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CMPDI के निजीकरण और श्रम कानूनों के विरोध में कोरबा की कोयला खदानों में हड़ताल
Korba, CG
कोरबा जिले की दीपका, गेवरा और कुसमुंडा कोयला खदानों में आज श्रमिक संगठनों ने एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल की।
यह हड़ताल केंद्र सरकार की नई श्रम नीतियों, CMPDI (सेंट्रल माइंस प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टिट्यूट) के निजीकरण और IPO की प्रक्रिया के विरोध में बुलाई गई है। हड़ताल के चलते पहली पाली से ही खदानों में उत्पादन कार्य प्रभावित रहा।
CMPDI के निजीकरण पर आक्रोश, श्रमिकों ने जताया विरोध
एटक (AITUC), इंटक (INTUC), सीटू (CITU), HMS और BMS सहित अन्य ट्रेड यूनियनों और छोटे श्रमिक संगठनों ने इस हड़ताल में भाग लिया। SECL के सुरक्षा गार्डों और पुलिस बल की तैनाती के बावजूद कार्यकर्ताओं ने खदानों के बाहर सुबह से प्रदर्शन शुरू कर दिया।
जय मुखर्जी (AITUC) और प्रमोद बनर्जी (INTUC) ने कहा कि सरकार लगातार मजदूरों के अधिकारों को कमजोर कर रही है। CMPDI को निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया का कड़ा विरोध जताया गया है।
29 पुराने श्रम कानूनों को हटाने पर ऐतराज
एचएमएस के अध्यक्ष चंद कुमार बंजारे ने कहा कि सरकार ने 29 पुराने श्रम कानूनों को खत्म कर चार नए कोड लागू किए हैं, जो श्रमिक हितों के खिलाफ हैं। सीटू नेता धीरज ने कहा कि यह कोड मजदूरों के हड़ताल, यूनियन बनाने और न्यूनतम वेतन जैसे अधिकारों को सीमित करता है।
सांकेतिक हड़ताल के जरिए केंद्र को चेतावनी
सभी प्रमुख संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यह सिर्फ एक दिन की सांकेतिक हड़ताल है, लेकिन यदि सरकार ने अपनी नीतियों में बदलाव नहीं किया, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। कार्यकर्ता गांव-गांव, घर-घर जाकर मजदूरों को नए श्रम कानूनों के प्रभाव के बारे में जागरूक कर रहे हैं।
स्थानीय मजदूरों और निजी कर्मचारियों का भी समर्थन
खदानों में काम कर रहे निजी ठेका कंपनियों के कर्मचारी भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। इससे कोल परिवहन, उत्पादन और सफाई सहित सभी गतिविधियों पर असर पड़ा है।
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CMPDI के निजीकरण और श्रम कानूनों के विरोध में कोरबा की कोयला खदानों में हड़ताल
Korba, CG
यह हड़ताल केंद्र सरकार की नई श्रम नीतियों, CMPDI (सेंट्रल माइंस प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टिट्यूट) के निजीकरण और IPO की प्रक्रिया के विरोध में बुलाई गई है। हड़ताल के चलते पहली पाली से ही खदानों में उत्पादन कार्य प्रभावित रहा।
CMPDI के निजीकरण पर आक्रोश, श्रमिकों ने जताया विरोध
एटक (AITUC), इंटक (INTUC), सीटू (CITU), HMS और BMS सहित अन्य ट्रेड यूनियनों और छोटे श्रमिक संगठनों ने इस हड़ताल में भाग लिया। SECL के सुरक्षा गार्डों और पुलिस बल की तैनाती के बावजूद कार्यकर्ताओं ने खदानों के बाहर सुबह से प्रदर्शन शुरू कर दिया।
जय मुखर्जी (AITUC) और प्रमोद बनर्जी (INTUC) ने कहा कि सरकार लगातार मजदूरों के अधिकारों को कमजोर कर रही है। CMPDI को निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया का कड़ा विरोध जताया गया है।
29 पुराने श्रम कानूनों को हटाने पर ऐतराज
एचएमएस के अध्यक्ष चंद कुमार बंजारे ने कहा कि सरकार ने 29 पुराने श्रम कानूनों को खत्म कर चार नए कोड लागू किए हैं, जो श्रमिक हितों के खिलाफ हैं। सीटू नेता धीरज ने कहा कि यह कोड मजदूरों के हड़ताल, यूनियन बनाने और न्यूनतम वेतन जैसे अधिकारों को सीमित करता है।
सांकेतिक हड़ताल के जरिए केंद्र को चेतावनी
सभी प्रमुख संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यह सिर्फ एक दिन की सांकेतिक हड़ताल है, लेकिन यदि सरकार ने अपनी नीतियों में बदलाव नहीं किया, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। कार्यकर्ता गांव-गांव, घर-घर जाकर मजदूरों को नए श्रम कानूनों के प्रभाव के बारे में जागरूक कर रहे हैं।
स्थानीय मजदूरों और निजी कर्मचारियों का भी समर्थन
खदानों में काम कर रहे निजी ठेका कंपनियों के कर्मचारी भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। इससे कोल परिवहन, उत्पादन और सफाई सहित सभी गतिविधियों पर असर पड़ा है।
