकसित करने की व्यापक योजना का हिस्सा है. जैसे-जैसे यह कार्यक्रम आगे बढ़ेगा, इसके लिए अतिरिक्त सुविधाओं और संसाधनों का विकास किया जाएगा. जिससे छत्तीसगढ़ के अधिक से अधिक कैडेट्स को व्यावसायिक फ्लाइंग प्रशिक्षण का लाभ मिल सके. यह कदम राज्य में एविएशन प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने, भारतीय वायुसेना और विमानन क्षेत्र में कैडेट्स के उज्ज्वल भविष्य के लिए आवश्यक कौशल प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है.
