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रायपुर महापौर का सख्त संदेश, ठेकेदारों के साथ लापरवाह अफसरों पर भी होगी कार्रवाई
रायपुर,(छ.ग.)
छह घंटे चली समीक्षा बैठक में विकास कार्यों की धीमी प्रगति पर नाराजगी, करबला तालाब परियोजना की खामियों को लेकर अधिकारियों को लगाई फटकार
रायपुर नगर निगम की महापौर मीनल चौबे ने शहर में चल रहे विकास कार्यों की धीमी रफ्तार और परियोजनाओं में सामने आ रही खामियों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। निगम मुख्यालय में सोमवार को करीब छह घंटे तक चली समीक्षा बैठक में महापौर ने अधिकारियों और अभियंताओं को स्पष्ट संदेश दिया कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि किसी निर्माण कार्य में गड़बड़ी पाए जाने पर ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है तो उसकी निगरानी करने वाले अधिकारी और इंजीनियर भी जवाबदेही से बच नहीं सकते। बैठक के दौरान महापौर ने विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की। इस दौरान कई ऐसे मामले सामने आए जहां कार्यों में देरी, दस्तावेजी खामियां और निगरानी में लापरवाही की बात सामने आई। महापौर ने अधिकारियों से कहा कि विकास कार्य केवल कागजों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उनका लाभ समय पर आम लोगों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने अपर आयुक्त को निर्देश दिए कि जिन अधिकारियों की निगरानी में लापरवाही सामने आई है, उनकी जिम्मेदारी तय कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।
बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा करबला तालाब विकास योजना को लेकर हुई। समीक्षा के दौरान इस परियोजना से जुड़े कई दस्तावेजों और कार्यों में अनियमितताओं की जानकारी सामने आई। बताया गया कि मेजरमेंट बुक (एमबी) में कुछ त्रुटियां पाई गई हैं, जिसके बाद महापौर ने संबंधित अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि किसी भी विकास परियोजना में रिकॉर्ड और दस्तावेजों की शुद्धता बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि कागजी कार्यवाही में ही गड़बड़ी होगी तो परियोजना की गुणवत्ता और पारदर्शिता दोनों प्रभावित होंगी। महापौर ने स्पष्ट कहा कि विकास कार्यों से जुड़े दस्तावेजों में त्रुटियां और निर्माण कार्यों में लापरवाही किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि जनता के पैसे से होने वाले कार्यों में जवाबदेही सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। ऐसे मामलों में केवल ठेकेदारों पर कार्रवाई कर जिम्मेदारी पूरी नहीं मानी जा सकती, बल्कि निगरानी करने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
समीक्षा बैठक के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि कई विकास कार्यों के लिए कार्यादेश जारी किए जा चुके हैं, लेकिन जमीन पर उनका काम शुरू नहीं हो पाया है। इस पर महापौर ने नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं को स्वीकृति मिलने के बाद उनका समय पर क्रियान्वयन होना चाहिए। यदि काम शुरू होने में अनावश्यक देरी हो रही है तो इसके कारणों की जानकारी सार्वजनिक रूप से दर्ज की जानी चाहिए। महापौर ने कहा कि रायपुर तेजी से विकसित हो रहा शहर है और यहां की बढ़ती आबादी को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना नगर निगम की जिम्मेदारी है। ऐसे में विकास कार्यों में देरी का सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी लंबित परियोजनाओं की सूची तैयार की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रत्येक परियोजना की वर्तमान स्थिति का स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध हो।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि लंबे समय से लंबित परियोजनाओं की अलग से समीक्षा की जाएगी। जिन मामलों में लापरवाही या अनावश्यक देरी पाई जाएगी, वहां जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है। महापौर ने कहा कि विकास कार्यों की गुणवत्ता और समयसीमा दोनों पर विशेष ध्यान देना होगा, क्योंकि जनता परिणाम देखना चाहती है। समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना, 15वें वित्त आयोग की योजनाएं, प्रधानमंत्री आवास योजना, सांसद निधि, विधायक निधि, महापौर निधि, पार्षद निधि और सामान्य निधि से संचालित विभिन्न विकास कार्यों की भी जोनवार समीक्षा की गई। अधिकारियों ने विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिस पर महापौर ने कई बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा। उन्होंने कहा कि योजनाओं का उद्देश्य केवल बजट खर्च करना नहीं बल्कि नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
बैठक में मौजूद अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि प्रत्येक जोन में चल रहे कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता मानकों का पालन हो। महापौर ने कहा कि कई बार परियोजनाएं समय पर पूरी तो हो जाती हैं, लेकिन गुणवत्ता में कमी के कारण कुछ ही समय बाद समस्याएं सामने आने लगती हैं। इसलिए गुणवत्ता और समयसीमा दोनों को समान महत्व दिया जाना चाहिए। करीब छह घंटे तक चली इस समीक्षा बैठक में अपर आयुक्त लोकेश्वर साहू, विनोद पाण्डेय, कृष्णा खटीक, मुख्य अभियंता संजय बागड़े, अधीक्षण अभियंता राजेश राठौर, इमरान खान, सभी जोन कमिश्नर, कार्यपालन अभियंता, सहायक अभियंता, उप अभियंता और विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े ठेकेदार मौजूद रहे। बैठक के अंत में महापौर ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि आने वाले समय में विकास कार्यों की नियमित समीक्षा जारी रहेगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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रायपुर महापौर का सख्त संदेश, ठेकेदारों के साथ लापरवाह अफसरों पर भी होगी कार्रवाई
रायपुर,(छ.ग.)
रायपुर नगर निगम की महापौर मीनल चौबे ने शहर में चल रहे विकास कार्यों की धीमी रफ्तार और परियोजनाओं में सामने आ रही खामियों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। निगम मुख्यालय में सोमवार को करीब छह घंटे तक चली समीक्षा बैठक में महापौर ने अधिकारियों और अभियंताओं को स्पष्ट संदेश दिया कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि किसी निर्माण कार्य में गड़बड़ी पाए जाने पर ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है तो उसकी निगरानी करने वाले अधिकारी और इंजीनियर भी जवाबदेही से बच नहीं सकते। बैठक के दौरान महापौर ने विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की। इस दौरान कई ऐसे मामले सामने आए जहां कार्यों में देरी, दस्तावेजी खामियां और निगरानी में लापरवाही की बात सामने आई। महापौर ने अधिकारियों से कहा कि विकास कार्य केवल कागजों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उनका लाभ समय पर आम लोगों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने अपर आयुक्त को निर्देश दिए कि जिन अधिकारियों की निगरानी में लापरवाही सामने आई है, उनकी जिम्मेदारी तय कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।
बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा करबला तालाब विकास योजना को लेकर हुई। समीक्षा के दौरान इस परियोजना से जुड़े कई दस्तावेजों और कार्यों में अनियमितताओं की जानकारी सामने आई। बताया गया कि मेजरमेंट बुक (एमबी) में कुछ त्रुटियां पाई गई हैं, जिसके बाद महापौर ने संबंधित अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि किसी भी विकास परियोजना में रिकॉर्ड और दस्तावेजों की शुद्धता बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि कागजी कार्यवाही में ही गड़बड़ी होगी तो परियोजना की गुणवत्ता और पारदर्शिता दोनों प्रभावित होंगी। महापौर ने स्पष्ट कहा कि विकास कार्यों से जुड़े दस्तावेजों में त्रुटियां और निर्माण कार्यों में लापरवाही किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि जनता के पैसे से होने वाले कार्यों में जवाबदेही सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। ऐसे मामलों में केवल ठेकेदारों पर कार्रवाई कर जिम्मेदारी पूरी नहीं मानी जा सकती, बल्कि निगरानी करने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
समीक्षा बैठक के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि कई विकास कार्यों के लिए कार्यादेश जारी किए जा चुके हैं, लेकिन जमीन पर उनका काम शुरू नहीं हो पाया है। इस पर महापौर ने नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं को स्वीकृति मिलने के बाद उनका समय पर क्रियान्वयन होना चाहिए। यदि काम शुरू होने में अनावश्यक देरी हो रही है तो इसके कारणों की जानकारी सार्वजनिक रूप से दर्ज की जानी चाहिए। महापौर ने कहा कि रायपुर तेजी से विकसित हो रहा शहर है और यहां की बढ़ती आबादी को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना नगर निगम की जिम्मेदारी है। ऐसे में विकास कार्यों में देरी का सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी लंबित परियोजनाओं की सूची तैयार की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रत्येक परियोजना की वर्तमान स्थिति का स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध हो।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि लंबे समय से लंबित परियोजनाओं की अलग से समीक्षा की जाएगी। जिन मामलों में लापरवाही या अनावश्यक देरी पाई जाएगी, वहां जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है। महापौर ने कहा कि विकास कार्यों की गुणवत्ता और समयसीमा दोनों पर विशेष ध्यान देना होगा, क्योंकि जनता परिणाम देखना चाहती है। समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना, 15वें वित्त आयोग की योजनाएं, प्रधानमंत्री आवास योजना, सांसद निधि, विधायक निधि, महापौर निधि, पार्षद निधि और सामान्य निधि से संचालित विभिन्न विकास कार्यों की भी जोनवार समीक्षा की गई। अधिकारियों ने विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिस पर महापौर ने कई बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा। उन्होंने कहा कि योजनाओं का उद्देश्य केवल बजट खर्च करना नहीं बल्कि नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
बैठक में मौजूद अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि प्रत्येक जोन में चल रहे कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता मानकों का पालन हो। महापौर ने कहा कि कई बार परियोजनाएं समय पर पूरी तो हो जाती हैं, लेकिन गुणवत्ता में कमी के कारण कुछ ही समय बाद समस्याएं सामने आने लगती हैं। इसलिए गुणवत्ता और समयसीमा दोनों को समान महत्व दिया जाना चाहिए। करीब छह घंटे तक चली इस समीक्षा बैठक में अपर आयुक्त लोकेश्वर साहू, विनोद पाण्डेय, कृष्णा खटीक, मुख्य अभियंता संजय बागड़े, अधीक्षण अभियंता राजेश राठौर, इमरान खान, सभी जोन कमिश्नर, कार्यपालन अभियंता, सहायक अभियंता, उप अभियंता और विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े ठेकेदार मौजूद रहे। बैठक के अंत में महापौर ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि आने वाले समय में विकास कार्यों की नियमित समीक्षा जारी रहेगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
