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'ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच सुलझेगा चार दशक पुराना विवाद', महानदी जल बंटवारे पर मंत्री का बड़ा बयान
CG
छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच जारी महानदी विवाद जल्द सुलझ सकता है। इस मामले में मंत्री केदार कश्यप में कहा कि दोनों ही राज्य विवाद झुलझाने की कोशिश में लगे हैं। बता दें कि महानदी जल बंटवारे को लेकर दोनों राज्यों के बीच चार दशकों से विवाद चल रहा है।
छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच महानदी जल विवाद को लेकर छत्तीसगढ़ के जल संसाधन मंत्री केदारनाथ कश्यप ने बड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की है। उन्होंने कहा कि ओडिशा और छत्तीसगढ़ में बीजेपी की सरकार है और केंद्र में भी बीजेपी की सरकार है। मुझे उम्मीद है कि आने वाले दिनों में जल बंटवारे संबंधी समस्या को बैठक कर सुलझा लिया जाएगा। कोई अप्रिय घटना नहीं होगी।
चार दशकों से चल रहा है विवाद
छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच महानदी जल बंटवारे को लेकर चार दशक से विवाद चल रहा है। जल विवाद के निपटारे के लिए ट्रिब्यूनल का गठन भी किया गया है। मामला ट्रिब्यूनल में होने के सवाल पर कश्यप ने कहा हम इसे दोनों तरह से सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं। हमारे प्रयास जल्द ही दिखेंगे। मुझे उम्मीद है कि दोनों सरकारें एक साथ बैठेंगी और इस मुद्दे को हल करने की दिशा में कदम उठाएंगी।
दोनों राज्यों के बीच विवाद
महानदी जल बंटवारा ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच विवाद का विषय बना हुआ है। बीते दिनों मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा था कि उनकी सरकार इस मामले को जल्द हल करने के लिए पड़ोसी राज्य के साथ गंभीरता से बातचीत कर रही है। माझी ने कहा, "हमारी सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और इस मुद्दे पर चर्चा चल रही है। मैंने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के समक्ष दो बार इस मुद्दे को उठाया है और हमें उम्मीद है कि विवाद का जल्द ही समाधान निकल आएगा।"
राज्यसभा में उठा था सवाल
वहीं, जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने संसद के शीतकालीन सत्र में 16 दिसंबर को राज्यसभा में बताया कि प्रक्रियागत चूक के कारण केंद्र सरकार ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच चल रहे महानदी जल-बंटवारे विवाद में पक्ष नहीं बन सकती। यह स्पष्टीकरण बीजद सांसद सस्मित पात्रा के उस सवाल के जवाब में आया, जिसमें उन्होंने पूछा था कि महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण के समक्ष समाधान प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए केंद्र खुद पक्ष क्यों नहीं बना रहा है।
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छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच महानदी जल विवाद को लेकर छत्तीसगढ़ के जल संसाधन मंत्री केदारनाथ कश्यप ने बड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की है। उन्होंने कहा कि ओडिशा और छत्तीसगढ़ में बीजेपी की सरकार है और केंद्र में भी बीजेपी की सरकार है। मुझे उम्मीद है कि आने वाले दिनों में जल बंटवारे संबंधी समस्या को बैठक कर सुलझा लिया जाएगा। कोई अप्रिय घटना नहीं होगी।
चार दशकों से चल रहा है विवाद
छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच महानदी जल बंटवारे को लेकर चार दशक से विवाद चल रहा है। जल विवाद के निपटारे के लिए ट्रिब्यूनल का गठन भी किया गया है। मामला ट्रिब्यूनल में होने के सवाल पर कश्यप ने कहा हम इसे दोनों तरह से सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं। हमारे प्रयास जल्द ही दिखेंगे। मुझे उम्मीद है कि दोनों सरकारें एक साथ बैठेंगी और इस मुद्दे को हल करने की दिशा में कदम उठाएंगी।
दोनों राज्यों के बीच विवाद
महानदी जल बंटवारा ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच विवाद का विषय बना हुआ है। बीते दिनों मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा था कि उनकी सरकार इस मामले को जल्द हल करने के लिए पड़ोसी राज्य के साथ गंभीरता से बातचीत कर रही है। माझी ने कहा, "हमारी सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और इस मुद्दे पर चर्चा चल रही है। मैंने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के समक्ष दो बार इस मुद्दे को उठाया है और हमें उम्मीद है कि विवाद का जल्द ही समाधान निकल आएगा।"
राज्यसभा में उठा था सवाल
वहीं, जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने संसद के शीतकालीन सत्र में 16 दिसंबर को राज्यसभा में बताया कि प्रक्रियागत चूक के कारण केंद्र सरकार ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच चल रहे महानदी जल-बंटवारे विवाद में पक्ष नहीं बन सकती। यह स्पष्टीकरण बीजद सांसद सस्मित पात्रा के उस सवाल के जवाब में आया, जिसमें उन्होंने पूछा था कि महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण के समक्ष समाधान प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए केंद्र खुद पक्ष क्यों नहीं बना रहा है।
