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कर्रेगुट्टा के जंगल में सुरक्षाबलों को मिली नक्सलियों की काली गुफा
Raipur, cg
नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षाबलों को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। कर्रेगुट्टा के घने जंगलों में जवानों ने एक काली, गहरी और विशाल गुफा का पता लगाया है, जिसे नक्सली अपने सुरक्षित अड्डे के रूप में इस्तेमाल कर रहे थे। सूत्रों के अनुसार, यह गुफा इतनी विशाल है कि इसमें करीब 1000 नक्सली एक साथ रह सकते हैं।
गौरतलब है कि इस इलाके में पिछले पांच दिनों से नक्सलियों के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। भीषण गर्मी और 45 डिग्री तापमान के बावजूद सुरक्षाबल पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में लगातार मोर्चा संभाले हुए हैं। शनिवार शाम को ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबलों ने इस गुफा को खोज निकाला, जिसमें पानी के स्रोत और आराम की सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।
जानकारी के अनुसार, इस गुफा में नक्सलियों के टॉप कमांडर हिड़मा और देवा जैसे बड़े नेता अपने दस्ते के साथ लंबे समय से डेरा डाले हुए थे। यह ठिकाना नक्सलियों के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां से वे अपने अभियानों की योजना बनाते थे।
भूख-प्यास से हो सकती है नक्सलियों की हार
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में नक्सलियों की स्थिति बेहद कठिन हो गई है। अगर वे लंबे समय तक पहाड़ियों पर ही फंसे रहे तो भोजन और पानी की कमी से उनका हाल बेहाल हो सकता है। ऐसे में उनके सामने दो ही विकल्प बचते हैं — या तो आत्मसमर्पण करें या फिर अंतिम लड़ाई लड़ें।
अधिकारियों ने बताया कि गुफा की तलाशी अभियान के दौरान कई महत्वपूर्ण सुराग भी हाथ लगे हैं, जिनके आधार पर आगे की रणनीति बनाई जा रही है।
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कर्रेगुट्टा के जंगल में सुरक्षाबलों को मिली नक्सलियों की काली गुफा
Raipur, cg
गौरतलब है कि इस इलाके में पिछले पांच दिनों से नक्सलियों के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। भीषण गर्मी और 45 डिग्री तापमान के बावजूद सुरक्षाबल पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में लगातार मोर्चा संभाले हुए हैं। शनिवार शाम को ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबलों ने इस गुफा को खोज निकाला, जिसमें पानी के स्रोत और आराम की सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।
जानकारी के अनुसार, इस गुफा में नक्सलियों के टॉप कमांडर हिड़मा और देवा जैसे बड़े नेता अपने दस्ते के साथ लंबे समय से डेरा डाले हुए थे। यह ठिकाना नक्सलियों के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां से वे अपने अभियानों की योजना बनाते थे।
भूख-प्यास से हो सकती है नक्सलियों की हार
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में नक्सलियों की स्थिति बेहद कठिन हो गई है। अगर वे लंबे समय तक पहाड़ियों पर ही फंसे रहे तो भोजन और पानी की कमी से उनका हाल बेहाल हो सकता है। ऐसे में उनके सामने दो ही विकल्प बचते हैं — या तो आत्मसमर्पण करें या फिर अंतिम लड़ाई लड़ें।
अधिकारियों ने बताया कि गुफा की तलाशी अभियान के दौरान कई महत्वपूर्ण सुराग भी हाथ लगे हैं, जिनके आधार पर आगे की रणनीति बनाई जा रही है।
