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बस्तर में नक्सल समस्या के अंत के लिए सरकार का नया प्लान, नक्सल मुक्त पंचायतों को मिलेगी 1 करोड़ की राशि
Raipur, CG
बस्तर में 2026 से पहले नक्सल समस्या का अंत करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने सरेंडर पॉलिसी से एक कदम और आगे बढ़ाया है.
बस्तर में मुठभेड़ के बाद 30 नक्सलियों के शव बरामद हुए.इसके एक दिन बाद राज्य सरकार ने बड़ा ऐलान किया है.नक्सलवाद को खत्म करने के लिए शून्य-सहिष्णुता की नीति पर जोर देते हुए, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि सरकार आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों और हिंसा के पीड़ितों के पुनर्वास के लिए कई पहल करेगी.हाल ही में स्वीकृत छत्तीसगढ़ नक्सली आत्मसमर्पण पीड़ित राहत और पुनर्वास नीति-2025 के तहत, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को तीन साल तक मुफ्त आवास और भोजन समेत 10,000 की मासिक वित्तीय सहायता मिलेगी.
नक्सल मुक्त ग्राम पंचायतों को एक करोड़ : छत्तीसगढ़ में ग्राम पंचायतें, जो नक्सलियों के आत्मसमर्पण की सुविधा प्रदान करेंगी और खुद को इस खतरे से मुक्त घोषित करेंगी. उन्हें 1 करोड़ के निर्माण कार्यों, बिजली और फोन नेटवर्क की मंजूरी दी जाएगी - सरकार को उम्मीद है कि इन उपायों से अधिक नक्सली हथियार डालने के लिए प्रोत्साहित होंगे.
हथियार डालने वाले नक्सलियों को कौशल विकास प्रशिक्षण दिया जाएगा.पीएम आवास योजना के तहत जमीन और मकान आवंटित किए जाएंगे. नई नीति में वित्तीय सहायता सहित कई अन्य प्रावधान शामिल किए गए हैं- विजय शर्मा, डिप्टी सीएम छग
नक्सलियों को मुख्य धारा में लाने के लिए करेंगे प्रोत्साहित : डिप्टी सीएम विजय शर्मा के मुताबिक नई नीति के कार्यान्वयन से अधिक नक्सली आत्मसमर्पण करने और मुख्यधारा में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित होंगे. वीर बलिदानी योजना के तहत, सरकार ने नक्सली गोलियों से शहीद हुए सुरक्षाकर्मियों की मूर्तियां स्थापित करने के लिए पंचायत विभाग के माध्यम से 10 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं. शहीद कर्मियों के परिजनों की लंबे समय से लंबित मांग को स्वीकार करते हुए शुरुआती चरण में 500-600 प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी. भविष्य में, शहीद कर्मियों की सैकड़ों प्रतिमाएं छत्तीसगढ़ में उनके पैतृक गांवों में स्थापित की जाएंगी.
डिप्टी विजय शर्मा ने कहा कि सुरक्षा बलों और सरकार के संयुक्त प्रयासों से बीजापुर शहर से जिले के सबसे दूरस्थ नक्सल प्रभावित गांव पामेड़ तक बस सेवा शुरू की गई. इसी तरह की सेवाएं बस्तर क्षेत्र के अन्य सुदूर गांवों के लिए भी शुरू की गईं. 25 वर्षों तक, पामेड़ तक केवल तेलंगाना के माध्यम से पहुंचा जा सकता था और किसी को 250 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती थी. बीजापुर जिला मुख्यालय से पामेड़ तक कोई सीधी कनेक्टिविटी नहीं थी.
अब सुरक्षा बलों के प्रयासों से, बीजापुर से तर्रेम और कोंडापल्ली के माध्यम से 90 किमी की दूरी तय करके पामेड़ पहुंचा जा सकता है. मार्ग पर यात्रियों के लिए एक बस का परिचालन शुरू हुआ. गारपा, पुजारीकांकेर और कोंडापल्ली सहित कई दूरदराज के गांवों में साप्ताहिक बाजार, जो माओवादी गतिविधियों के कारण पिछले कई वर्षों से बंद थे, फिर से खुल गए.क्षेत्र में कम से कम 577 नए मोबाइल टावर लगाए गए हैं.
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बस्तर में नक्सल समस्या के अंत के लिए सरकार का नया प्लान, नक्सल मुक्त पंचायतों को मिलेगी 1 करोड़ की राशि
Raipur, CG
बस्तर में मुठभेड़ के बाद 30 नक्सलियों के शव बरामद हुए.इसके एक दिन बाद राज्य सरकार ने बड़ा ऐलान किया है.नक्सलवाद को खत्म करने के लिए शून्य-सहिष्णुता की नीति पर जोर देते हुए, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि सरकार आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों और हिंसा के पीड़ितों के पुनर्वास के लिए कई पहल करेगी.हाल ही में स्वीकृत छत्तीसगढ़ नक्सली आत्मसमर्पण पीड़ित राहत और पुनर्वास नीति-2025 के तहत, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को तीन साल तक मुफ्त आवास और भोजन समेत 10,000 की मासिक वित्तीय सहायता मिलेगी.
नक्सल मुक्त ग्राम पंचायतों को एक करोड़ : छत्तीसगढ़ में ग्राम पंचायतें, जो नक्सलियों के आत्मसमर्पण की सुविधा प्रदान करेंगी और खुद को इस खतरे से मुक्त घोषित करेंगी. उन्हें 1 करोड़ के निर्माण कार्यों, बिजली और फोन नेटवर्क की मंजूरी दी जाएगी - सरकार को उम्मीद है कि इन उपायों से अधिक नक्सली हथियार डालने के लिए प्रोत्साहित होंगे.
हथियार डालने वाले नक्सलियों को कौशल विकास प्रशिक्षण दिया जाएगा.पीएम आवास योजना के तहत जमीन और मकान आवंटित किए जाएंगे. नई नीति में वित्तीय सहायता सहित कई अन्य प्रावधान शामिल किए गए हैं- विजय शर्मा, डिप्टी सीएम छग
नक्सलियों को मुख्य धारा में लाने के लिए करेंगे प्रोत्साहित : डिप्टी सीएम विजय शर्मा के मुताबिक नई नीति के कार्यान्वयन से अधिक नक्सली आत्मसमर्पण करने और मुख्यधारा में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित होंगे. वीर बलिदानी योजना के तहत, सरकार ने नक्सली गोलियों से शहीद हुए सुरक्षाकर्मियों की मूर्तियां स्थापित करने के लिए पंचायत विभाग के माध्यम से 10 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं. शहीद कर्मियों के परिजनों की लंबे समय से लंबित मांग को स्वीकार करते हुए शुरुआती चरण में 500-600 प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी. भविष्य में, शहीद कर्मियों की सैकड़ों प्रतिमाएं छत्तीसगढ़ में उनके पैतृक गांवों में स्थापित की जाएंगी.
डिप्टी विजय शर्मा ने कहा कि सुरक्षा बलों और सरकार के संयुक्त प्रयासों से बीजापुर शहर से जिले के सबसे दूरस्थ नक्सल प्रभावित गांव पामेड़ तक बस सेवा शुरू की गई. इसी तरह की सेवाएं बस्तर क्षेत्र के अन्य सुदूर गांवों के लिए भी शुरू की गईं. 25 वर्षों तक, पामेड़ तक केवल तेलंगाना के माध्यम से पहुंचा जा सकता था और किसी को 250 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती थी. बीजापुर जिला मुख्यालय से पामेड़ तक कोई सीधी कनेक्टिविटी नहीं थी.
अब सुरक्षा बलों के प्रयासों से, बीजापुर से तर्रेम और कोंडापल्ली के माध्यम से 90 किमी की दूरी तय करके पामेड़ पहुंचा जा सकता है. मार्ग पर यात्रियों के लिए एक बस का परिचालन शुरू हुआ. गारपा, पुजारीकांकेर और कोंडापल्ली सहित कई दूरदराज के गांवों में साप्ताहिक बाजार, जो माओवादी गतिविधियों के कारण पिछले कई वर्षों से बंद थे, फिर से खुल गए.क्षेत्र में कम से कम 577 नए मोबाइल टावर लगाए गए हैं.
