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धंसी सड़क की जांच में खुली बड़ी गड़बड़ी, दो इंजीनियर निलंबित
कबीरधाम, छ.ग
कबीरधाम में पीएम जनमन योजना की सड़क की गुणवत्ता जांच में तकनीकी खामियां सामने आईं, भारी वाहनों के संचालन और मॉनिटरिंग में लापरवाही को माना गया नुकसान की बड़ी वजह
कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखंड में प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत बनाई गई सड़क के धंसने की शिकायत आखिरकार सही साबित हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह स्वयं मौके पर पहुंचे और निर्माण कार्य का विस्तृत निरीक्षण किया। जांच के दौरान सड़क की गुणवत्ता का वैज्ञानिक परीक्षण कराया गया, जिसमें कुछ महत्वपूर्ण तकनीकी खामियां सामने आईं। इसके बाद निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। दलदली मेन रोड से खारिया होते हुए अगरी तक बनाई गई इस सड़क के कई हिस्सों में धंसने और क्षतिग्रस्त होने की शिकायत स्थानीय लोगों द्वारा लगातार की जा रही थी। शिकायत मिलने के बाद विभागीय टीम ने मौके पर पहुंचकर सड़क की स्थिति का निरीक्षण किया। सड़क की गुणवत्ता का सही आकलन करने के लिए कोर कटिंग सहित विभिन्न तकनीकी परीक्षण किए गए। जांच में पाया गया कि सड़क का अधिकांश निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप था, लेकिन कुछ तकनीकी कमियों और क्षमता से अधिक भार वाले वाहनों के संचालन के कारण सड़क को नुकसान पहुंचा।
निरीक्षण के दौरान सामने आया कि जिस सड़क पर केवल 10 से 12 टन क्षमता तक के वाहनों के संचालन की अनुमति थी, वहां 60 से 70 टन तक वजन वाले रेत परिवहन करने वाले भारी वाहनों का लगातार आवागमन हो रहा था। सड़क की डिजाइन इतनी अधिक भार क्षमता के लिए तैयार नहीं की गई थी। भारी वाहनों के दबाव के कारण सड़क की सतह और अंदरूनी संरचना पर अतिरिक्त दबाव पड़ा, जिससे सड़क धीरे-धीरे कमजोर होती चली गई। तकनीकी जांच में यह भी पाया गया कि सड़क के किनारों यानी शोल्डर का निर्माण निर्धारित गुणवत्ता के अनुसार नहीं किया गया था। कॉम्पैक्शन परीक्षण में कई स्थानों पर शोल्डर की मजबूती तय मानकों से कम मिली। निर्धारित 100 प्रतिशत कॉम्पैक्शन के मुकाबले कुछ हिस्सों में यह केवल 95 प्रतिशत और एक स्थान पर 94.68 प्रतिशत पाया गया। इसके अलावा एक पुलिया के एप्रोच क्षेत्र में बैकफिलिंग का कार्य भी मानकों के अनुरूप नहीं मिला। बारिश के दौरान इसी हिस्से से पानी सड़क की निचली परत तक पहुंच गया, जिससे सड़क की संरचना कमजोर हो गई और कई स्थानों पर धंसाव की स्थिति बन गई।
निरीक्षण के बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह ने निर्माण कार्य में गंभीर लापरवाही मानते हुए संबंधित ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही निर्माण कार्य की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण में लापरवाही बरतने के आरोप में सहायक अभियंता सौरभ देशमुख और उप अभियंता जे. रितेश नायडू को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं कार्यपालन अभियंता (ईई) संतोष कुमार ठाकुर के खिलाफ भी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और उनके निलंबन के लिए शासन को प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सड़क के जिन हिस्सों में नुकसान हुआ है, उन्हें पूरी तरह हटाकर दोबारा गुणवत्तापूर्ण निर्माण कराया जाए। साथ ही पूरी सड़क के शोल्डर को भी निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार मजबूत किया जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की समस्या दोबारा उत्पन्न न हो।
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धंसी सड़क की जांच में खुली बड़ी गड़बड़ी, दो इंजीनियर निलंबित
कबीरधाम, छ.ग
कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखंड में प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत बनाई गई सड़क के धंसने की शिकायत आखिरकार सही साबित हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह स्वयं मौके पर पहुंचे और निर्माण कार्य का विस्तृत निरीक्षण किया। जांच के दौरान सड़क की गुणवत्ता का वैज्ञानिक परीक्षण कराया गया, जिसमें कुछ महत्वपूर्ण तकनीकी खामियां सामने आईं। इसके बाद निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। दलदली मेन रोड से खारिया होते हुए अगरी तक बनाई गई इस सड़क के कई हिस्सों में धंसने और क्षतिग्रस्त होने की शिकायत स्थानीय लोगों द्वारा लगातार की जा रही थी। शिकायत मिलने के बाद विभागीय टीम ने मौके पर पहुंचकर सड़क की स्थिति का निरीक्षण किया। सड़क की गुणवत्ता का सही आकलन करने के लिए कोर कटिंग सहित विभिन्न तकनीकी परीक्षण किए गए। जांच में पाया गया कि सड़क का अधिकांश निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप था, लेकिन कुछ तकनीकी कमियों और क्षमता से अधिक भार वाले वाहनों के संचालन के कारण सड़क को नुकसान पहुंचा।
निरीक्षण के दौरान सामने आया कि जिस सड़क पर केवल 10 से 12 टन क्षमता तक के वाहनों के संचालन की अनुमति थी, वहां 60 से 70 टन तक वजन वाले रेत परिवहन करने वाले भारी वाहनों का लगातार आवागमन हो रहा था। सड़क की डिजाइन इतनी अधिक भार क्षमता के लिए तैयार नहीं की गई थी। भारी वाहनों के दबाव के कारण सड़क की सतह और अंदरूनी संरचना पर अतिरिक्त दबाव पड़ा, जिससे सड़क धीरे-धीरे कमजोर होती चली गई। तकनीकी जांच में यह भी पाया गया कि सड़क के किनारों यानी शोल्डर का निर्माण निर्धारित गुणवत्ता के अनुसार नहीं किया गया था। कॉम्पैक्शन परीक्षण में कई स्थानों पर शोल्डर की मजबूती तय मानकों से कम मिली। निर्धारित 100 प्रतिशत कॉम्पैक्शन के मुकाबले कुछ हिस्सों में यह केवल 95 प्रतिशत और एक स्थान पर 94.68 प्रतिशत पाया गया। इसके अलावा एक पुलिया के एप्रोच क्षेत्र में बैकफिलिंग का कार्य भी मानकों के अनुरूप नहीं मिला। बारिश के दौरान इसी हिस्से से पानी सड़क की निचली परत तक पहुंच गया, जिससे सड़क की संरचना कमजोर हो गई और कई स्थानों पर धंसाव की स्थिति बन गई।
निरीक्षण के बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह ने निर्माण कार्य में गंभीर लापरवाही मानते हुए संबंधित ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही निर्माण कार्य की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण में लापरवाही बरतने के आरोप में सहायक अभियंता सौरभ देशमुख और उप अभियंता जे. रितेश नायडू को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं कार्यपालन अभियंता (ईई) संतोष कुमार ठाकुर के खिलाफ भी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और उनके निलंबन के लिए शासन को प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सड़क के जिन हिस्सों में नुकसान हुआ है, उन्हें पूरी तरह हटाकर दोबारा गुणवत्तापूर्ण निर्माण कराया जाए। साथ ही पूरी सड़क के शोल्डर को भी निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार मजबूत किया जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की समस्या दोबारा उत्पन्न न हो।
