छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में दोस्ती और भरोसे को तोड़ने का एक गंभीर मामला सामने आया है। पाटन थाना क्षेत्र में एक संविदा जूनियर इंजीनियर पर अपने बचपन के दोस्त से करीब 27 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने और रकम वापस मांगने पर झूठे आपराधिक मामले में फंसाने की धमकी देने का आरोप लगा है। पुलिस ने यह मामला अदालत के आदेश के बाद दर्ज किया है।
मामले के अनुसार, आरोपी अनिरुद्ध ताम्रकार पाटन जनपद कार्यालय में संविदा जूनियर इंजीनियर के पद पर पदस्थ है। पीड़ित आकाश कुमार शर्मा प्रोटीन सप्लीमेंट्स के होलसेल व्यापार से जुड़े हैं और दोनों की दोस्ती बचपन से रही है। वर्ष 2021 में आरोपी ने वेतन नहीं मिलने और आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए व्यापार शुरू करने के लिए मदद मांगी।
आरोपी ने अपनी पत्नी के नाम पर भिलाई के रिसाली क्षेत्र में प्रोटीन सप्लीमेंट्स की दुकान खोलने की योजना बताई। सरकारी सेवा में होने के कारण दुकान अपने नाम पर न खोल पाने की बात कहते हुए उसने दोस्त से आर्थिक सहयोग लिया। भरोसे में आकर पीड़ित ने अलग-अलग चरणों में नकद और बैंक ट्रांसफर के माध्यम से राशि दी। शिकायत के मुताबिक, अक्टूबर 2021 में आरोपी की पत्नी के बैंक खाते में 5 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए, जबकि शेष रकम कैश और माल के रूप में दी गई। कुल मिलाकर 27 लाख रुपये का लेन-देन हुआ।
दुकान शुरू होने के बाद भुगतान की मांग करने पर आरोपी ने किश्तों में जून 2022 तक करीब 6 लाख रुपये लौटाए। इसके बाद जुलाई 2022 में दोबारा पैसों की जरूरत बताकर 6 लाख रुपये नकद ले लिए, लेकिन फिर भुगतान बंद हो गया। पीड़ित का आरोप है कि लगातार मांग करने पर आरोपी ने संपर्क तोड़ लिया और फोन पर जान से मारने की धमकी दी। यही नहीं, पत्नी के साथ छेड़छाड़ के झूठे मामले में फंसाने की चेतावनी भी दी गई।
पीड़ित ने 25 अक्टूबर 2025 को पाटन थाने में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन पुलिस ने केवल हस्तक्षेप योग्य सूचना दर्ज कर FIR नहीं की। इसके बाद दुर्ग पुलिस अधीक्षक कार्यालय में भी लिखित शिकायत दी गई, वहां से भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अंततः पीड़ित ने न्यायालय की शरण ली।
न्यायालय ने प्रस्तुत दस्तावेजों, बैंक लेन-देन के रिकॉर्ड और प्रारंभिक पुलिस रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध पाया। कोर्ट ने पुलिस को सात दिनों के भीतर मामला दर्ज करने के निर्देश दिए। इसके बाद पाटन पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं में धोखाधड़ी, धमकी और अन्य अपराधों का प्रकरण दर्ज किया।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच दस्तावेजों, बैंक ट्रांजेक्शन और गवाहों के बयान के आधार पर की जा रही है। यह प्रकरण न केवल आर्थिक अपराध से जुड़ा है, बल्कि पुलिस की प्रारंभिक कार्रवाई और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े करता है।
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