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छत्तीसगढ़ में घरेलू गैस सिलेंडर फिर महंगा, अब 1013 रुपए चुकाने होंगे
रायपुर,(छ.ग.)
तीन महीने में दूसरी बार बढ़े दाम, घरेलू एलपीजी पर 89 रुपए की बढ़ोतरी से रसोई का बजट बिगड़ने की आशंका
रायपुर। छत्तीसगढ़ में घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर एक बार फिर महंगा हो गया है। रविवार से राज्य में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की नई कीमत लागू कर दी गई है। राजधानी रायपुर में अब उपभोक्ताओं को एक घरेलू सिलेंडर के लिए लगभग 1013 रुपए चुकाने होंगे। इससे पहले यही सिलेंडर 984 रुपए में मिल रहा था। नई दरों के अनुसार एक सिलेंडर पर 29 रुपए की बढ़ोतरी हुई है, जिससे आम लोगों की रसोई का बजट प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है।
घरेलू एलपीजी की कीमतों में यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जब पहले से ही खाद्य पदार्थों, ईंधन और दैनिक जरूरत की वस्तुओं के दाम बढ़े हुए हैं। बढ़ी हुई कीमतों का सीधा असर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर पड़ने की उम्मीद है। खासकर उन परिवारों के लिए यह अतिरिक्त बोझ माना जा रहा है जो पूरी तरह रसोई गैस पर निर्भर हैं।
पिछले तीन महीनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो यह दूसरी बार है जब घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ाए गए हैं। इससे पहले 7 मार्च को गैस सिलेंडर की कीमत में 60 रुपए की वृद्धि की गई थी। मार्च और जून की बढ़ोतरी को मिलाकर देखा जाए तो तीन महीने के भीतर घरेलू गैस सिलेंडर कुल 89 रुपए महंगा हो चुका है। लगातार बढ़ती कीमतों ने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। कई लोगों का कहना है कि घरेलू खर्च पहले से ही बढ़े हुए हैं और अब गैस सिलेंडर महंगा होने से मासिक बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।
घरेलू गैस सिलेंडर के साथ-साथ कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी हाल ही में वृद्धि की गई थी। करीब एक सप्ताह पहले व्यावसायिक उपयोग में आने वाले सिलेंडर के दाम लगभग 53 रुपए बढ़ाए गए थे। होटल, रेस्तरां, ढाबा और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर इसका असर देखने को मिल सकता है। व्यापारियों का कहना है कि लगातार बढ़ती लागत का असर अंततः ग्राहकों तक पहुंच सकता है।
तेल कंपनियों का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा उत्पादों की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है। वैश्विक स्तर पर एलपीजी की खरीद लागत बढ़ने और घरेलू बिक्री में होने वाले नुकसान के कारण कीमतों में संशोधन करना आवश्यक हो गया था। कंपनियों के अनुसार मौजूदा बढ़ोतरी के बाद भी उन्हें पूरी लागत की भरपाई नहीं हो पा रही है।
सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार सरकारी तेल विपणन कंपनियों को घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बिक्री पर प्रति सिलेंडर काफी नुकसान उठाना पड़ रहा था। कंपनियों का दावा है कि हालिया मूल्य वृद्धि से नुकसान में कुछ कमी आएगी, लेकिन पूरी भरपाई अभी भी संभव नहीं हो सकेगी। यही वजह है कि कंपनियां समय-समय पर लागत और बाजार की परिस्थितियों के आधार पर कीमतों में बदलाव करती रहती हैं।
एलपीजी के अलावा पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में भी हाल के हफ्तों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पेट्रोल और डीजल के दामों में लगातार वृद्धि से परिवहन लागत बढ़ी है, जिसका असर विभिन्न वस्तुओं की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है। वहीं सीएनजी महंगी होने से सार्वजनिक और निजी परिवहन सेवाओं की लागत में भी बढ़ोतरी हुई है। आर्थिक जानकारों का मानना है कि ईंधन की कीमतों में वृद्धि का प्रभाव केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह बाजार की समग्र महंगाई को प्रभावित करता है।
एलपीजी सिलेंडर की कीमत तय करने की प्रक्रिया कई कारकों पर निर्भर करती है। सबसे पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों को देखा जाता है। इसके बाद डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसके अलावा आयात शुल्क, परिवहन खर्च, बॉटलिंग प्लांट का खर्च और वितरण व्यवस्था से जुड़ी लागत भी अंतिम कीमत को प्रभावित करती है।
सरकार की सब्सिडी और कर संबंधी नीतियां भी गैस सिलेंडर के दाम तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं। हालांकि वर्तमान में अधिकांश उपभोक्ताओं को सीमित या नाममात्र की सब्सिडी मिल रही है। ऐसे में बाजार में होने वाले मूल्य परिवर्तन का सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ता है। नई दरें लागू होने के बाद राज्यभर में उपभोक्ताओं को महंगा सिलेंडर खरीदना पड़ेगा। आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति और ऊर्जा कीमतों में बदलाव के आधार पर एलपीजी दरों में फिर संशोधन हो सकता है। लेकिन बढ़ी हुई कीमतों ने आम लोगों की रसोई का खर्च बढ़ा दिया है
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छत्तीसगढ़ में घरेलू गैस सिलेंडर फिर महंगा, अब 1013 रुपए चुकाने होंगे
रायपुर,(छ.ग.)
रायपुर। छत्तीसगढ़ में घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर एक बार फिर महंगा हो गया है। रविवार से राज्य में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की नई कीमत लागू कर दी गई है। राजधानी रायपुर में अब उपभोक्ताओं को एक घरेलू सिलेंडर के लिए लगभग 1013 रुपए चुकाने होंगे। इससे पहले यही सिलेंडर 984 रुपए में मिल रहा था। नई दरों के अनुसार एक सिलेंडर पर 29 रुपए की बढ़ोतरी हुई है, जिससे आम लोगों की रसोई का बजट प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है।
घरेलू एलपीजी की कीमतों में यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जब पहले से ही खाद्य पदार्थों, ईंधन और दैनिक जरूरत की वस्तुओं के दाम बढ़े हुए हैं। बढ़ी हुई कीमतों का सीधा असर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर पड़ने की उम्मीद है। खासकर उन परिवारों के लिए यह अतिरिक्त बोझ माना जा रहा है जो पूरी तरह रसोई गैस पर निर्भर हैं।
पिछले तीन महीनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो यह दूसरी बार है जब घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ाए गए हैं। इससे पहले 7 मार्च को गैस सिलेंडर की कीमत में 60 रुपए की वृद्धि की गई थी। मार्च और जून की बढ़ोतरी को मिलाकर देखा जाए तो तीन महीने के भीतर घरेलू गैस सिलेंडर कुल 89 रुपए महंगा हो चुका है। लगातार बढ़ती कीमतों ने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। कई लोगों का कहना है कि घरेलू खर्च पहले से ही बढ़े हुए हैं और अब गैस सिलेंडर महंगा होने से मासिक बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।
घरेलू गैस सिलेंडर के साथ-साथ कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी हाल ही में वृद्धि की गई थी। करीब एक सप्ताह पहले व्यावसायिक उपयोग में आने वाले सिलेंडर के दाम लगभग 53 रुपए बढ़ाए गए थे। होटल, रेस्तरां, ढाबा और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर इसका असर देखने को मिल सकता है। व्यापारियों का कहना है कि लगातार बढ़ती लागत का असर अंततः ग्राहकों तक पहुंच सकता है।
तेल कंपनियों का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा उत्पादों की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है। वैश्विक स्तर पर एलपीजी की खरीद लागत बढ़ने और घरेलू बिक्री में होने वाले नुकसान के कारण कीमतों में संशोधन करना आवश्यक हो गया था। कंपनियों के अनुसार मौजूदा बढ़ोतरी के बाद भी उन्हें पूरी लागत की भरपाई नहीं हो पा रही है।
सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार सरकारी तेल विपणन कंपनियों को घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बिक्री पर प्रति सिलेंडर काफी नुकसान उठाना पड़ रहा था। कंपनियों का दावा है कि हालिया मूल्य वृद्धि से नुकसान में कुछ कमी आएगी, लेकिन पूरी भरपाई अभी भी संभव नहीं हो सकेगी। यही वजह है कि कंपनियां समय-समय पर लागत और बाजार की परिस्थितियों के आधार पर कीमतों में बदलाव करती रहती हैं।
एलपीजी के अलावा पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में भी हाल के हफ्तों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पेट्रोल और डीजल के दामों में लगातार वृद्धि से परिवहन लागत बढ़ी है, जिसका असर विभिन्न वस्तुओं की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है। वहीं सीएनजी महंगी होने से सार्वजनिक और निजी परिवहन सेवाओं की लागत में भी बढ़ोतरी हुई है। आर्थिक जानकारों का मानना है कि ईंधन की कीमतों में वृद्धि का प्रभाव केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह बाजार की समग्र महंगाई को प्रभावित करता है।
एलपीजी सिलेंडर की कीमत तय करने की प्रक्रिया कई कारकों पर निर्भर करती है। सबसे पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों को देखा जाता है। इसके बाद डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसके अलावा आयात शुल्क, परिवहन खर्च, बॉटलिंग प्लांट का खर्च और वितरण व्यवस्था से जुड़ी लागत भी अंतिम कीमत को प्रभावित करती है।
सरकार की सब्सिडी और कर संबंधी नीतियां भी गैस सिलेंडर के दाम तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं। हालांकि वर्तमान में अधिकांश उपभोक्ताओं को सीमित या नाममात्र की सब्सिडी मिल रही है। ऐसे में बाजार में होने वाले मूल्य परिवर्तन का सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ता है। नई दरें लागू होने के बाद राज्यभर में उपभोक्ताओं को महंगा सिलेंडर खरीदना पड़ेगा। आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति और ऊर्जा कीमतों में बदलाव के आधार पर एलपीजी दरों में फिर संशोधन हो सकता है। लेकिन बढ़ी हुई कीमतों ने आम लोगों की रसोई का खर्च बढ़ा दिया है
