अरावली से धर्मांतरण तक: रायपुर में भागवत बोले—विकास और संरक्षण के बीच ‘बीच का रास्ता’ जरूरी

रायपुर (छ.ग.)

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युवा संवाद में RSS प्रमुख ने पर्यावरण, सामाजिक भरोसे, मंदिर प्रबंधन और युवाओं की चुनौतियों पर रखे विचार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने अरावली पर्वतमाला, धर्मांतरण, मंदिर प्रबंधन और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट रुख रखते हुए कहा कि आज की दुनिया दो ही विकल्पों पर चल रही है—या तो सब कुछ उजाड़ दो या पूरी तरह रोक दो। रायपुर स्थित एम्स ऑडिटोरियम में आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि भारत को इन दोनों के बीच संतुलन का रास्ता निकालना होगा, जहां विकास भी हो और प्रकृति भी सुरक्षित रहे।

डॉ. भागवत ने कहा कि अरावली जैसे पर्यावरणीय मुद्दों पर वैश्विक स्तर पर सोच सीमित है। या तो जंगल काटकर विकास किया जा रहा है, या फिर संरक्षण के नाम पर विकास को पूरी तरह रोका जा रहा है। उनके मुताबिक, भारत ही ऐसा देश है जो इस टकराव के बीच व्यावहारिक समाधान तलाशने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने इसे आने वाले समय की सबसे बड़ी चुनौती बताया।

धर्मांतरण पर सामाजिक भरोसे की कमी का सवाल

कार्यक्रम में धर्मांतरण को लेकर पूछे गए सवाल पर संघ प्रमुख ने कहा कि अपने ही समाज के लोगों पर अविश्वास, मतांतरण का एक बड़ा कारण है। यदि समाज अपने लोगों के साथ खड़ा हो, उनके सुख-दुख में शामिल हो और भरोसा बहाल करे, तो बहुत से लोग स्वतः ही वापसी का रास्ता चुनेंगे। उन्होंने जोर दिया कि मतांतरण कर चुके लोगों के प्रति तिरस्कार नहीं, बल्कि सम्मान और संवाद की जरूरत है।

मंदिर प्रबंधन और सुप्रीम कोर्ट का रास्ता

डॉ. भागवत ने मंदिरों के प्रबंधन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि देश में कई मंदिर निजी हैं और कई सरकारी नियंत्रण में हैं, लेकिन दोनों ही व्यवस्थाओं में अव्यवस्थाएं हैं। उन्होंने कहा कि अब यह चर्चा बढ़ रही है कि मंदिरों का संचालन उनके वास्तविक हितधारकों के हाथ में होना चाहिए। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने की प्रक्रिया पर भी विचार चल रहा है।

हिंदुत्व, विविधता और एकता

हिंदुत्व की अवधारणा पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि अलग दिखना एकता के खिलाफ नहीं है। भारत सदियों से विविधताओं के साथ एक राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ता रहा है। उनके अनुसार, एकरूपता नहीं बल्कि साझा मूल्य ही समाज को जोड़ते हैं।

युवाओं में अकेलापन और नशे की बढ़ती समस्या

युवा संवाद में डॉ. भागवत ने युवाओं के बीच बढ़ते अकेलेपन और नशे की प्रवृत्ति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि परिवारों में संवाद की कमी के कारण युवा खुद को अलग-थलग महसूस कर रहे हैं। ऐसे में मोबाइल और नशा आसान विकल्प बनकर सामने आ रहे हैं। उन्होंने समाज और परिवार दोनों से इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।

संघ प्रमुख का यह तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरा RSS के शताब्दी वर्ष के संदर्भ में अहम माना जा रहा है। 1 जनवरी को राम मंदिर परिसर में सामाजिक सद्भावना बैठक प्रस्तावित है, जिसमें विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। जानकारों के अनुसार, आदिवासी और युवा बहुल राज्य में यह संवाद सामाजिक और वैचारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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www.dainikjagranmpcg.com
31 Dec 2025 By Nitin Trivedi

अरावली से धर्मांतरण तक: रायपुर में भागवत बोले—विकास और संरक्षण के बीच ‘बीच का रास्ता’ जरूरी

रायपुर (छ.ग.)

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने अरावली पर्वतमाला, धर्मांतरण, मंदिर प्रबंधन और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट रुख रखते हुए कहा कि आज की दुनिया दो ही विकल्पों पर चल रही है—या तो सब कुछ उजाड़ दो या पूरी तरह रोक दो। रायपुर स्थित एम्स ऑडिटोरियम में आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि भारत को इन दोनों के बीच संतुलन का रास्ता निकालना होगा, जहां विकास भी हो और प्रकृति भी सुरक्षित रहे।

डॉ. भागवत ने कहा कि अरावली जैसे पर्यावरणीय मुद्दों पर वैश्विक स्तर पर सोच सीमित है। या तो जंगल काटकर विकास किया जा रहा है, या फिर संरक्षण के नाम पर विकास को पूरी तरह रोका जा रहा है। उनके मुताबिक, भारत ही ऐसा देश है जो इस टकराव के बीच व्यावहारिक समाधान तलाशने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने इसे आने वाले समय की सबसे बड़ी चुनौती बताया।

धर्मांतरण पर सामाजिक भरोसे की कमी का सवाल

कार्यक्रम में धर्मांतरण को लेकर पूछे गए सवाल पर संघ प्रमुख ने कहा कि अपने ही समाज के लोगों पर अविश्वास, मतांतरण का एक बड़ा कारण है। यदि समाज अपने लोगों के साथ खड़ा हो, उनके सुख-दुख में शामिल हो और भरोसा बहाल करे, तो बहुत से लोग स्वतः ही वापसी का रास्ता चुनेंगे। उन्होंने जोर दिया कि मतांतरण कर चुके लोगों के प्रति तिरस्कार नहीं, बल्कि सम्मान और संवाद की जरूरत है।

मंदिर प्रबंधन और सुप्रीम कोर्ट का रास्ता

डॉ. भागवत ने मंदिरों के प्रबंधन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि देश में कई मंदिर निजी हैं और कई सरकारी नियंत्रण में हैं, लेकिन दोनों ही व्यवस्थाओं में अव्यवस्थाएं हैं। उन्होंने कहा कि अब यह चर्चा बढ़ रही है कि मंदिरों का संचालन उनके वास्तविक हितधारकों के हाथ में होना चाहिए। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने की प्रक्रिया पर भी विचार चल रहा है।

हिंदुत्व, विविधता और एकता

हिंदुत्व की अवधारणा पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि अलग दिखना एकता के खिलाफ नहीं है। भारत सदियों से विविधताओं के साथ एक राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ता रहा है। उनके अनुसार, एकरूपता नहीं बल्कि साझा मूल्य ही समाज को जोड़ते हैं।

युवाओं में अकेलापन और नशे की बढ़ती समस्या

युवा संवाद में डॉ. भागवत ने युवाओं के बीच बढ़ते अकेलेपन और नशे की प्रवृत्ति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि परिवारों में संवाद की कमी के कारण युवा खुद को अलग-थलग महसूस कर रहे हैं। ऐसे में मोबाइल और नशा आसान विकल्प बनकर सामने आ रहे हैं। उन्होंने समाज और परिवार दोनों से इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।

संघ प्रमुख का यह तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरा RSS के शताब्दी वर्ष के संदर्भ में अहम माना जा रहा है। 1 जनवरी को राम मंदिर परिसर में सामाजिक सद्भावना बैठक प्रस्तावित है, जिसमें विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। जानकारों के अनुसार, आदिवासी और युवा बहुल राज्य में यह संवाद सामाजिक और वैचारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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