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भिलाई में करंट की चपेट में आए मजदूर की मौत: काम के दौरान हादसा, मुआवजे की मांग पर हंगामा; कंपनी ने दिए 5 लाख रुपए
Durg, CG
दुर्ग जिले के जामुल क्षेत्र की स्वास्तिक इंजीनियरिंग वर्क्स में हुआ हादसा, परिजनों के विरोध के बाद कंपनी प्रबंधन ने मुआवजे की घोषणा की; सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल।
दुर्ग जिले के जामुल थाना क्षेत्र में संचालित स्वास्तिक इंजीनियरिंग वर्क्स में सोमवार को काम के दौरान करंट की चपेट में आने से एक मजदूर की मौत हो गई। हादसे के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने फैक्ट्री प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मुआवजे की मांग को लेकर हंगामा किया। स्थिति तनावपूर्ण होते देख कंपनी ने तत्काल पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा की, जिसके बाद प्रदर्शन शांत हुआ।
हादसा कैसे हुआ
जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान नवल पटेल (25 वर्ष), निवासी छावनी, के रूप में हुई है। वह पिछले एक वर्ष से स्वास्तिक इंजीनियरिंग वर्क्स में मजदूर के रूप में कार्यरत था। सोमवार, 12 नवंबर की सुबह, रोज की तरह काम करते समय यह हादसा हुआ। बताया गया कि काम के दौरान क्रेन का हुक ऊपर से गुजर रहे बिजली के तार के संपर्क में आ गया, जिससे करंट पूरे ढांचे में फैल गया और नवल उसकी चपेट में आ गया। वह गंभीर रूप से झुलस गया और मौके पर ही बेहोश होकर गिर पड़ा।
साथी मजदूरों और कंपनी के कर्मचारियों ने तुरंत नवल को भिलाई के एक निजी अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
मुआवजे की मांग पर परिजनों का विरोध
घटना की जानकारी मिलते ही मृतक के परिजन और स्थानीय लोग फैक्ट्री पहुंच गए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रबंधन द्वारा सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया जाता, जिसके चलते यह हादसा हुआ। परिजनों ने नवल के परिवार के लिए उचित मुआवजे और नौकरी की मांग की।
टीआई रामेन्द्र सिंह ने बताया कि पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया। परिजनों से बातचीत के बाद कंपनी प्रबंधन ने मृतक के परिवार को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। इसके बाद परिजनों ने शव लेने पर सहमति जताई।
सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि फैक्ट्री क्षेत्र में बिजली तारों की सुरक्षा दूरी और औद्योगिक सुरक्षा उपकरणों का सही उपयोग नहीं किया जा रहा। हादसे के बाद यह सवाल उठ रहा है कि यदि सुरक्षा मानकों का पालन किया गया होता, तो मजदूर की जान बचाई जा सकती थी। मजदूर संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि सभी औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा नियमों की सख्त निगरानी की जाए।
पुलिस जांच जारी
जामुल थाना पुलिस ने इस मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। शव को सुपेला स्थित लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल की मरच्युरी में पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया है। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि हादसा लापरवाही से हुआ या किसी तकनीकी त्रुटि के कारण।
प्रशासन ने फैक्ट्री में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के आदेश दिए हैं। मजदूर संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा।
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दुर्ग जिले के जामुल थाना क्षेत्र में संचालित स्वास्तिक इंजीनियरिंग वर्क्स में सोमवार को काम के दौरान करंट की चपेट में आने से एक मजदूर की मौत हो गई। हादसे के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने फैक्ट्री प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मुआवजे की मांग को लेकर हंगामा किया। स्थिति तनावपूर्ण होते देख कंपनी ने तत्काल पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा की, जिसके बाद प्रदर्शन शांत हुआ।
हादसा कैसे हुआ
जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान नवल पटेल (25 वर्ष), निवासी छावनी, के रूप में हुई है। वह पिछले एक वर्ष से स्वास्तिक इंजीनियरिंग वर्क्स में मजदूर के रूप में कार्यरत था। सोमवार, 12 नवंबर की सुबह, रोज की तरह काम करते समय यह हादसा हुआ। बताया गया कि काम के दौरान क्रेन का हुक ऊपर से गुजर रहे बिजली के तार के संपर्क में आ गया, जिससे करंट पूरे ढांचे में फैल गया और नवल उसकी चपेट में आ गया। वह गंभीर रूप से झुलस गया और मौके पर ही बेहोश होकर गिर पड़ा।
साथी मजदूरों और कंपनी के कर्मचारियों ने तुरंत नवल को भिलाई के एक निजी अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
मुआवजे की मांग पर परिजनों का विरोध
घटना की जानकारी मिलते ही मृतक के परिजन और स्थानीय लोग फैक्ट्री पहुंच गए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रबंधन द्वारा सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया जाता, जिसके चलते यह हादसा हुआ। परिजनों ने नवल के परिवार के लिए उचित मुआवजे और नौकरी की मांग की।
टीआई रामेन्द्र सिंह ने बताया कि पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया। परिजनों से बातचीत के बाद कंपनी प्रबंधन ने मृतक के परिवार को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। इसके बाद परिजनों ने शव लेने पर सहमति जताई।
सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि फैक्ट्री क्षेत्र में बिजली तारों की सुरक्षा दूरी और औद्योगिक सुरक्षा उपकरणों का सही उपयोग नहीं किया जा रहा। हादसे के बाद यह सवाल उठ रहा है कि यदि सुरक्षा मानकों का पालन किया गया होता, तो मजदूर की जान बचाई जा सकती थी। मजदूर संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि सभी औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा नियमों की सख्त निगरानी की जाए।
पुलिस जांच जारी
जामुल थाना पुलिस ने इस मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। शव को सुपेला स्थित लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल की मरच्युरी में पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया है। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि हादसा लापरवाही से हुआ या किसी तकनीकी त्रुटि के कारण।
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