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छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल रिहा, राजनीतिक बयानबाजी तेज
रायपुर (छ.ग.)
रायपुर सेंट्रल जेल से रिहाई के बाद भाजपा ने उठाए आदिवासी नेता कवासी लखमा की जेल में बंदी पर सवाल, कांग्रेस ने एजेंसियों पर लगाया राजनीतिक दुरुपयोग का आरोप
छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल को 170 दिन की बंदी के बाद रायपुर सेंट्रल जेल से शनिवार को रिहा कर दिया गया। चैतन्य की रिहाई ने राजनीतिक दलों के बीच तीखी बयानबाजी को जन्म दिया। भाजपा ने इसे चयनात्मक न्याय बताया, जबकि कांग्रेस नेताओं ने केंद्र और जांच एजेंसियों के दुरुपयोग पर सवाल उठाए।
सूत्रों के अनुसार, चैतन्य बघेल को शराब घोटाले से जुड़े मामले में उच्च न्यायालय से जमानत मिली। रिहाई के दौरान कोर्ट ने उन्हें कई शर्तों के पालन का निर्देश दिया, जिनमें पासपोर्ट जमा करना, मोबाइल या पते में बदलाव की सूचना देना और किसी भी आरोपी या गवाह को धमकाने से परहेज़ करना शामिल है।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच में दावा किया था कि चैतन्य बघेल तक शराब घोटाले से संबंधित अवैध धन के लेन-देन के प्रमाण मिले थे। एजेंसी ने बताया कि सिंडिकेट के माध्यम से कई करोड़ रुपए का लेन-देन चैतन्य तक पहुंचा। जमानत मिलने के बाद उन्होंने कहा कि कार्रवाई उनके खिलाफ राजनीतिक कारणों से की गई थी।
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता देवीलाल ठाकुर ने कहा कि आदिवासी नेता कवासी लखमा आज भी जेल में हैं, जबकि भूपेश के पुत्र को जमानत मिली। उनका दावा है कि कांग्रेस ने आदिवासी नेताओं को जानबूझकर निशाना बनाया। वहीं, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने केंद्र और जांच एजेंसियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि बिना दोष सिद्ध हुए ही सजा दी जा रही है और यह कानून के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
ED के अनुसार, छत्तीसगढ़ में 3200 करोड़ रुपए से अधिक के घोटाले में कई राजनेता, आबकारी अधिकारी और कारोबारी शामिल थे। घोटाले में नकली होलोग्राम वाली शराब की बिक्री, डिस्टलरी संचालकों से कमीशन, और सप्लाई क्षेत्रों के आधार पर अवैध धन की वसूली शामिल थी। सिंडिकेट ने सरकारी और निजी नेटवर्क के जरिए भारी रकम का लेन-देन किया।
चैतन्य बघेल की रिहाई के बाद कवासी लखमा और अन्य आरोपियों की स्थिति अब भी न्यायालय और एजेंसियों की निगरानी में बनी हुई है। राजनीतिक दल इस मामले को लेकर सक्रिय हैं, जबकि जांच एजेंसियां अपने प्रमाणों की समीक्षा कर रही हैं।
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छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल को 170 दिन की बंदी के बाद रायपुर सेंट्रल जेल से शनिवार को रिहा कर दिया गया। चैतन्य की रिहाई ने राजनीतिक दलों के बीच तीखी बयानबाजी को जन्म दिया। भाजपा ने इसे चयनात्मक न्याय बताया, जबकि कांग्रेस नेताओं ने केंद्र और जांच एजेंसियों के दुरुपयोग पर सवाल उठाए।
सूत्रों के अनुसार, चैतन्य बघेल को शराब घोटाले से जुड़े मामले में उच्च न्यायालय से जमानत मिली। रिहाई के दौरान कोर्ट ने उन्हें कई शर्तों के पालन का निर्देश दिया, जिनमें पासपोर्ट जमा करना, मोबाइल या पते में बदलाव की सूचना देना और किसी भी आरोपी या गवाह को धमकाने से परहेज़ करना शामिल है।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच में दावा किया था कि चैतन्य बघेल तक शराब घोटाले से संबंधित अवैध धन के लेन-देन के प्रमाण मिले थे। एजेंसी ने बताया कि सिंडिकेट के माध्यम से कई करोड़ रुपए का लेन-देन चैतन्य तक पहुंचा। जमानत मिलने के बाद उन्होंने कहा कि कार्रवाई उनके खिलाफ राजनीतिक कारणों से की गई थी।
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता देवीलाल ठाकुर ने कहा कि आदिवासी नेता कवासी लखमा आज भी जेल में हैं, जबकि भूपेश के पुत्र को जमानत मिली। उनका दावा है कि कांग्रेस ने आदिवासी नेताओं को जानबूझकर निशाना बनाया। वहीं, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने केंद्र और जांच एजेंसियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि बिना दोष सिद्ध हुए ही सजा दी जा रही है और यह कानून के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
ED के अनुसार, छत्तीसगढ़ में 3200 करोड़ रुपए से अधिक के घोटाले में कई राजनेता, आबकारी अधिकारी और कारोबारी शामिल थे। घोटाले में नकली होलोग्राम वाली शराब की बिक्री, डिस्टलरी संचालकों से कमीशन, और सप्लाई क्षेत्रों के आधार पर अवैध धन की वसूली शामिल थी। सिंडिकेट ने सरकारी और निजी नेटवर्क के जरिए भारी रकम का लेन-देन किया।
चैतन्य बघेल की रिहाई के बाद कवासी लखमा और अन्य आरोपियों की स्थिति अब भी न्यायालय और एजेंसियों की निगरानी में बनी हुई है। राजनीतिक दल इस मामले को लेकर सक्रिय हैं, जबकि जांच एजेंसियां अपने प्रमाणों की समीक्षा कर रही हैं।
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