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रायपुर ड्रग्स केस में ED की एंट्री, मनी ट्रेल और नेटवर्क की होगी जांच
Digital Desk
नाव्या मलिक से जुड़े चर्चित ड्रग्स मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने जांच शुरू की। एजेंसी ने पुलिस से चार्जशीट और जांच से जुड़े दस्तावेज मांगे हैं।
रायपुर के बहुचर्चित ड्रग्स मामले की जांच अब नए चरण में पहुंच गई है। कथित ड्रग्स नेटवर्क से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। एजेंसी का फोकस अब इस मामले से जुड़े वित्तीय लेन-देन, संभावित मनी लॉन्ड्रिंग और कथित अवैध कमाई के स्रोतों पर रहेगा। सूत्रों के मुताबिक, ईडी ने मामले की जांच कर रही पुलिस से चार्जशीट, केस डायरी और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों की प्रतियां मांगी हैं। इस घटनाक्रम के बाद मामले से जुड़े कई पहलुओं की दोबारा पड़ताल होने की संभावना जताई जा रही है।
पुलिस पहले ही इस मामले में चार्जशीट अदालत में पेश कर चुकी है और ट्रायल की प्रक्रिया जारी है। अब ईडी यह जांच करेगी कि कथित ड्रग्स कारोबार से जुड़े पैसों का प्रवाह किस प्रकार हुआ और क्या किसी प्रकार के अवैध वित्तीय नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया। अधिकारियों के अनुसार, जांच में बैंकिंग रिकॉर्ड, डिजिटल ट्रांजेक्शन और संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों का विश्लेषण किया जा सकता है।
यह मामला अगस्त 2025 में उस समय चर्चा में आया था, जब पुलिस ने एमडीएमए के साथ तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान सामने आई जानकारियों के आधार पर जांच आगे बढ़ी और बाद में मुंबई से नाव्या मलिक को गिरफ्तार किया गया। पुलिस जांच में दावा किया गया था कि वह कथित तौर पर ड्रग्स सप्लाई नेटवर्क से जुड़ी हुई थी। हालांकि मामले की सुनवाई अभी न्यायालय में लंबित है।
मनी ट्रेल पर फोकस
ईडी की जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना होगा कि कथित अवैध कारोबार से प्राप्त धन का उपयोग कहां और कैसे किया गया। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास करेगी कि क्या इस नेटवर्क में अन्य लोग या संस्थाएं आर्थिक रूप से लाभान्वित हुईं।
सूत्रों के मुताबिक, एजेंसी डिजिटल रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा और वित्तीय दस्तावेजों का अध्ययन कर सकती है। यदि जांच में नए तथ्य सामने आते हैं तो अन्य व्यक्तियों से भी पूछताछ की जा सकती है। हालांकि फिलहाल ईडी की ओर से किसी नए आरोपी या कार्रवाई को लेकर आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई है।
चार्जशीट के खुलासे
पुलिस द्वारा अदालत में प्रस्तुत चार्जशीट में कई महत्वपूर्ण दावों का उल्लेख किया गया है। दस्तावेजों के अनुसार, जांच के दौरान एक ऐसे व्यक्ति की भूमिका सामने आई थी, जिसने कथित तौर पर ड्रग्स की खेप से संबंधित जानकारी पुलिस तक पहुंचाई। चार्जशीट में यह भी उल्लेख किया गया है कि मामले से जुड़े कुछ आरोपियों के बीच व्यक्तिगत विवाद के बाद जांच को महत्वपूर्ण सुराग मिले।
जांच के दौरान पुलिस ने दावा किया था कि जब्त डिजिटल उपकरणों से बड़ी संख्या में संपर्क और नेटवर्क संबंधी जानकारियां प्राप्त हुई थीं। हालांकि चार्जशीट में केवल नामजद आरोपियों के खिलाफ ही आरोप प्रस्तुत किए गए हैं और न्यायिक प्रक्रिया जारी है।
मामले में अब तक नाव्या मलिक, अयान परवेज, विधि अग्रवाल, ऋषिराज टंडन, सोहेल खान, जुनैद अख्तर, हर्ष आहूजा, मोनू विश्नोई और दीप धनोरिया सहित कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वर्तमान में सभी आरोपियों को अदालत से जमानत मिल चुकी है।
ईडी की जांच शुरू होने के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। आने वाले दिनों में एजेंसी की पड़ताल से यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित ड्रग्स नेटवर्क के वित्तीय पहलू कितने व्यापक थे और क्या मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े किसी अपराध के पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय समाचार, भारत समाचार अपडेट और ट्रेंडिंग न्यूज इंडिया में यह मामला कानून प्रवर्तन एजेंसियों की कार्रवाई और संगठित अपराध की जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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रायपुर ड्रग्स केस में ED की एंट्री, मनी ट्रेल और नेटवर्क की होगी जांच
Digital Desk
रायपुर के बहुचर्चित ड्रग्स मामले की जांच अब नए चरण में पहुंच गई है। कथित ड्रग्स नेटवर्क से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। एजेंसी का फोकस अब इस मामले से जुड़े वित्तीय लेन-देन, संभावित मनी लॉन्ड्रिंग और कथित अवैध कमाई के स्रोतों पर रहेगा। सूत्रों के मुताबिक, ईडी ने मामले की जांच कर रही पुलिस से चार्जशीट, केस डायरी और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों की प्रतियां मांगी हैं। इस घटनाक्रम के बाद मामले से जुड़े कई पहलुओं की दोबारा पड़ताल होने की संभावना जताई जा रही है।
पुलिस पहले ही इस मामले में चार्जशीट अदालत में पेश कर चुकी है और ट्रायल की प्रक्रिया जारी है। अब ईडी यह जांच करेगी कि कथित ड्रग्स कारोबार से जुड़े पैसों का प्रवाह किस प्रकार हुआ और क्या किसी प्रकार के अवैध वित्तीय नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया। अधिकारियों के अनुसार, जांच में बैंकिंग रिकॉर्ड, डिजिटल ट्रांजेक्शन और संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों का विश्लेषण किया जा सकता है।
यह मामला अगस्त 2025 में उस समय चर्चा में आया था, जब पुलिस ने एमडीएमए के साथ तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान सामने आई जानकारियों के आधार पर जांच आगे बढ़ी और बाद में मुंबई से नाव्या मलिक को गिरफ्तार किया गया। पुलिस जांच में दावा किया गया था कि वह कथित तौर पर ड्रग्स सप्लाई नेटवर्क से जुड़ी हुई थी। हालांकि मामले की सुनवाई अभी न्यायालय में लंबित है।
मनी ट्रेल पर फोकस
ईडी की जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना होगा कि कथित अवैध कारोबार से प्राप्त धन का उपयोग कहां और कैसे किया गया। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास करेगी कि क्या इस नेटवर्क में अन्य लोग या संस्थाएं आर्थिक रूप से लाभान्वित हुईं।
सूत्रों के मुताबिक, एजेंसी डिजिटल रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा और वित्तीय दस्तावेजों का अध्ययन कर सकती है। यदि जांच में नए तथ्य सामने आते हैं तो अन्य व्यक्तियों से भी पूछताछ की जा सकती है। हालांकि फिलहाल ईडी की ओर से किसी नए आरोपी या कार्रवाई को लेकर आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई है।
चार्जशीट के खुलासे
पुलिस द्वारा अदालत में प्रस्तुत चार्जशीट में कई महत्वपूर्ण दावों का उल्लेख किया गया है। दस्तावेजों के अनुसार, जांच के दौरान एक ऐसे व्यक्ति की भूमिका सामने आई थी, जिसने कथित तौर पर ड्रग्स की खेप से संबंधित जानकारी पुलिस तक पहुंचाई। चार्जशीट में यह भी उल्लेख किया गया है कि मामले से जुड़े कुछ आरोपियों के बीच व्यक्तिगत विवाद के बाद जांच को महत्वपूर्ण सुराग मिले।
जांच के दौरान पुलिस ने दावा किया था कि जब्त डिजिटल उपकरणों से बड़ी संख्या में संपर्क और नेटवर्क संबंधी जानकारियां प्राप्त हुई थीं। हालांकि चार्जशीट में केवल नामजद आरोपियों के खिलाफ ही आरोप प्रस्तुत किए गए हैं और न्यायिक प्रक्रिया जारी है।
मामले में अब तक नाव्या मलिक, अयान परवेज, विधि अग्रवाल, ऋषिराज टंडन, सोहेल खान, जुनैद अख्तर, हर्ष आहूजा, मोनू विश्नोई और दीप धनोरिया सहित कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वर्तमान में सभी आरोपियों को अदालत से जमानत मिल चुकी है।
ईडी की जांच शुरू होने के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। आने वाले दिनों में एजेंसी की पड़ताल से यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित ड्रग्स नेटवर्क के वित्तीय पहलू कितने व्यापक थे और क्या मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े किसी अपराध के पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय समाचार, भारत समाचार अपडेट और ट्रेंडिंग न्यूज इंडिया में यह मामला कानून प्रवर्तन एजेंसियों की कार्रवाई और संगठित अपराध की जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
