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रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए नायब तहसीलदार को 3 साल की सजा, कोर्ट में सुनवाई के बाद बेहोश होकर गिरे
Jashpur, CG
छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में तत्कालीन नायब तहसीलदार कमलेश कुमार मिरी को रिश्वत लेने के मामले में तीन साल सश्रम कारावास और ₹50,000 जुर्माने की सजा सुनाई गई है। यह सजा विशेष न्यायाधीश सत्येंद्र कुमार साहू की अदालत ने सुनाई। फैसले के तुरंत बाद मिरी कोर्ट कक्ष में बेहोश होकर गिर पड़े, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद जेल भेज दिया गया।
जमीन नामांतरण के बदले मांगे थे ₹3 लाख
मामला वर्ष 2020 का है, जब नायब तहसीलदार मिरी ने शहर के दरबारी टोली निवासी अनोज गुप्ता से जमीन नामांतरण के बदले ₹3 लाख की रिश्वत की मांग की थी।
27 अगस्त 2020 को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने मिरी को ₹50,000 रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था।
डिजिटल वॉयस रिकॉर्डिंग से मिली ठोस पुष्टि
शिकायत की जांच के दौरान ACB को एक डिजिटल वॉयस रिकॉर्डर में मिरी द्वारा रिश्वत मांगने की स्पष्ट रिकॉर्डिंग मिली।
इसके बाद DSP गौरव मंडल की अगुवाई में टीम ने पुराने कलेक्टर परिसर स्थित तहसील कार्यालय पर छापा मारा और मिरी को रिश्वत लेते पकड़ा।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज हुआ केस
ACB ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 के अंतर्गत मिरी के खिलाफ आरोप पत्र अदालत में पेश किया था।
करीब 4 साल चली सुनवाई के बाद मंगलवार को फैसला सुनाया गया, जिसमें मिरी को दोषी करार देते हुए तीन साल की कैद और 50,000 रुपए का अर्थदंड दिया गया।
भागने की कोशिश की, लेकिन पकड़े गए
छापे के दौरान मिरी ने भागने की कोशिश की थी, लेकिन ACB की टीम ने उन्हें तुरंत पकड़ लिया।
गिरफ्तारी के बाद से मामला न्यायालय में लंबित था, जिसे अब न्यायिक निष्कर्ष मिल गया है।
न्यायपालिका का सख्त संदेश
इस मामले में न्यायालय का फैसला न केवल भ्रष्ट अधिकारियों को चेतावनी देता है, बल्कि आम जनता को यह भरोसा भी देता है कि यदि वे आवाज उठाएं, तो न्याय जरूर मिलेगा।
ACB की सक्रिय भूमिका और ठोस साक्ष्यों ने यह सजा सुनिश्चित की।
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रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए नायब तहसीलदार को 3 साल की सजा, कोर्ट में सुनवाई के बाद बेहोश होकर गिरे
Jashpur, CG
जमीन नामांतरण के बदले मांगे थे ₹3 लाख
मामला वर्ष 2020 का है, जब नायब तहसीलदार मिरी ने शहर के दरबारी टोली निवासी अनोज गुप्ता से जमीन नामांतरण के बदले ₹3 लाख की रिश्वत की मांग की थी।
27 अगस्त 2020 को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने मिरी को ₹50,000 रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था।
डिजिटल वॉयस रिकॉर्डिंग से मिली ठोस पुष्टि
शिकायत की जांच के दौरान ACB को एक डिजिटल वॉयस रिकॉर्डर में मिरी द्वारा रिश्वत मांगने की स्पष्ट रिकॉर्डिंग मिली।
इसके बाद DSP गौरव मंडल की अगुवाई में टीम ने पुराने कलेक्टर परिसर स्थित तहसील कार्यालय पर छापा मारा और मिरी को रिश्वत लेते पकड़ा।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज हुआ केस
ACB ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 के अंतर्गत मिरी के खिलाफ आरोप पत्र अदालत में पेश किया था।
करीब 4 साल चली सुनवाई के बाद मंगलवार को फैसला सुनाया गया, जिसमें मिरी को दोषी करार देते हुए तीन साल की कैद और 50,000 रुपए का अर्थदंड दिया गया।
भागने की कोशिश की, लेकिन पकड़े गए
छापे के दौरान मिरी ने भागने की कोशिश की थी, लेकिन ACB की टीम ने उन्हें तुरंत पकड़ लिया।
गिरफ्तारी के बाद से मामला न्यायालय में लंबित था, जिसे अब न्यायिक निष्कर्ष मिल गया है।
न्यायपालिका का सख्त संदेश
इस मामले में न्यायालय का फैसला न केवल भ्रष्ट अधिकारियों को चेतावनी देता है, बल्कि आम जनता को यह भरोसा भी देता है कि यदि वे आवाज उठाएं, तो न्याय जरूर मिलेगा।
ACB की सक्रिय भूमिका और ठोस साक्ष्यों ने यह सजा सुनिश्चित की।
