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रायपुर में फर्जीवाड़ा: हॉस्टल वार्डन की नौकरी दिलाने के नाम पर वसूले 20 लाख, आरोपी मंत्रालय का संविदा चपरासी निकला
Raipur,C.G
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सरकारी नौकरी का झांसा देकर ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। एक संविदा चपरासी ने खुद को मंत्रालय में क्लर्क बताकर दो युवकों से 20 लाख 50 हजार रुपए वसूल लिए।
आरोपी ने उन्हें आदिम जाति अनुसूचित विभाग में हॉस्टल वार्डन की नौकरी दिलाने का झांसा दिया था।
पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह मामला टिकरापारा थाना क्षेत्र का है।
क्लर्क बना चपरासी, अधिकारी बन बैठा दलाल
शिकायतकर्ता जनक कुमार साहू ने बताया कि वर्ष 2023 में उसकी मुलाकात दधीबल सिंह उर्फ डेविड तिग्गा से हुई। डेविड ने खुद को इंद्रावती भवन में क्लर्क बताया और कहा कि उसकी उच्च अधिकारियों तक सीधी पहुंच है। वह सरकारी नौकरी पक्की करवा सकता है।
उसी दौरान आदिम जाति विभाग में 300 हॉस्टल वार्डन पदों पर भर्ती निकली थी। डेविड ने जनक को 11 लाख रुपए में नौकरी दिलवाने की बात कही और जनक के दोस्त संजय चौहान की भर्ती भी जोड़ दी। कुल सौदा 20 लाख 50 हजार रुपए में तय हुआ।
बैंक के जरिए दिए रुपए, मिला फर्जी चेक
जनक और संजय ने लालच में आकर डेविड के खातों में बैंक ट्रांसफर के जरिए रुपए भेज दिए। डेविड ने दोनों से आवेदन फॉर्म भरवाकर एडमिट कार्ड की कॉपी भी वॉट्सऐप पर मंगवाई। लेकिन जब दिसंबर 2024 में हॉस्टल वार्डन का रिजल्ट आया, तो दोनों का नाम सूची में नहीं था।
पूछने पर डेविड ने टालमटोल शुरू कर दिया और 10 लाख का एक फर्जी चेक थमा दिया। जब चेक बाउंस हुआ, तब पीड़ितों को ठगी का एहसास हुआ।
फिलहाल आरोपी फरार, पुलिस कर रही जांच
जनक कुमार ने टिकरापारा थाना में धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज करवाई है। थाना प्रभारी विनय सिंह ने बताया कि आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। डेविड तिग्गा की लोकेशन ट्रेस की जा रही है।
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रायपुर में फर्जीवाड़ा: हॉस्टल वार्डन की नौकरी दिलाने के नाम पर वसूले 20 लाख, आरोपी मंत्रालय का संविदा चपरासी निकला
Raipur,C.G
आरोपी ने उन्हें आदिम जाति अनुसूचित विभाग में हॉस्टल वार्डन की नौकरी दिलाने का झांसा दिया था।
पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह मामला टिकरापारा थाना क्षेत्र का है।
क्लर्क बना चपरासी, अधिकारी बन बैठा दलाल
शिकायतकर्ता जनक कुमार साहू ने बताया कि वर्ष 2023 में उसकी मुलाकात दधीबल सिंह उर्फ डेविड तिग्गा से हुई। डेविड ने खुद को इंद्रावती भवन में क्लर्क बताया और कहा कि उसकी उच्च अधिकारियों तक सीधी पहुंच है। वह सरकारी नौकरी पक्की करवा सकता है।
उसी दौरान आदिम जाति विभाग में 300 हॉस्टल वार्डन पदों पर भर्ती निकली थी। डेविड ने जनक को 11 लाख रुपए में नौकरी दिलवाने की बात कही और जनक के दोस्त संजय चौहान की भर्ती भी जोड़ दी। कुल सौदा 20 लाख 50 हजार रुपए में तय हुआ।
बैंक के जरिए दिए रुपए, मिला फर्जी चेक
जनक और संजय ने लालच में आकर डेविड के खातों में बैंक ट्रांसफर के जरिए रुपए भेज दिए। डेविड ने दोनों से आवेदन फॉर्म भरवाकर एडमिट कार्ड की कॉपी भी वॉट्सऐप पर मंगवाई। लेकिन जब दिसंबर 2024 में हॉस्टल वार्डन का रिजल्ट आया, तो दोनों का नाम सूची में नहीं था।
पूछने पर डेविड ने टालमटोल शुरू कर दिया और 10 लाख का एक फर्जी चेक थमा दिया। जब चेक बाउंस हुआ, तब पीड़ितों को ठगी का एहसास हुआ।
फिलहाल आरोपी फरार, पुलिस कर रही जांच
जनक कुमार ने टिकरापारा थाना में धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज करवाई है। थाना प्रभारी विनय सिंह ने बताया कि आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। डेविड तिग्गा की लोकेशन ट्रेस की जा रही है।
