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नक्सलियों ने जारी किया मारे गए साथियों का आंकड़ा: बोले- 357 मारे गए, बस्तर पुलिस के मुताबिक संख्या 420 पार
Jagdalpur, CG
देश में माओवादियों के खिलाफ चल रही सुरक्षा बलों की सघन कार्रवाई के बीच नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी ने एक बुकलेट जारी कर अपने मारे गए साथियों की संख्या का आंकड़ा सार्वजनिक किया है।
इस दस्तावेज़ के अनुसार, सालभर में देशभर में 357 नक्सली मारे गए, जिनमें 136 महिला नक्सली भी शामिल हैं।
यह आंकड़ा पहले नक्सलियों द्वारा जारी बयान से कम है। कुछ माह पहले उन्होंने दावा किया था कि पिछले डेढ़ साल में 400 से ज्यादा नक्सली मारे गए। वहीं पुलिस का दावा है कि केवल बस्तर क्षेत्र में पिछले 18 महीनों में 420 से ज्यादा नक्सलियों का एनकाउंटर हुआ है।
बीजापुर में 2 शिक्षा दूतों की हत्या
इसी बीच, बीजापुर जिले के पीलूर गांव के जंगल में 15 जुलाई की सुबह दो शिक्षा दूतों की लाशें बरामद हुई हैं। एक की पहचान विनोद मडे के रूप में हुई है। दोनों पर नक्सलियों ने पुलिस मुखबिरी का आरोप लगाया था। हालांकि, प्रशासन की ओर से अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
बीजापुर में पिछले 15 दिनों में मुखबिरी के शक में 6 लोगों की हत्या की जा चुकी है, जिनमें ग्रामीण और छात्र शामिल हैं।
सबसे ज्यादा हानि दंडकारण्य में
नक्सली बुकलेट के मुताबिक, मारे गए 357 में से 281 नक्सली दंडकारण्य क्षेत्र में मारे गए, जो छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र के सीमावर्ती जंगलों में फैला है। इसके अलावा,
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बिहार-झारखंड: 14
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तेलंगाना: 23
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ओडिशा: 20
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एमएमसी (महाराष्ट्र-मप्र-छत्तीसगढ़): 8
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आंध्र-ओडिशा विशेष क्षेत्र: 9
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पश्चिमी घाट और पंजाब: 1-1
नक्सलियों ने दावा किया कि 80 साथी फर्जी मुठभेड़ों में मारे गए जबकि 269 की मौत घेराबंदी हमलों में हुई।
मारे गए वरिष्ठ कैडर भी शामिल
बुकलेट में यह भी कहा गया है कि मरने वालों में पोलित ब्यूरो मेंबर और महासचिव बसवा राजू, सेंट्रल कमेटी के 4, राज्य समिति के 16, जिला समिति के 23, और 83 एरिया कमांडर/पीपीसी शामिल हैं। इसके अलावा 138 पार्टी सदस्य, 17 PLGA सदस्य, और 6 जन संगठन से जुड़े कार्यकर्ता भी मारे गए।
शहीदी सप्ताह की तैयारी, हमले की आशंका
माओवादियों ने 28 जुलाई से 3 अगस्त तक शहीदी सप्ताह मनाने की घोषणा की है। इस दौरान वे अपने मारे गए साथियों को श्रद्धांजलि देंगे और गांवों में सभाएं आयोजित करेंगे। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि नक्सली इस दौरान बड़ा हमला कर सकते हैं।
बुकलेट में सरकार के खिलाफ 'कगार युद्ध' को नाकाम करने की बात लिखी गई है और जनसमुदाय को वर्ग संघर्ष के लिए लामबंद करने की चेतावनी दी गई है।
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नक्सलियों ने जारी किया मारे गए साथियों का आंकड़ा: बोले- 357 मारे गए, बस्तर पुलिस के मुताबिक संख्या 420 पार
Jagdalpur, CG
इस दस्तावेज़ के अनुसार, सालभर में देशभर में 357 नक्सली मारे गए, जिनमें 136 महिला नक्सली भी शामिल हैं।
यह आंकड़ा पहले नक्सलियों द्वारा जारी बयान से कम है। कुछ माह पहले उन्होंने दावा किया था कि पिछले डेढ़ साल में 400 से ज्यादा नक्सली मारे गए। वहीं पुलिस का दावा है कि केवल बस्तर क्षेत्र में पिछले 18 महीनों में 420 से ज्यादा नक्सलियों का एनकाउंटर हुआ है।
बीजापुर में 2 शिक्षा दूतों की हत्या
इसी बीच, बीजापुर जिले के पीलूर गांव के जंगल में 15 जुलाई की सुबह दो शिक्षा दूतों की लाशें बरामद हुई हैं। एक की पहचान विनोद मडे के रूप में हुई है। दोनों पर नक्सलियों ने पुलिस मुखबिरी का आरोप लगाया था। हालांकि, प्रशासन की ओर से अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
बीजापुर में पिछले 15 दिनों में मुखबिरी के शक में 6 लोगों की हत्या की जा चुकी है, जिनमें ग्रामीण और छात्र शामिल हैं।
सबसे ज्यादा हानि दंडकारण्य में
नक्सली बुकलेट के मुताबिक, मारे गए 357 में से 281 नक्सली दंडकारण्य क्षेत्र में मारे गए, जो छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र के सीमावर्ती जंगलों में फैला है। इसके अलावा,
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बिहार-झारखंड: 14
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तेलंगाना: 23
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ओडिशा: 20
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एमएमसी (महाराष्ट्र-मप्र-छत्तीसगढ़): 8
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आंध्र-ओडिशा विशेष क्षेत्र: 9
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पश्चिमी घाट और पंजाब: 1-1
नक्सलियों ने दावा किया कि 80 साथी फर्जी मुठभेड़ों में मारे गए जबकि 269 की मौत घेराबंदी हमलों में हुई।
मारे गए वरिष्ठ कैडर भी शामिल
बुकलेट में यह भी कहा गया है कि मरने वालों में पोलित ब्यूरो मेंबर और महासचिव बसवा राजू, सेंट्रल कमेटी के 4, राज्य समिति के 16, जिला समिति के 23, और 83 एरिया कमांडर/पीपीसी शामिल हैं। इसके अलावा 138 पार्टी सदस्य, 17 PLGA सदस्य, और 6 जन संगठन से जुड़े कार्यकर्ता भी मारे गए।
शहीदी सप्ताह की तैयारी, हमले की आशंका
माओवादियों ने 28 जुलाई से 3 अगस्त तक शहीदी सप्ताह मनाने की घोषणा की है। इस दौरान वे अपने मारे गए साथियों को श्रद्धांजलि देंगे और गांवों में सभाएं आयोजित करेंगे। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि नक्सली इस दौरान बड़ा हमला कर सकते हैं।
बुकलेट में सरकार के खिलाफ 'कगार युद्ध' को नाकाम करने की बात लिखी गई है और जनसमुदाय को वर्ग संघर्ष के लिए लामबंद करने की चेतावनी दी गई है।
