- Hindi News
- राज्य
- छत्तीसगढ़
- रायपुर-दिल्ली इंडिगो फ्लाइट टर्बुलेंस में फंसी, 80 किमी/घंटा की तेज आंधी में कई चक्कर लगाने के बाद स...
रायपुर-दिल्ली इंडिगो फ्लाइट टर्बुलेंस में फंसी, 80 किमी/घंटा की तेज आंधी में कई चक्कर लगाने के बाद सुरक्षित लैंडिंग
Raipur, CG
छत्तीसगढ़ के रायपुर से दिल्ली आ रही इंडिगो की फ्लाइट 6E 6313 रविवार को दिल्ली-NCR में आई धूलभरी तेज आंधी के कारण टर्बुलेंस में फंस गई। लैंडिंग से पहले पायलट को फ्लाइट को दोबारा हवा में उड़ाना पड़ा और कई चक्कर लगाने के बाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल से क्लियरेंस मिलने पर ही फ्लाइट ने सुरक्षित लैंडिंग की।
फ्लाइट में मौजूद यात्रियों ने इस दौरान काफी डर का अनुभव किया। पायलट ने यात्रियों को बताया कि दिल्ली-NCR में लगभग 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चल रही थी, जिससे फ्लाइट को नियंत्रण बनाए रखना मुश्किल हो गया था। इस दौरान फ्लाइट में कई झटके भी महसूस किए गए।
फ्लाइट में सवार यात्रियों ने रिकॉर्ड किया वीडियो
टर्बुलेंस के दौरान फ्लाइट के अंदर मौजूद यात्रियों ने वीडियो बनाया, जिसमें हवा में फ्लाइट के चक्कर लगाते हुए स्पष्ट देखा जा सकता है। वीडियो में यात्री भयभीत दिखे। एयरलाइन ने भी स्थिति की जानकारी देते हुए कहा कि मौसम की खराबी के कारण फ्लाइट को दोबारा हवा में उड़ाना पड़ा।
इंडिगो की पिछली टर्बुलेंस वाली फ्लाइट का भी था मामला
इंडिगो की एक अन्य फ्लाइट (दिल्ली से श्रीनगर) भी 21 मई को खराब मौसम में टर्बुलेंस की चपेट में आई थी। उस दौरान विमान में तेज झटके लगे थे और यात्रियों में डर फैल गया था। पायलट ने इमरजेंसी लैंडिंग कराई थी, जिसमें फ्लाइट का नोज कोन (आगे का हिस्सा) टूट गया था। हालांकि, यात्रियों को कोई चोट नहीं आई थी।
टर्बुलेंस क्या होता है?
टर्बुलेंस का मतलब विमान के उड़ान मार्ग में हवा के अनियमित बहाव से होता है, जिससे विमान अचानक हिलने लगता है। यह स्थिति हल्की या गंभीर हो सकती है।
-
हल्का टर्बुलेंस: जहाज 1 मीटर तक ऊपर-नीचे होता है, यात्रियों को अनुभव नहीं होता।
-
मध्यम टर्बुलेंस: जहाज 3-6 मीटर तक हिलता है, जिससे ड्रिंक गिर सकता है।
-
गंभीर टर्बुलेंस: जहाज 30 मीटर तक ऊपर-नीचे होता है, सीट बेल्ट न लगाई हो तो यात्री गिर सकते हैं।
क्या टर्बुलेंस से प्लेन क्रैश हो सकता है?
आधुनिक विमान और पायलट की ट्रेनिंग की वजह से टर्बुलेंस से क्रैश की संभावना बहुत कम है, लेकिन अतीत में कुछ हादसे टर्बुलेंस के कारण हुए हैं। इसके बावजूद विमान को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि वे टर्बुलेंस सहन कर सकें।
-----------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए
रायपुर-दिल्ली इंडिगो फ्लाइट टर्बुलेंस में फंसी, 80 किमी/घंटा की तेज आंधी में कई चक्कर लगाने के बाद सुरक्षित लैंडिंग
Raipur, CG
फ्लाइट में मौजूद यात्रियों ने इस दौरान काफी डर का अनुभव किया। पायलट ने यात्रियों को बताया कि दिल्ली-NCR में लगभग 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चल रही थी, जिससे फ्लाइट को नियंत्रण बनाए रखना मुश्किल हो गया था। इस दौरान फ्लाइट में कई झटके भी महसूस किए गए।
फ्लाइट में सवार यात्रियों ने रिकॉर्ड किया वीडियो
टर्बुलेंस के दौरान फ्लाइट के अंदर मौजूद यात्रियों ने वीडियो बनाया, जिसमें हवा में फ्लाइट के चक्कर लगाते हुए स्पष्ट देखा जा सकता है। वीडियो में यात्री भयभीत दिखे। एयरलाइन ने भी स्थिति की जानकारी देते हुए कहा कि मौसम की खराबी के कारण फ्लाइट को दोबारा हवा में उड़ाना पड़ा।
इंडिगो की पिछली टर्बुलेंस वाली फ्लाइट का भी था मामला
इंडिगो की एक अन्य फ्लाइट (दिल्ली से श्रीनगर) भी 21 मई को खराब मौसम में टर्बुलेंस की चपेट में आई थी। उस दौरान विमान में तेज झटके लगे थे और यात्रियों में डर फैल गया था। पायलट ने इमरजेंसी लैंडिंग कराई थी, जिसमें फ्लाइट का नोज कोन (आगे का हिस्सा) टूट गया था। हालांकि, यात्रियों को कोई चोट नहीं आई थी।
टर्बुलेंस क्या होता है?
टर्बुलेंस का मतलब विमान के उड़ान मार्ग में हवा के अनियमित बहाव से होता है, जिससे विमान अचानक हिलने लगता है। यह स्थिति हल्की या गंभीर हो सकती है।
-
हल्का टर्बुलेंस: जहाज 1 मीटर तक ऊपर-नीचे होता है, यात्रियों को अनुभव नहीं होता।
-
मध्यम टर्बुलेंस: जहाज 3-6 मीटर तक हिलता है, जिससे ड्रिंक गिर सकता है।
-
गंभीर टर्बुलेंस: जहाज 30 मीटर तक ऊपर-नीचे होता है, सीट बेल्ट न लगाई हो तो यात्री गिर सकते हैं।
क्या टर्बुलेंस से प्लेन क्रैश हो सकता है?
आधुनिक विमान और पायलट की ट्रेनिंग की वजह से टर्बुलेंस से क्रैश की संभावना बहुत कम है, लेकिन अतीत में कुछ हादसे टर्बुलेंस के कारण हुए हैं। इसके बावजूद विमान को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि वे टर्बुलेंस सहन कर सकें।
