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ऊर्जाधानी में कंडे वाली होलिका, पांच दशक से अग्रवाल समाज निभा रहा परंपरा
Korba, CG
समाज के लोग अपने अपने घरों से कंडा लाकर होलिका दहन की तैयारी करते हैं.
शहर के पुराना बस स्टैंड में खास होलिका तैयार की जाती है. होली के अवसर पर यह परंपरा बीते लगभग पांच दशक से अग्रवाल समाज द्वारा निभाई जा रही है. इस होलिका में शहरवासी लकड़ी का उपयोग नहीं करते, बल्कि गोबर के कंडे से होलिका बनाई जाती है. खास बात यह भी है कि होलिका में लोभान, कपूर और धूप अगरबत्ती को भी जलाया जाता है.
धूमधाम से मनाते हैं होली का पर्व: पुराना बस स्टैंड निवासी गृहिणी ज्योति अग्रवाल कहती हैं कि ''मैं जब से कोरबा आई हूं. तब से इसी तरह हर साल पुराना बस स्टैंड में इस होलिका को तैयार करते हैं.''
गोबर के कंडे से होलिका: ज्योति अग्रवाल ने बताया कि लकड़ी का उपयोग नहीं करते. गोबर के कंडे से होलिका तैयार की जाती है. विधि विधान से पूजा अर्चना करने के बाद देर शाम को होलिका दहन किया जाएगा. यह असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है.
सभी काफी हर्ष उल्लास और स्नेह के साथ इस होलिका को तैयार करते हैं. पुराना बस स्टैंड के अलावा देश और विदेशों में भी जहां भारतीय हैं, वहां होलिका का पर्व मनाया जाता है. पुराना बस स्टैंड की होली में सिर्फ कंडों का उपयोग होता है - ज्योति अग्रवाल, स्थानीय
लंबे समय से चली आ रही है यह परंपरा: शहरवासी दीपक गुप्ता ने बताया कि ''जितने भी आसपास के लोग हैं. सभी अपने घरों से कंडे बनाकर लाते हैं और यहां होलिका को अर्पण कर देते हैं.''
परंपरा के साथ प्रकृति की रक्षा का संदेश: दीपक गुप्ता कहते हैं कि इस होलिका में लोभान, कपूर के साथ ही धूप अगरबत्ती भी डाले जाते हैं. इस तरह से पर्यावरण में जो गंदगी होती है, वह साफ होती है. हवा स्वच्छ होती है और मच्छरों की संख्या भी कम होती है, इसलिए हम इसे खास तरीके से तैयार करते हैं.
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ऊर्जाधानी में कंडे वाली होलिका, पांच दशक से अग्रवाल समाज निभा रहा परंपरा
Korba, CG
शहर के पुराना बस स्टैंड में खास होलिका तैयार की जाती है. होली के अवसर पर यह परंपरा बीते लगभग पांच दशक से अग्रवाल समाज द्वारा निभाई जा रही है. इस होलिका में शहरवासी लकड़ी का उपयोग नहीं करते, बल्कि गोबर के कंडे से होलिका बनाई जाती है. खास बात यह भी है कि होलिका में लोभान, कपूर और धूप अगरबत्ती को भी जलाया जाता है.
धूमधाम से मनाते हैं होली का पर्व: पुराना बस स्टैंड निवासी गृहिणी ज्योति अग्रवाल कहती हैं कि ''मैं जब से कोरबा आई हूं. तब से इसी तरह हर साल पुराना बस स्टैंड में इस होलिका को तैयार करते हैं.''
गोबर के कंडे से होलिका: ज्योति अग्रवाल ने बताया कि लकड़ी का उपयोग नहीं करते. गोबर के कंडे से होलिका तैयार की जाती है. विधि विधान से पूजा अर्चना करने के बाद देर शाम को होलिका दहन किया जाएगा. यह असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है.
सभी काफी हर्ष उल्लास और स्नेह के साथ इस होलिका को तैयार करते हैं. पुराना बस स्टैंड के अलावा देश और विदेशों में भी जहां भारतीय हैं, वहां होलिका का पर्व मनाया जाता है. पुराना बस स्टैंड की होली में सिर्फ कंडों का उपयोग होता है - ज्योति अग्रवाल, स्थानीय
लंबे समय से चली आ रही है यह परंपरा: शहरवासी दीपक गुप्ता ने बताया कि ''जितने भी आसपास के लोग हैं. सभी अपने घरों से कंडे बनाकर लाते हैं और यहां होलिका को अर्पण कर देते हैं.''
परंपरा के साथ प्रकृति की रक्षा का संदेश: दीपक गुप्ता कहते हैं कि इस होलिका में लोभान, कपूर के साथ ही धूप अगरबत्ती भी डाले जाते हैं. इस तरह से पर्यावरण में जो गंदगी होती है, वह साफ होती है. हवा स्वच्छ होती है और मच्छरों की संख्या भी कम होती है, इसलिए हम इसे खास तरीके से तैयार करते हैं.
