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रायपुर में रेड, 40 हजार स्टिकर जब्त; हर महीने 24 लाख की अवैध शराब बिक्री का खुलासा
Raipur, cg
छत्तीसगढ़ में आबकारी घोटाले के बड़े चेहरे अनवर ढेबर, पूर्व मंत्री कवासी लखमा और रिटायर्ड आईएएस अफसर अनिल टुटेजा जेल में हैं, लेकिन उनके गिरोह जैसा ही नेटवर्क एक बार फिर सामने आया है।
रायपुर में आबकारी विभाग की छापेमारी में नकली होलोग्राम और शराब के लेबल-ढक्कनों का जखीरा बरामद हुआ है। टीम ने बीरगांव स्थित एक ढाबा और प्रिंटिंग शॉप से करीब 40 हजार नकली स्टिकर, सैकड़ों लेबल और बोतलों के ढक्कन बरामद किए हैं।
ठेका कर्मियों की मिलीभगत, दो आरोपी गिरफ्तार
जांच में खुलासा हुआ है कि पहले आबकारी विभाग में काम कर चुके ठेका कर्मियों ने ही अनवर-टुटेजा सिंडिकेट की तर्ज पर यह गिरोह खड़ा किया। इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि कुछ आरोपी फरार हो गए हैं। बताया जा रहा है कि यह नेटवर्क हर महीने करीब 24 लाख रुपए की अवैध शराब बिक्री कर विभाग को नुकसान पहुंचा रहा था।
ढाबे से मिले नकली स्टिकर और शराब सामग्री
20 अप्रैल की शाम जिला आबकारी उपायुक्त रामकृष्ण मिश्रा को नकली होलोग्राम के जरिए अवैध शराब बिक्री की सूचना मिली। टीम ने फौरन बीरगांव स्थित BH ढाबे पर छापा मारा, जहां संकटमोचन नामक व्यक्ति से एक थैला बरामद किया गया। इसमें 1460 नकली होलोग्राम, 1100 देसी शराब के लेबल और 105 ढक्कन पाए गए।
मुख्य सरगना संदीप, सिंडिकेट से जुड़ा रंजीत फरार
पूछताछ में संकटमोचन ने बताया कि वह पहले शराब भट्ठी में काम कर चुका है और वहां उसकी मुलाकात संदीप नाम के व्यक्ति से हुई थी। संदीप ने ही उसे नकली होलोग्राम सप्लाई का काम सौंपा था। संकटमोचन ने रायपुर के प्रिंटिंग शॉप मालिक गणेश चौरसिया से संपर्क कर स्टिकर छपवाने शुरू कर दिए।
प्रिंटिंग शॉप से मिले 40 हजार स्टिकर, रंजीत का नाम आया सामने
छापेमारी के दौरान टीम ने गणेश की प्रिंटिंग शॉप से 371 शीट बरामद कीं। एक शीट में 110-120 स्टिकर थे, जिससे कुल 40 हजार से ज्यादा नकली स्टिकर मिले। गणेश ने पूछताछ में बताया कि ये ऑर्डर रंजीत गुप्ता नामक व्यक्ति ने दिया था, जो रेड की सूचना मिलते ही फरार हो गया।
महीनों से चल रहा था खेल, कई दुकानों से होती थी प्रिंटिंग
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि रंजीत, संकटमोचन और गणेश — तीनों अलग-अलग माध्यमों से जुड़े थे, लेकिन मुख्य संचालक के रूप में गणेश ही होलोग्राम प्रिंटिंग का जिम्मेदार था। वह अलग-अलग प्रिंटिंग शॉप से ऑर्डर छपवाकर स्टिकर रंजीत तक पहुंचाता था। मोमिन पारा स्थित एक अन्य प्रिंटर ने भी बताया कि गणेश ने उससे 8 हजार स्टिकर छपवाए थे।
एक महीने में 70 हजार होलोग्राम का ऑर्डर
गणेश ने स्वीकार किया कि एक महीने में वह 70 हजार नकली स्टिकर का ऑर्डर प्रिंट कर चुका था। इनमें से 30 हजार की डिलीवरी वह पहले ही कर चुका था, जबकि 40 हजार की डिलीवरी 20 अप्रैल को प्रस्तावित थी। यह पूरा नेटवर्क सीरियल नंबर और होलोग्राम टेम्पलेट का उपयोग कर नकली स्टिकर को असली जैसा बना देता था।
प्रशासन सख्त, जांच का दायरा बढ़ाया गया
इस खुलासे के बाद आबकारी विभाग ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। कई प्रिंटिंग प्रेस और बिचौलियों पर नजर रखी जा रही है। विभाग को शक है कि यह नेटवर्क और भी जिलों में फैला हुआ है।
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रायपुर में रेड, 40 हजार स्टिकर जब्त; हर महीने 24 लाख की अवैध शराब बिक्री का खुलासा
Raipur, cg
रायपुर में आबकारी विभाग की छापेमारी में नकली होलोग्राम और शराब के लेबल-ढक्कनों का जखीरा बरामद हुआ है। टीम ने बीरगांव स्थित एक ढाबा और प्रिंटिंग शॉप से करीब 40 हजार नकली स्टिकर, सैकड़ों लेबल और बोतलों के ढक्कन बरामद किए हैं।
ठेका कर्मियों की मिलीभगत, दो आरोपी गिरफ्तार
जांच में खुलासा हुआ है कि पहले आबकारी विभाग में काम कर चुके ठेका कर्मियों ने ही अनवर-टुटेजा सिंडिकेट की तर्ज पर यह गिरोह खड़ा किया। इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि कुछ आरोपी फरार हो गए हैं। बताया जा रहा है कि यह नेटवर्क हर महीने करीब 24 लाख रुपए की अवैध शराब बिक्री कर विभाग को नुकसान पहुंचा रहा था।
ढाबे से मिले नकली स्टिकर और शराब सामग्री
20 अप्रैल की शाम जिला आबकारी उपायुक्त रामकृष्ण मिश्रा को नकली होलोग्राम के जरिए अवैध शराब बिक्री की सूचना मिली। टीम ने फौरन बीरगांव स्थित BH ढाबे पर छापा मारा, जहां संकटमोचन नामक व्यक्ति से एक थैला बरामद किया गया। इसमें 1460 नकली होलोग्राम, 1100 देसी शराब के लेबल और 105 ढक्कन पाए गए।
मुख्य सरगना संदीप, सिंडिकेट से जुड़ा रंजीत फरार
पूछताछ में संकटमोचन ने बताया कि वह पहले शराब भट्ठी में काम कर चुका है और वहां उसकी मुलाकात संदीप नाम के व्यक्ति से हुई थी। संदीप ने ही उसे नकली होलोग्राम सप्लाई का काम सौंपा था। संकटमोचन ने रायपुर के प्रिंटिंग शॉप मालिक गणेश चौरसिया से संपर्क कर स्टिकर छपवाने शुरू कर दिए।
प्रिंटिंग शॉप से मिले 40 हजार स्टिकर, रंजीत का नाम आया सामने
छापेमारी के दौरान टीम ने गणेश की प्रिंटिंग शॉप से 371 शीट बरामद कीं। एक शीट में 110-120 स्टिकर थे, जिससे कुल 40 हजार से ज्यादा नकली स्टिकर मिले। गणेश ने पूछताछ में बताया कि ये ऑर्डर रंजीत गुप्ता नामक व्यक्ति ने दिया था, जो रेड की सूचना मिलते ही फरार हो गया।
महीनों से चल रहा था खेल, कई दुकानों से होती थी प्रिंटिंग
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि रंजीत, संकटमोचन और गणेश — तीनों अलग-अलग माध्यमों से जुड़े थे, लेकिन मुख्य संचालक के रूप में गणेश ही होलोग्राम प्रिंटिंग का जिम्मेदार था। वह अलग-अलग प्रिंटिंग शॉप से ऑर्डर छपवाकर स्टिकर रंजीत तक पहुंचाता था। मोमिन पारा स्थित एक अन्य प्रिंटर ने भी बताया कि गणेश ने उससे 8 हजार स्टिकर छपवाए थे।
एक महीने में 70 हजार होलोग्राम का ऑर्डर
गणेश ने स्वीकार किया कि एक महीने में वह 70 हजार नकली स्टिकर का ऑर्डर प्रिंट कर चुका था। इनमें से 30 हजार की डिलीवरी वह पहले ही कर चुका था, जबकि 40 हजार की डिलीवरी 20 अप्रैल को प्रस्तावित थी। यह पूरा नेटवर्क सीरियल नंबर और होलोग्राम टेम्पलेट का उपयोग कर नकली स्टिकर को असली जैसा बना देता था।
प्रशासन सख्त, जांच का दायरा बढ़ाया गया
इस खुलासे के बाद आबकारी विभाग ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। कई प्रिंटिंग प्रेस और बिचौलियों पर नजर रखी जा रही है। विभाग को शक है कि यह नेटवर्क और भी जिलों में फैला हुआ है।
