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बस्तर की बेटी को राष्ट्रीय पहचान: PM मोदी ने डॉ. जयमति कश्यप को दिया देवी अहिल्याबाई सम्मान, नक्सलवाद पर बोले कड़े शब्द
Bastar, CG
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित महिला सशक्तिकरण महासम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल की जानी-मानी जनजातीय कलाकार डॉ. जयमति कश्यप को राष्ट्रीय देवी अहिल्याबाई सम्मान 2024 से सम्मानित किया। सम्मान ग्रहण करने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने नक्सलवाद और शिक्षा पर अहम विचार साझा किए।
डॉ. कश्यप ने कहा कि, “अगर हमारे क्षेत्रों में शिक्षा का प्रचार-प्रसार बेहतर ढंग से हो जाए, तो नक्सलवाद जैसी समस्या स्वतः खत्म हो सकती है। जब बेटियां पढ़ेंगी, तो वे गुमराह नहीं होंगी।” उन्होंने बताया कि उन्हें यह सम्मान मिलने की जानकारी कल दोपहर ही मिली थी, जो उनके लिए एक सुखद आश्चर्य था।
इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने भी नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि, “शिक्षा के अभाव में ही हमारे कई लोग रास्ता भटक जाते हैं। अगर हम शिक्षा को प्राथमिकता दें, तो ये चुनौतियां खुद ब खुद कम हो जाएंगी।”
बस्तर की सांस्कृतिक पहचान की ध्वजवाहक
डॉ. जयमति कश्यप बस्तर की जनजातीय कला और सांस्कृतिक विरासत की एक जीवंत प्रतीक हैं। उन्होंने बस्तर की लोककलाओं को न सिर्फ राज्य स्तर पर, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया है। उनका कार्य न सिर्फ कला के संरक्षण का उदाहरण है, बल्कि यह आदिवासी महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा भी देता है।
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बस्तर की बेटी को राष्ट्रीय पहचान: PM मोदी ने डॉ. जयमति कश्यप को दिया देवी अहिल्याबाई सम्मान, नक्सलवाद पर बोले कड़े शब्द
Bastar, CG
डॉ. कश्यप ने कहा कि, “अगर हमारे क्षेत्रों में शिक्षा का प्रचार-प्रसार बेहतर ढंग से हो जाए, तो नक्सलवाद जैसी समस्या स्वतः खत्म हो सकती है। जब बेटियां पढ़ेंगी, तो वे गुमराह नहीं होंगी।” उन्होंने बताया कि उन्हें यह सम्मान मिलने की जानकारी कल दोपहर ही मिली थी, जो उनके लिए एक सुखद आश्चर्य था।
इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने भी नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि, “शिक्षा के अभाव में ही हमारे कई लोग रास्ता भटक जाते हैं। अगर हम शिक्षा को प्राथमिकता दें, तो ये चुनौतियां खुद ब खुद कम हो जाएंगी।”
बस्तर की सांस्कृतिक पहचान की ध्वजवाहक
डॉ. जयमति कश्यप बस्तर की जनजातीय कला और सांस्कृतिक विरासत की एक जीवंत प्रतीक हैं। उन्होंने बस्तर की लोककलाओं को न सिर्फ राज्य स्तर पर, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया है। उनका कार्य न सिर्फ कला के संरक्षण का उदाहरण है, बल्कि यह आदिवासी महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा भी देता है।
