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बारूदी सुरंग में विस्फोट से तीन पुलिसकर्मी शहीद, कई घायल, माओवादियों ने दिया अंजाम
Bijapur
तेलंगाना के मुलुगु जिले के वेंकटपुरम में आज एक बड़ी नक्सली वारदात सामने आई। यहां माओवादियों द्वारा लगाए गए एक बारूदी सुरंग में विस्फोट से तीन पुलिसकर्मी शहीद हो गए और कई अन्य घायल हो गए। यह घटना पुलिस की तलाशी अभियान के दौरान हुई, जब माओवादियों ने घात लगाकर पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया।
यह विस्फोट तेलंगाना-छत्तीसगढ़ सीमा पर चलाए जा रहे ऑपरेशन कगार के दौरान हुआ है। इस ऑपरेशन का उद्देश्य नक्सलियों को उनके आखिरी गढ़ से खदेड़ना और इलाके में सुरक्षा स्थापित करना है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, माओवादियों द्वारा यह हमला सुरक्षाबलों के अभियान को विफल करने के लिए किया गया।
चरणबद्ध तरीके से चल रहा ऑपरेशन कगार
इस ऑपरेशन की अहमियत इस तथ्य से भी साफ हो जाती है कि इसे केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के डायरेक्टर जनरल ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह, छत्तीसगढ़ के एडीजी नक्सल ऑपरेशन विवेकानंद सिन्हा, सीआरपीएफ के आईजी राकेश अग्रवाल, और बस्तर के आईजी पी. सुंदरराज द्वारा बारीकी से मॉनिटर किया जा रहा है।
सीआरपीएफ और अन्य सुरक्षाबल, जैसे डीआरजी और एसटीएफ़, लगातार नक्सलियों के खिलाफ मुंहतोड़ जवाब दे रहे हैं, लेकिन इस तरह की घटनाएं साबित करती हैं कि नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन आसान नहीं है।
सुरक्षाबलों की मुस्तैदी
अभी तक सुरक्षाबल नक्सलियों को छत्तीसगढ़, तेलंगाना और आंध्रप्रदेश की सीमा पर कई क्षेत्रों में घेरने में सफल रहे हैं। नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे इस अभियान में बस्तर और अन्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के जाबांज जवान अपनी जान की परवाह किए बिना जंग लड़ रहे हैं।
जिले में बढ़ते हमलों के बीच सुरक्षाबलों की तरफ से यह अभियान नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति और सुरक्षा स्थापित करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नक्सली गतिविधियों में तेजी
इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि नक्सली ताकतें अपनी गतिविधियों में कोई कमी नहीं ला रही हैं। सुरक्षाबलों के इस ऑपरेशन के बावजूद, माओवादियों ने न सिर्फ अपनी ताकत दिखाई, बल्कि अपने खूनी इरादों को भी स्पष्ट किया।
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बारूदी सुरंग में विस्फोट से तीन पुलिसकर्मी शहीद, कई घायल, माओवादियों ने दिया अंजाम
Bijapur
यह विस्फोट तेलंगाना-छत्तीसगढ़ सीमा पर चलाए जा रहे ऑपरेशन कगार के दौरान हुआ है। इस ऑपरेशन का उद्देश्य नक्सलियों को उनके आखिरी गढ़ से खदेड़ना और इलाके में सुरक्षा स्थापित करना है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, माओवादियों द्वारा यह हमला सुरक्षाबलों के अभियान को विफल करने के लिए किया गया।
चरणबद्ध तरीके से चल रहा ऑपरेशन कगार
इस ऑपरेशन की अहमियत इस तथ्य से भी साफ हो जाती है कि इसे केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के डायरेक्टर जनरल ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह, छत्तीसगढ़ के एडीजी नक्सल ऑपरेशन विवेकानंद सिन्हा, सीआरपीएफ के आईजी राकेश अग्रवाल, और बस्तर के आईजी पी. सुंदरराज द्वारा बारीकी से मॉनिटर किया जा रहा है।
सीआरपीएफ और अन्य सुरक्षाबल, जैसे डीआरजी और एसटीएफ़, लगातार नक्सलियों के खिलाफ मुंहतोड़ जवाब दे रहे हैं, लेकिन इस तरह की घटनाएं साबित करती हैं कि नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन आसान नहीं है।
सुरक्षाबलों की मुस्तैदी
अभी तक सुरक्षाबल नक्सलियों को छत्तीसगढ़, तेलंगाना और आंध्रप्रदेश की सीमा पर कई क्षेत्रों में घेरने में सफल रहे हैं। नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे इस अभियान में बस्तर और अन्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के जाबांज जवान अपनी जान की परवाह किए बिना जंग लड़ रहे हैं।
जिले में बढ़ते हमलों के बीच सुरक्षाबलों की तरफ से यह अभियान नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति और सुरक्षा स्थापित करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नक्सली गतिविधियों में तेजी
इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि नक्सली ताकतें अपनी गतिविधियों में कोई कमी नहीं ला रही हैं। सुरक्षाबलों के इस ऑपरेशन के बावजूद, माओवादियों ने न सिर्फ अपनी ताकत दिखाई, बल्कि अपने खूनी इरादों को भी स्पष्ट किया।
