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बीजापुर में नक्सलियों की दरिंदगी : शिक्षा दूत की मुखबिरी के शक में हत्या
Bijapur, CG
बीजापुर जिले के पीलूर गांव में नक्सलियों ने एक बार फिर अपनी कायरता का परिचय दिया है। पुलिस मुखबिरी के संदेह में नक्सलियों ने एक शिक्षा दूत की निर्मम हत्या कर दी।
इस घटना से क्षेत्र में दहशत का माहौल है, जबकि स्थानीय प्रशासन द्वारा अब तक घटना की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
घटना बीजापुर के फरसेगढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले पीलूर गांव की है, जहां जंगल के भीतर शिक्षा दूत विनोद मडे की लाश मिलने की सूचना मिली है। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि विनोद पर पुलिस से जुड़ी जानकारी साझा करने का शक था, इसी संदेह में नक्सलियों ने उसे मौत के घाट उतार दिया।
विनोद मडे गांव में शिक्षा के प्रचार-प्रसार से जुड़े थे और शिक्षा दूत के रूप में काम कर रहे थे। बताया जा रहा है कि उनकी गांव में पहचान एक जिम्मेदार और सामाजिक रूप से सक्रिय व्यक्ति के रूप में थी। ऐसे में उनकी हत्या ने ग्रामीणों को झकझोर कर रख दिया है।
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अब तक पुलिस और प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन स्थानीय स्तर पर घटना की पुष्टि हो चुकी है। मामले को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी है और आसपास के इलाकों में सर्च ऑपरेशन भी चलाया जा रहा है।
गौरतलब है कि बीजापुर और इसके आसपास के क्षेत्र लंबे समय से नक्सल प्रभावित हैं। यहां आए दिन नक्सली गतिविधियों की खबरें आती रहती हैं, लेकिन एक शिक्षा दूत की हत्या जैसी घटनाएं न केवल दुर्भाग्यपूर्ण हैं, बल्कि समाज के उन मूल्यों पर भी सवाल खड़ा करती हैं जिनमें शिक्षा को सबसे ऊपर माना गया है।
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बीजापुर में नक्सलियों की दरिंदगी : शिक्षा दूत की मुखबिरी के शक में हत्या
Bijapur, CG
इस घटना से क्षेत्र में दहशत का माहौल है, जबकि स्थानीय प्रशासन द्वारा अब तक घटना की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
घटना बीजापुर के फरसेगढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले पीलूर गांव की है, जहां जंगल के भीतर शिक्षा दूत विनोद मडे की लाश मिलने की सूचना मिली है। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि विनोद पर पुलिस से जुड़ी जानकारी साझा करने का शक था, इसी संदेह में नक्सलियों ने उसे मौत के घाट उतार दिया।
विनोद मडे गांव में शिक्षा के प्रचार-प्रसार से जुड़े थे और शिक्षा दूत के रूप में काम कर रहे थे। बताया जा रहा है कि उनकी गांव में पहचान एक जिम्मेदार और सामाजिक रूप से सक्रिय व्यक्ति के रूप में थी। ऐसे में उनकी हत्या ने ग्रामीणों को झकझोर कर रख दिया है।
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अब तक पुलिस और प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन स्थानीय स्तर पर घटना की पुष्टि हो चुकी है। मामले को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी है और आसपास के इलाकों में सर्च ऑपरेशन भी चलाया जा रहा है।
गौरतलब है कि बीजापुर और इसके आसपास के क्षेत्र लंबे समय से नक्सल प्रभावित हैं। यहां आए दिन नक्सली गतिविधियों की खबरें आती रहती हैं, लेकिन एक शिक्षा दूत की हत्या जैसी घटनाएं न केवल दुर्भाग्यपूर्ण हैं, बल्कि समाज के उन मूल्यों पर भी सवाल खड़ा करती हैं जिनमें शिक्षा को सबसे ऊपर माना गया है।
