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महिला आरक्षण पर सियासत तेज, भूपेश बघेल का तंज—CM बदलने की सलाह
रायपुर (छ.ग.)
महिला आरक्षण बिल विवाद के बीच भूपेश बघेल का बयान, छत्तीसगढ़ में विशेष सत्र की तैयारी महिला आरक्षण पर जारी राजनीतिक टकराव ने नया मोड़ ले लिया है। बयानबाजी के बीच सियासत और तेज हो गई है।
छत्तीसगढ़ में महिला आरक्षण बिल को लेकर सियासी घमासान तेज होता जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए तंज कसा कि अगर महिलाओं को लेकर इतनी चिंता है, तो “कौशल्या भाभी को मुख्यमंत्री बना दीजिए।” यह बयान ऐसे समय आया है जब केंद्र में महिला आरक्षण बिल पारित नहीं हो सका और राज्य में इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ गई हैं।
छत्तीसगढ़ में महिला आरक्षण बिल को लेकर सियासी घमासान तेज होता जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए तंज कसा कि अगर महिलाओं को लेकर इतनी चिंता है, तो “कौशल्या भाभी को मुख्यमंत्री बना दीजिए।” यह बयान ऐसे समय आया है जब केंद्र में महिला आरक्षण बिल पारित नहीं हो सका और राज्य में इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ गई हैं।
रायपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बघेल ने कहा कि महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में कांग्रेस ने हमेशा पहल की है। उन्होंने दावा किया कि 1989 में ही यह कानून लागू हो सकता था, लेकिन उस समय भाजपा ने विरोध किया। उनके मुताबिक पंचायत स्तर पर आरक्षण लागू होने के बाद बड़ी संख्या में महिलाएं राजनीति में आईं और नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं।
विशेष सत्र की तैयारी
राज्य सरकार इस मुद्दे पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, कैबिनेट की मंजूरी के बाद प्रस्ताव राज्यपाल को भेजा जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, इस सत्र में विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव भी लाया जा सकता है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पहले ही संकेत दिए हैं कि विपक्ष के रुख को लेकर सरकार सख्त रुख अपनाएगी।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
बीजेपी ने महिला आरक्षण बिल के समर्थन में राज्यभर में प्रदर्शन शुरू कर दिया है। 20 अप्रैल से शुरू हुए इस अभियान के तहत महिला सम्मेलन और विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।सरकार का कहना है कि विपक्ष के कारण बिल पास नहीं हो सका, जबकि कांग्रेस इसे राजनीतिक आरोप बता रही है। बघेल ने आरोप लगाया कि भाजपा और उससे जुड़े संगठनों ने कभी महिलाओं को शीर्ष नेतृत्व में पर्याप्त अवसर नहीं दिया।
पृष्ठभूमि की बात करें तो संसद में महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन बिल आवश्यक बहुमत नहीं जुटा सका। रिपोर्ट्स के अनुसार, बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि इसे पारित करने के लिए अधिक समर्थन की जरूरत थी।इस घटनाक्रम के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सार्वजनिक रूप से महिलाओं से माफी भी मांगी थी और विपक्ष पर निशाना साधा था।
असर और आगे की राह
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला आरक्षण का मुद्दा आने वाले समय में चुनावी एजेंडा बन सकता है। इससे महिलाओं की भागीदारी और प्रतिनिधित्व को लेकर बहस और तेज होगी। जनता के बीच भी इस विषय पर चर्चा बढ़ रही है, खासकर ग्रामीण और स्थानीय निकाय स्तर पर, जहां पहले से आरक्षण लागू है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मुद्दा “पब्लिक इंटरेस्ट स्टोरी” बन चुका है और राष्ट्रीय स्तर पर असर डाल सकता है।
आने वाले दिनों में विशेष सत्र और राजनीतिक प्रदर्शनों के जरिए यह स्पष्ट होगा कि यह विवाद किस दिशा में जाता है। फिलहाल, महिला आरक्षण बिल को लेकर जारी बयानबाजी और राजनीतिक रणनीतियां देश की आज की ताज़ा ख़बरें और ट्रेंडिंग न्यूज इंडिया में प्रमुख बनी हुई हैं।
में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बघेल ने कहा कि महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में कांग्रेस ने हमेशा पहल की है। उन्होंने दावा किया कि 1989 में ही यह कानून लागू हो सकता था, लेकिन उस समय भाजपा ने विरोध किया। उनके मुताबिक पंचायत स्तर पर आरक्षण लागू होने के बाद बड़ी संख्या में महिलाएं राजनीति में आईं और नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं।
विशेष सत्र की तैयारी
राज्य सरकार इस मुद्दे पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, कैबिनेट की मंजूरी के बाद प्रस्ताव राज्यपाल को भेजा जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, इस सत्र में विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव भी लाया जा सकता है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पहले ही संकेत दिए हैं कि विपक्ष के रुख को लेकर सरकार सख्त रुख अपनाएगी।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
बीजेपी ने महिला आरक्षण बिल के समर्थन में राज्यभर में प्रदर्शन शुरू कर दिया है। 20 अप्रैल से शुरू हुए इस अभियान के तहत महिला सम्मेलन और विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।सरकार का कहना है कि विपक्ष के कारण बिल पास नहीं हो सका, जबकि कांग्रेस इसे राजनीतिक आरोप बता रही है। बघेल ने आरोप लगाया कि भाजपा और उससे जुड़े संगठनों ने कभी महिलाओं को शीर्ष नेतृत्व में पर्याप्त अवसर नहीं दिया।
पृष्ठभूमि की बात करें तो संसद में महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन बिल आवश्यक बहुमत नहीं जुटा सका। रिपोर्ट्स के अनुसार, बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि इसे पारित करने के लिए अधिक समर्थन की जरूरत थी। इस घटनाक्रम के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सार्वजनिक रूप से महिलाओं से माफी भी मांगी थी और विपक्ष पर निशाना साधा था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला आरक्षण का मुद्दा आने वाले समय में चुनावी एजेंडा बन सकता है। इससे महिलाओं की भागीदारी और प्रतिनिधित्व को लेकर बहस और तेज होगी।
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महिला आरक्षण पर सियासत तेज, भूपेश बघेल का तंज—CM बदलने की सलाह
रायपुर (छ.ग.)
छत्तीसगढ़ में महिला आरक्षण बिल को लेकर सियासी घमासान तेज होता जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए तंज कसा कि अगर महिलाओं को लेकर इतनी चिंता है, तो “कौशल्या भाभी को मुख्यमंत्री बना दीजिए।” यह बयान ऐसे समय आया है जब केंद्र में महिला आरक्षण बिल पारित नहीं हो सका और राज्य में इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ गई हैं।
छत्तीसगढ़ में महिला आरक्षण बिल को लेकर सियासी घमासान तेज होता जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए तंज कसा कि अगर महिलाओं को लेकर इतनी चिंता है, तो “कौशल्या भाभी को मुख्यमंत्री बना दीजिए।” यह बयान ऐसे समय आया है जब केंद्र में महिला आरक्षण बिल पारित नहीं हो सका और राज्य में इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ गई हैं।
रायपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बघेल ने कहा कि महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में कांग्रेस ने हमेशा पहल की है। उन्होंने दावा किया कि 1989 में ही यह कानून लागू हो सकता था, लेकिन उस समय भाजपा ने विरोध किया। उनके मुताबिक पंचायत स्तर पर आरक्षण लागू होने के बाद बड़ी संख्या में महिलाएं राजनीति में आईं और नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं।
विशेष सत्र की तैयारी
राज्य सरकार इस मुद्दे पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, कैबिनेट की मंजूरी के बाद प्रस्ताव राज्यपाल को भेजा जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, इस सत्र में विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव भी लाया जा सकता है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पहले ही संकेत दिए हैं कि विपक्ष के रुख को लेकर सरकार सख्त रुख अपनाएगी।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
बीजेपी ने महिला आरक्षण बिल के समर्थन में राज्यभर में प्रदर्शन शुरू कर दिया है। 20 अप्रैल से शुरू हुए इस अभियान के तहत महिला सम्मेलन और विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।सरकार का कहना है कि विपक्ष के कारण बिल पास नहीं हो सका, जबकि कांग्रेस इसे राजनीतिक आरोप बता रही है। बघेल ने आरोप लगाया कि भाजपा और उससे जुड़े संगठनों ने कभी महिलाओं को शीर्ष नेतृत्व में पर्याप्त अवसर नहीं दिया।
पृष्ठभूमि की बात करें तो संसद में महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन बिल आवश्यक बहुमत नहीं जुटा सका। रिपोर्ट्स के अनुसार, बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि इसे पारित करने के लिए अधिक समर्थन की जरूरत थी।इस घटनाक्रम के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सार्वजनिक रूप से महिलाओं से माफी भी मांगी थी और विपक्ष पर निशाना साधा था।
असर और आगे की राह
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला आरक्षण का मुद्दा आने वाले समय में चुनावी एजेंडा बन सकता है। इससे महिलाओं की भागीदारी और प्रतिनिधित्व को लेकर बहस और तेज होगी। जनता के बीच भी इस विषय पर चर्चा बढ़ रही है, खासकर ग्रामीण और स्थानीय निकाय स्तर पर, जहां पहले से आरक्षण लागू है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मुद्दा “पब्लिक इंटरेस्ट स्टोरी” बन चुका है और राष्ट्रीय स्तर पर असर डाल सकता है।
आने वाले दिनों में विशेष सत्र और राजनीतिक प्रदर्शनों के जरिए यह स्पष्ट होगा कि यह विवाद किस दिशा में जाता है। फिलहाल, महिला आरक्षण बिल को लेकर जारी बयानबाजी और राजनीतिक रणनीतियां देश की आज की ताज़ा ख़बरें और ट्रेंडिंग न्यूज इंडिया में प्रमुख बनी हुई हैं।
में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बघेल ने कहा कि महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में कांग्रेस ने हमेशा पहल की है। उन्होंने दावा किया कि 1989 में ही यह कानून लागू हो सकता था, लेकिन उस समय भाजपा ने विरोध किया। उनके मुताबिक पंचायत स्तर पर आरक्षण लागू होने के बाद बड़ी संख्या में महिलाएं राजनीति में आईं और नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं।
विशेष सत्र की तैयारी
राज्य सरकार इस मुद्दे पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, कैबिनेट की मंजूरी के बाद प्रस्ताव राज्यपाल को भेजा जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, इस सत्र में विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव भी लाया जा सकता है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पहले ही संकेत दिए हैं कि विपक्ष के रुख को लेकर सरकार सख्त रुख अपनाएगी।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
बीजेपी ने महिला आरक्षण बिल के समर्थन में राज्यभर में प्रदर्शन शुरू कर दिया है। 20 अप्रैल से शुरू हुए इस अभियान के तहत महिला सम्मेलन और विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।सरकार का कहना है कि विपक्ष के कारण बिल पास नहीं हो सका, जबकि कांग्रेस इसे राजनीतिक आरोप बता रही है। बघेल ने आरोप लगाया कि भाजपा और उससे जुड़े संगठनों ने कभी महिलाओं को शीर्ष नेतृत्व में पर्याप्त अवसर नहीं दिया।
पृष्ठभूमि की बात करें तो संसद में महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन बिल आवश्यक बहुमत नहीं जुटा सका। रिपोर्ट्स के अनुसार, बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि इसे पारित करने के लिए अधिक समर्थन की जरूरत थी। इस घटनाक्रम के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सार्वजनिक रूप से महिलाओं से माफी भी मांगी थी और विपक्ष पर निशाना साधा था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला आरक्षण का मुद्दा आने वाले समय में चुनावी एजेंडा बन सकता है। इससे महिलाओं की भागीदारी और प्रतिनिधित्व को लेकर बहस और तेज होगी।
