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भिलाई में केमिकल फैक्ट्रियों पर विवाद, EOW जांच की मांग
भिलाई (छ.ग.)
एक ही पते पर कई फैक्ट्रियों के संचालन पर विधायक ने उठाए सवाल, कार्रवाई पर मांगी रिपोर्ट मामला अब जांच एजेंसियों तक पहुंच गया है। प्रशासनिक जवाबों में विरोधाभास से सवाल गहराए।
दुर्ग-भिलाई क्षेत्र में एक ही पते पर कई केमिकल फैक्ट्रियों के संचालन का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। भिलाई नगर से विधायक देवेंद्र यादव ने इस मुद्दे को पहले विधानसभा में उठाया था, लेकिन वहां मिले जवाब से असंतुष्ट होकर अब उन्होंने आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) को पत्र लिखकर विस्तृत जांच और अब तक की कार्रवाई की जानकारी मांगी है। इस पूरे मामले में प्रशासनिक स्तर पर विरोधाभासी जानकारी सामने आने से सवाल और गहरे हो गए हैं।
विधानसभा में वाणिज्य एवं उद्योग विभाग की ओर से दिए गए जवाब में कहा गया था कि इस तरह की कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। हालांकि, इसी जवाब में यह भी स्वीकार किया गया कि छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने फरवरी 2025 में चार सदस्यीय जांच समिति गठित की थी, जिसने जिले के 16 कोलतार प्रोसेसिंग उद्योगों की जांच की थी।
जांच में अनियमितताएं
जांच समिति की रिपोर्ट में 8 उद्योग ऐसे पाए गए, जिन्होंने पर्यावरण नियमों का पालन नहीं किया।विभाग ने कार्रवाई किए जाने की बात तो कही, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि किन कंपनियों पर क्या कार्रवाई हुई और उसका परिणाम क्या रहा। यही अस्पष्टता अब विवाद का मुख्य कारण बन रही है।
शिकायतों पर सवाल
24 जून 2025 को मिली एक शिकायत में आरोप लगाया गया कि कुछ उद्योगों ने तथ्य छिपाकर केंद्रीय पर्यावरण स्वीकृति हासिल की।हैरानी की बात यह रही कि इस शिकायत पर कोई जांच समिति गठित नहीं की गई। वहीं, जुलाई 2025 में एक अन्य शिकायत पर पर्यावरण मंडल ने उद्योग संचालनालय समेत संबंधित विभागों को पत्र जरूर भेजा, लेकिन आगे की कार्रवाई स्पष्ट नहीं हुई।
यह मामला तब और गंभीर हो गया जब सामने आया कि एक ही पते पर अलग-अलग नामों से कई केमिकल इकाइयों का संचालन किया जा रहा है।
विधायक की आपत्ति
विधायक देवेंद्र यादव ने अपने पत्र में कहा है कि विधानसभा में दिए गए जवाब में स्पष्ट विरोधाभास नजर आता है।एक ओर विभाग शिकायत न मिलने की बात करता है, वहीं दूसरी ओर जांच समिति के गठन और नियम उल्लंघन की पुष्टि भी करता है। उन्होंने EOW से यह भी पूछा है कि शिकायत क्रमांक 02/2025 पर अब तक क्या प्रगति हुई है और दोषी उद्योगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।
इस पूरे घटनाक्रम ने औद्योगिक क्षेत्र में नियामक निगरानी की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि एक ही पते पर कई इकाइयां संचालित हो रही हैं, तो यह न केवल नियमों का उल्लंघन हो सकता है, बल्कि पर्यावरण और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकता है।अब मामला EOW के पास है और जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
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भिलाई में केमिकल फैक्ट्रियों पर विवाद, EOW जांच की मांग
भिलाई (छ.ग.)
दुर्ग-भिलाई क्षेत्र में एक ही पते पर कई केमिकल फैक्ट्रियों के संचालन का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। भिलाई नगर से विधायक देवेंद्र यादव ने इस मुद्दे को पहले विधानसभा में उठाया था, लेकिन वहां मिले जवाब से असंतुष्ट होकर अब उन्होंने आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) को पत्र लिखकर विस्तृत जांच और अब तक की कार्रवाई की जानकारी मांगी है। इस पूरे मामले में प्रशासनिक स्तर पर विरोधाभासी जानकारी सामने आने से सवाल और गहरे हो गए हैं।
विधानसभा में वाणिज्य एवं उद्योग विभाग की ओर से दिए गए जवाब में कहा गया था कि इस तरह की कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। हालांकि, इसी जवाब में यह भी स्वीकार किया गया कि छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने फरवरी 2025 में चार सदस्यीय जांच समिति गठित की थी, जिसने जिले के 16 कोलतार प्रोसेसिंग उद्योगों की जांच की थी।
जांच में अनियमितताएं
जांच समिति की रिपोर्ट में 8 उद्योग ऐसे पाए गए, जिन्होंने पर्यावरण नियमों का पालन नहीं किया।विभाग ने कार्रवाई किए जाने की बात तो कही, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि किन कंपनियों पर क्या कार्रवाई हुई और उसका परिणाम क्या रहा। यही अस्पष्टता अब विवाद का मुख्य कारण बन रही है।
शिकायतों पर सवाल
24 जून 2025 को मिली एक शिकायत में आरोप लगाया गया कि कुछ उद्योगों ने तथ्य छिपाकर केंद्रीय पर्यावरण स्वीकृति हासिल की।हैरानी की बात यह रही कि इस शिकायत पर कोई जांच समिति गठित नहीं की गई। वहीं, जुलाई 2025 में एक अन्य शिकायत पर पर्यावरण मंडल ने उद्योग संचालनालय समेत संबंधित विभागों को पत्र जरूर भेजा, लेकिन आगे की कार्रवाई स्पष्ट नहीं हुई।
यह मामला तब और गंभीर हो गया जब सामने आया कि एक ही पते पर अलग-अलग नामों से कई केमिकल इकाइयों का संचालन किया जा रहा है।
विधायक की आपत्ति
विधायक देवेंद्र यादव ने अपने पत्र में कहा है कि विधानसभा में दिए गए जवाब में स्पष्ट विरोधाभास नजर आता है।एक ओर विभाग शिकायत न मिलने की बात करता है, वहीं दूसरी ओर जांच समिति के गठन और नियम उल्लंघन की पुष्टि भी करता है। उन्होंने EOW से यह भी पूछा है कि शिकायत क्रमांक 02/2025 पर अब तक क्या प्रगति हुई है और दोषी उद्योगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।
इस पूरे घटनाक्रम ने औद्योगिक क्षेत्र में नियामक निगरानी की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि एक ही पते पर कई इकाइयां संचालित हो रही हैं, तो यह न केवल नियमों का उल्लंघन हो सकता है, बल्कि पर्यावरण और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकता है।अब मामला EOW के पास है और जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
