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30 साल से हर दिन चीलों को दाना खिला रहे 'ईगल मैन' अजीजका, एक सीटी पर उमड़ पड़ते हैं सैकड़ों शिकारी पक्षी
स्पेशल खबरें
केरल के कोझिकोड बीच पर हर दोपहर देखने को मिलता है अनोखा नजारा, इंसान और वन्यजीवों के भरोसे की मिसाल बने अजीजका, आवारा जानवरों की भी करते हैं सेवा।
दुनिया में इंसान और जानवरों के बीच प्रेम और विश्वास की कई कहानियां सुनने को मिलती हैं, लेकिन केरल के कोझिकोड (कालीकट) से सामने आई एक कहानी इन सबसे अलग और बेहद प्रेरणादायक है। यहां रहने वाले अजीज, जिन्हें लोग प्यार से 'ईगल मैन' अजीजका के नाम से जानते हैं, पिछले 30 से भी अधिक वर्षों से बिना किसी स्वार्थ के हर दिन सैकड़ों शिकारी चीलों और आवारा जानवरों को भोजन करा रहे हैं। उनकी यह अनूठी सेवा न केवल स्थानीय लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र है, बल्कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को भी हैरान कर देती है। अजीजका का जीवन किसी नियमित दिनचर्या की तरह चलता है। चाहे मौसम कैसा भी हो, तेज बारिश हो, भीषण गर्मी हो या फिर त्योहार का दिन, वे अपनी सेवा में कभी विराम नहीं देते। हर दिन दोपहर ठीक 2 बजे वे अपनी पुरानी साइकिल पर चिकन के टुकड़ों से भरा एक बोरा लेकर अपने घर से निकलते हैं। उनका गंतव्य हमेशा एक ही होता है—कोझिकोड बीच, जहां सैकड़ों पक्षी और कई आवारा जानवर उनका इंतजार कर रहे होते हैं। बीच पर पहुंचने के बाद जो दृश्य दिखाई देता है, वह किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं होता। अजीजका जैसे ही अपनी खास अंदाज वाली सीटी बजाते हैं, कुछ ही क्षणों में आसमान में उड़ रही सैकड़ों चीलें उनकी ओर तेजी से आने लगती हैं। देखते ही देखते पूरा आसमान चीलों से भर जाता है और वे अजीजका के चारों ओर मंडराने लगती हैं। यह नजारा इतना अद्भुत होता है कि वहां मौजूद लोग कुछ देर के लिए मंत्रमुग्ध रह जाते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि चीलों को स्वभाव से बेहद आक्रामक और शिकारी पक्षी माना जाता है। आमतौर पर ये पक्षी अपने शिकार पर तेज गति से हमला करते हैं और इंसानों से दूरी बनाए रखते हैं। लेकिन अजीजका के साथ इनका व्यवहार बिल्कुल अलग है। वर्षों से बना विश्वास इतना गहरा हो चुका है कि सैकड़ों चीलें उनके बेहद करीब आकर आराम से भोजन करती हैं, लेकिन उन्हें कभी कोई नुकसान नहीं पहुंचातीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह रिश्ता एक-दो दिन या कुछ महीनों में नहीं बना। अजीजका ने लगातार तीन दशक तक बिना किसी लालच के इन पक्षियों की सेवा की है। उनकी नियमितता और समर्पण ने चीलों के मन में भरोसा पैदा किया, जिसका परिणाम आज दुनिया के सामने एक अनोखे उदाहरण के रूप में दिखाई देता है। अजीजका सिर्फ चीलों तक ही सीमित नहीं हैं। वे बीच के आसपास रहने वाले आवारा कुत्तों और अन्य जानवरों को भी भोजन कराते हैं। उनके लिए यह केवल सेवा नहीं बल्कि जीवन का उद्देश्य बन चुका है। उनका मानना है कि इंसानों की तरह जानवरों को भी भूख लगती है और यदि हम सक्षम हैं तो हमें उनकी मदद जरूर करनी चाहिए। कोझिकोड बीच पर आने वाले पर्यटक अक्सर इस दृश्य को अपने कैमरों में कैद करते हैं। सोशल मीडिया पर अजीजका के वीडियो लाखों बार देखे जा चुके हैं। लोग उन्हें "ईगल मैन" के नाम से पहचानते हैं और उनकी तुलना प्रकृति के सच्चे मित्र से करते हैं। कई सोशल मीडिया यूजर्स मजाकिया अंदाज में कहते हैं कि अजीजका को चीलों की "स्पेशल सिक्योरिटी" मिली हुई है, क्योंकि उनके आसपास सैकड़ों चीलें सुरक्षा घेरे की तरह मंडराती रहती हैं।
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30 साल से हर दिन चीलों को दाना खिला रहे 'ईगल मैन' अजीजका, एक सीटी पर उमड़ पड़ते हैं सैकड़ों शिकारी पक्षी
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दुनिया में इंसान और जानवरों के बीच प्रेम और विश्वास की कई कहानियां सुनने को मिलती हैं, लेकिन केरल के कोझिकोड (कालीकट) से सामने आई एक कहानी इन सबसे अलग और बेहद प्रेरणादायक है। यहां रहने वाले अजीज, जिन्हें लोग प्यार से 'ईगल मैन' अजीजका के नाम से जानते हैं, पिछले 30 से भी अधिक वर्षों से बिना किसी स्वार्थ के हर दिन सैकड़ों शिकारी चीलों और आवारा जानवरों को भोजन करा रहे हैं। उनकी यह अनूठी सेवा न केवल स्थानीय लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र है, बल्कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को भी हैरान कर देती है। अजीजका का जीवन किसी नियमित दिनचर्या की तरह चलता है। चाहे मौसम कैसा भी हो, तेज बारिश हो, भीषण गर्मी हो या फिर त्योहार का दिन, वे अपनी सेवा में कभी विराम नहीं देते। हर दिन दोपहर ठीक 2 बजे वे अपनी पुरानी साइकिल पर चिकन के टुकड़ों से भरा एक बोरा लेकर अपने घर से निकलते हैं। उनका गंतव्य हमेशा एक ही होता है—कोझिकोड बीच, जहां सैकड़ों पक्षी और कई आवारा जानवर उनका इंतजार कर रहे होते हैं। बीच पर पहुंचने के बाद जो दृश्य दिखाई देता है, वह किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं होता। अजीजका जैसे ही अपनी खास अंदाज वाली सीटी बजाते हैं, कुछ ही क्षणों में आसमान में उड़ रही सैकड़ों चीलें उनकी ओर तेजी से आने लगती हैं। देखते ही देखते पूरा आसमान चीलों से भर जाता है और वे अजीजका के चारों ओर मंडराने लगती हैं। यह नजारा इतना अद्भुत होता है कि वहां मौजूद लोग कुछ देर के लिए मंत्रमुग्ध रह जाते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि चीलों को स्वभाव से बेहद आक्रामक और शिकारी पक्षी माना जाता है। आमतौर पर ये पक्षी अपने शिकार पर तेज गति से हमला करते हैं और इंसानों से दूरी बनाए रखते हैं। लेकिन अजीजका के साथ इनका व्यवहार बिल्कुल अलग है। वर्षों से बना विश्वास इतना गहरा हो चुका है कि सैकड़ों चीलें उनके बेहद करीब आकर आराम से भोजन करती हैं, लेकिन उन्हें कभी कोई नुकसान नहीं पहुंचातीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह रिश्ता एक-दो दिन या कुछ महीनों में नहीं बना। अजीजका ने लगातार तीन दशक तक बिना किसी लालच के इन पक्षियों की सेवा की है। उनकी नियमितता और समर्पण ने चीलों के मन में भरोसा पैदा किया, जिसका परिणाम आज दुनिया के सामने एक अनोखे उदाहरण के रूप में दिखाई देता है। अजीजका सिर्फ चीलों तक ही सीमित नहीं हैं। वे बीच के आसपास रहने वाले आवारा कुत्तों और अन्य जानवरों को भी भोजन कराते हैं। उनके लिए यह केवल सेवा नहीं बल्कि जीवन का उद्देश्य बन चुका है। उनका मानना है कि इंसानों की तरह जानवरों को भी भूख लगती है और यदि हम सक्षम हैं तो हमें उनकी मदद जरूर करनी चाहिए। कोझिकोड बीच पर आने वाले पर्यटक अक्सर इस दृश्य को अपने कैमरों में कैद करते हैं। सोशल मीडिया पर अजीजका के वीडियो लाखों बार देखे जा चुके हैं। लोग उन्हें "ईगल मैन" के नाम से पहचानते हैं और उनकी तुलना प्रकृति के सच्चे मित्र से करते हैं। कई सोशल मीडिया यूजर्स मजाकिया अंदाज में कहते हैं कि अजीजका को चीलों की "स्पेशल सिक्योरिटी" मिली हुई है, क्योंकि उनके आसपास सैकड़ों चीलें सुरक्षा घेरे की तरह मंडराती रहती हैं।
