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पद्मश्री फूलबासन बाई: दो मुट्ठी चावल से शुरु किया महिला समूह, आज लोगों को दे रही रोजगार
Rajnandganv, CG
फूलबासन बाई यादव का कहना है कि जो लोग लड़ना नहीं जानते वो कभी जीत नहीं सकते.
ग्राम सुकुलदैहान की रहने वाली फूलबासन बाई आज समाज से डर डर कर जीने वाली और बेसहारा महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं. पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं को सशक्त करने और उनका मनोबल बढ़ाते हुए आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए महिला स्व सहायता समूह बनाकर उन्होंने महिलाओं को जोड़ना शुरू किया. आज लाखों की संख्या में महिलाएं इनसे जुड़ चुकी हैं.
कहानी फूलबासन बाई की: फूलबासन बाई यादव ने बकरी चराने से शुरुआत की थी और पद्मश्री का खिताब भी हासिल कर चुकी हैं. उन्होंने ऐसे कई मुकाम हासिल किए हैं,जिसे हासिल करना तो दूर सोचना भी एक सामान्य ग्रामीण परिवेश से आने वाली महिला के लिए नामुमकिन सा लगता है.
सामान की बिक्री के लिए प्लेटफार्म तैयार किया: फुलबासन बाई ने देशी सामानों की बिक्री के लिए भी एक प्लेटफॉर्म तैयार किया है, जिसके अंतर्गत ऑर्गेनिक सामग्रियां बेचकर महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं.
मुश्किलें आई पर हार नहीं मानी: फूलबासन बाई यादव ने बताया कि उनके जीवन में कई ऐसे मोड़ आये, जब उन्हें जिंदगी से रुखसत होने का ख्याल आया,लेकिन उन्होंने फिर से उठकर खड़े होने की ठानी और सभी परेशानियों का सामना करते हुए सफलता की सीढ़ियां चढ़ती चली गईं.
सामाजिक बुराईयों का सामना किया: उनके जीवन में कई ऐसी घटनाएं घटी, जिसके बाद समाज में उन्हें घृणा की दृष्टि से भी देखा जाने लगा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और आने डर को ही अपना हथियार बनाकर सामाजिक बुराइयों से लड़तीं चली गई.
पद्मश्री तक का सफर पूरा किया: फूलबासन बाई यादव कहती हैं, जिंदगी में परिस्थिति से बहुत कुछ सीखा सकता है. आत्महत्या न कर जिंदगी जीने का नया तरीका निकालना चाहिए. कभी दुखी नहीं होना चाहिए. आत्महत्या नहीं करना चाहिए. समस्याओं का हल है. एक कुत्ते या बिल्ली को को पत्थर मारेंगे तो वह डरकर भाग जाएंगे. लेकिन मधुमक्खी के छाते को कोई पत्थर मारता है तो वह हमला करती है. हम संगठन बनाकर आगे बढ़ सकते हैं.
बुलंद हौसले से मिली जीत: फूलबासन बाई यादव कहती हैं कि हम आर्थिक, सामाजिक, मानसिक लड़ाई लड़ सकते हैं. हम अकेले नहीं लेकिन सामूहिक होकर लड़ाई लड़ सकते हैं. मन में इच्छाशक्ति, लगन होनी चाहिए.
कभी बकरी चराया करती थीं: फूलबासन बाई यादव ने बताया कि बकरी चराते चराते कभी यह नहीं सोचा था कि 11 महिला, 2 मुट्ठी चावल, 2 रुपए से शुरुआत करेंगे और आगे बढ़ जाएंगे. परिस्थिति बहुत विपरीत रही. तकलीफ बहुत मिली. परिवार से, लोगों से ताना भी सहा. बहुत कुछ झेला. आज सब कुछ सहन करने के बाद ही सराहनीय काम हुआ है.
मां बम्लेश्वरी समूह: राजनांदगांव जिले में 2 लाख महिलाएं जुड़ कर काम कर रही हैं. सभी जानते हैं मां बम्लेश्वरी समूह कैसे काम करता है. महिलाएं आज इतनी सशक्त हो गईं हैं, कि वह अपने पति को भी रोजगार दे सकती हैं. अपनी बात को मुख्यमंत्री, कलेक्टर से रख सकती हैं.
लड़ने वालों को मिलती है जिंदगी: जिंदगी में कभी डरना नहीं चाहिए, निराश नहीं होना चाहिए. एक न एक दिन आपको मंजिल मिलेगी. जबतक गाली नहीं खाएंगे, तबतक तारीफ के हकदार भी नहीं बन सकते हैं. अपने कर्म पर ध्यान दीजिए, किसी के ताने से फर्क नहीं पड़ना चाहिए. आपको तारीफ चाहिए तो बहुत मेहनत करिए. कोई क्या बोलता है, क्या कहता है इस पर ध्यान मत दीजिए.
कौन हैं फूलबासन बाई यादव
- राजनांदगांव के छोटे से गांव सुकुलदैहान में हुआ जन्म.
- बकरी पालन से की रोजगार की शुरुआत.
- पद्मश्री सम्मान से सम्मानित हैं फूलबासन बाई यादव.
- कौन बनेगा करोड़पति के एपिसोड में हो चुकी हैं शामिल.
- 2 लाख लोगों को दे रही हैं रोजगार.
- मां बमलेश्वरी स्व-सहायता समूह का करती हैं संचालन.
- कम उम्र में हुई शादी,सामाजिक तानों का किया सामना.
- 12 महिलाओं के साथ शुरु किया महिला समूह.
- दो मुट्ठी चावल से शुरु किया महिला स्व सहायता समूह.
- महिलाओं को बना रहीं हैं आत्मनिर्भर और स्वाभिमानी.
- नशामुक्त समाज के लिए भी लोगों को कर रही हैं प्रेरित.
- सामाजिक बुराईयों के खिलाफ कर रही हैं काम.
- महिला सशक्तिकरण की बन चुकी हैं मिसाल.
- जल संरक्षण और बेटी बचाओ का दे रही हैं संदेश.
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पद्मश्री फूलबासन बाई: दो मुट्ठी चावल से शुरु किया महिला समूह, आज लोगों को दे रही रोजगार
Rajnandganv, CG
ग्राम सुकुलदैहान की रहने वाली फूलबासन बाई आज समाज से डर डर कर जीने वाली और बेसहारा महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं. पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं को सशक्त करने और उनका मनोबल बढ़ाते हुए आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए महिला स्व सहायता समूह बनाकर उन्होंने महिलाओं को जोड़ना शुरू किया. आज लाखों की संख्या में महिलाएं इनसे जुड़ चुकी हैं.
कहानी फूलबासन बाई की: फूलबासन बाई यादव ने बकरी चराने से शुरुआत की थी और पद्मश्री का खिताब भी हासिल कर चुकी हैं. उन्होंने ऐसे कई मुकाम हासिल किए हैं,जिसे हासिल करना तो दूर सोचना भी एक सामान्य ग्रामीण परिवेश से आने वाली महिला के लिए नामुमकिन सा लगता है.
सामान की बिक्री के लिए प्लेटफार्म तैयार किया: फुलबासन बाई ने देशी सामानों की बिक्री के लिए भी एक प्लेटफॉर्म तैयार किया है, जिसके अंतर्गत ऑर्गेनिक सामग्रियां बेचकर महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं.
मुश्किलें आई पर हार नहीं मानी: फूलबासन बाई यादव ने बताया कि उनके जीवन में कई ऐसे मोड़ आये, जब उन्हें जिंदगी से रुखसत होने का ख्याल आया,लेकिन उन्होंने फिर से उठकर खड़े होने की ठानी और सभी परेशानियों का सामना करते हुए सफलता की सीढ़ियां चढ़ती चली गईं.
सामाजिक बुराईयों का सामना किया: उनके जीवन में कई ऐसी घटनाएं घटी, जिसके बाद समाज में उन्हें घृणा की दृष्टि से भी देखा जाने लगा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और आने डर को ही अपना हथियार बनाकर सामाजिक बुराइयों से लड़तीं चली गई.
पद्मश्री तक का सफर पूरा किया: फूलबासन बाई यादव कहती हैं, जिंदगी में परिस्थिति से बहुत कुछ सीखा सकता है. आत्महत्या न कर जिंदगी जीने का नया तरीका निकालना चाहिए. कभी दुखी नहीं होना चाहिए. आत्महत्या नहीं करना चाहिए. समस्याओं का हल है. एक कुत्ते या बिल्ली को को पत्थर मारेंगे तो वह डरकर भाग जाएंगे. लेकिन मधुमक्खी के छाते को कोई पत्थर मारता है तो वह हमला करती है. हम संगठन बनाकर आगे बढ़ सकते हैं.
बुलंद हौसले से मिली जीत: फूलबासन बाई यादव कहती हैं कि हम आर्थिक, सामाजिक, मानसिक लड़ाई लड़ सकते हैं. हम अकेले नहीं लेकिन सामूहिक होकर लड़ाई लड़ सकते हैं. मन में इच्छाशक्ति, लगन होनी चाहिए.
कभी बकरी चराया करती थीं: फूलबासन बाई यादव ने बताया कि बकरी चराते चराते कभी यह नहीं सोचा था कि 11 महिला, 2 मुट्ठी चावल, 2 रुपए से शुरुआत करेंगे और आगे बढ़ जाएंगे. परिस्थिति बहुत विपरीत रही. तकलीफ बहुत मिली. परिवार से, लोगों से ताना भी सहा. बहुत कुछ झेला. आज सब कुछ सहन करने के बाद ही सराहनीय काम हुआ है.
मां बम्लेश्वरी समूह: राजनांदगांव जिले में 2 लाख महिलाएं जुड़ कर काम कर रही हैं. सभी जानते हैं मां बम्लेश्वरी समूह कैसे काम करता है. महिलाएं आज इतनी सशक्त हो गईं हैं, कि वह अपने पति को भी रोजगार दे सकती हैं. अपनी बात को मुख्यमंत्री, कलेक्टर से रख सकती हैं.
लड़ने वालों को मिलती है जिंदगी: जिंदगी में कभी डरना नहीं चाहिए, निराश नहीं होना चाहिए. एक न एक दिन आपको मंजिल मिलेगी. जबतक गाली नहीं खाएंगे, तबतक तारीफ के हकदार भी नहीं बन सकते हैं. अपने कर्म पर ध्यान दीजिए, किसी के ताने से फर्क नहीं पड़ना चाहिए. आपको तारीफ चाहिए तो बहुत मेहनत करिए. कोई क्या बोलता है, क्या कहता है इस पर ध्यान मत दीजिए.
कौन हैं फूलबासन बाई यादव
- राजनांदगांव के छोटे से गांव सुकुलदैहान में हुआ जन्म.
- बकरी पालन से की रोजगार की शुरुआत.
- पद्मश्री सम्मान से सम्मानित हैं फूलबासन बाई यादव.
- कौन बनेगा करोड़पति के एपिसोड में हो चुकी हैं शामिल.
- 2 लाख लोगों को दे रही हैं रोजगार.
- मां बमलेश्वरी स्व-सहायता समूह का करती हैं संचालन.
- कम उम्र में हुई शादी,सामाजिक तानों का किया सामना.
- 12 महिलाओं के साथ शुरु किया महिला समूह.
- दो मुट्ठी चावल से शुरु किया महिला स्व सहायता समूह.
- महिलाओं को बना रहीं हैं आत्मनिर्भर और स्वाभिमानी.
- नशामुक्त समाज के लिए भी लोगों को कर रही हैं प्रेरित.
- सामाजिक बुराईयों के खिलाफ कर रही हैं काम.
- महिला सशक्तिकरण की बन चुकी हैं मिसाल.
- जल संरक्षण और बेटी बचाओ का दे रही हैं संदेश.
