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"दैनिक जागरण" को देश की बुलंद आवाज बनाने वाले "गुरुदेव गुप्त" जी की आज 106वीं जयंती
JAGRAN DESK
दैनिक जागरण अखबार को देश का नंबर 1 अखबार बनाने वाले दैनिक जागरण समाचार पत्र समूह के संस्थापक स्वर्गीय गुरूदेव गुप्त जी की आज 106 वीं जयंती है। उनकी जयंती के अवसर पर आज उन्हें देश के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र की हस्तियों ने याद किया है।
दैनिक जागरण के इतने लम्बे सफर को इतनी सहजता से तय करने के पीछे गुरूदेव गुप्त जी की अहम भूमिका रही है। इतना लम्बा सफर बगैर किसी रुकावट के पूरा करना किसी के लिए आसान नहीं होता समाचार पत्रों के लिए तो और भी नहीं। लेकिन गुरूदेव गुप्त जी के दिखाए मार्ग पर जागरण परिवार आज भी उनकी कही बातों को याद करते हुए पाठकों के बीच अपनी सर्वश्रेष्ठ जगह बनाए हुए है। गुरूदेव जी के बताए मार्ग पर आज भी जागरण परिवार अग्रसर है इसी का परिणाम है कि हर दुर्गम मोड़ को बगैर किसी परेशानी के पार करते चले गए और आज भी करते जा रहे हैं। जागरण परिवार के संस्थापक गुरूदेव गुप्त जी की जयंती पर दैनिक जागरण परिवार का सादर प्रणाम! राष्ट्रहित के संकल्प को बल देने और अजेय भारत के निर्माण के लिए गुरूदेव गुप्त जी के साथ हम सभी कल भी एक साथ चले थे आज चल रहे हैं और आगे भी यूँ ही चलते रहेंगे।
अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आवाज बना दैनिक जागरण : 15 अगस्त 1942 में आदरणीय गुरूदेव गुप्त जी ने इस सोच के साथ दैनिक जागरण की नींव रखी थी कि इसे अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आम लोगों की आवाज बनाना है। 8 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी ने अंग्रेजों भारत छोड़ो नारा बुलंद किया और इसके ठीक 8 दिन बाद दैनिक जागरण का अभ्युदय हुआ- वीरांगना लक्ष्मीबाई की कर्मस्थली झांसी में जिसने स्वतंत्रता आंदोलन की प्रथम ज्योति यहीं से प्रज्ज्वलित की थी। गुरूदेव जी की सोच सार्थक साबित हुई दैनिक जागरण समाचार पत्र बुन्देलखण्ड में राष्ट्रीय चेतना और स्वतंत्रता की अलख जगाने वाला सिद्ध हुआ। और यह यूंही सिद्ध नहीं हुआ इसके पीछे गुरूदेव जी की समभाव वाली समाचारीय सोच थी। उस समय से लेकर अब तक दैनिक जागरण में प्रकाशित समाचार की विश्वसनीयता और पारदर्शिता उसकी ऐसी पूंजी है जो उस समय भी पाठकों के साथ उसकी प्रतिबद्धता को बनाए हुए थी और आज भी है।
1942 में झांसी से, 1947 में कानपुर से और 1953 में रीवा से तथा नवम्बर 1956 में भोपाल से स्वतंत्र रूप से दैनिक जागरण हिन्दी दैनिक प्रारंभ किया।
छात्र जीवन के दौरान भारत की स्वाधीनता के लिये रिवोल्यूशनरी पार्टी के साथ कार्य किया,
सक्रिय सदस्य – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस 1938 से, रीवा जिला कांग्रेस कमेटी, मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी,भोपाल
विंध्य प्रदेश पत्रकार संघ रीवा और मध्यप्रदेश पत्रकार संघ, कोषाध्यक्ष मध्यप्रदेश रामचरितमानस चतु:शताब्दी समारोह समिति, केंद्रीय और राज्य सरकारों की विभिन्न समितियों में कार्य किया
सदस्य राज्यसभा 1960-66 और अप्रैल 1976 में राज्यसभा के लिये पुन: चुने गए।
विदेश यात्रा : भारत के राष्ट्रपति के प्रेस दल के साथ मिस्र और सूडान की यात्रा की।
प्रकाशन : श्रीमती इंदिरा गांधी के स्वरों से गूंजते अफ्रीकी देश तथा विभिन्न विषयों पर लेख
विशेष रूचि : हिन्दी और हिन्दी पत्रकारिता का उन्नयन, हरिजनों, जन-जाति और पिछड़े वर्ग के लोगों का उन्नयन, आर्थिक क्षेत्र में असमानताओं को दूर करना तथा सामाजिक कार्य।
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"दैनिक जागरण" को देश की बुलंद आवाज बनाने वाले "गुरुदेव गुप्त" जी की आज 106वीं जयंती
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दैनिक जागरण के इतने लम्बे सफर को इतनी सहजता से तय करने के पीछे गुरूदेव गुप्त जी की अहम भूमिका रही है। इतना लम्बा सफर बगैर किसी रुकावट के पूरा करना किसी के लिए आसान नहीं होता समाचार पत्रों के लिए तो और भी नहीं। लेकिन गुरूदेव गुप्त जी के दिखाए मार्ग पर जागरण परिवार आज भी उनकी कही बातों को याद करते हुए पाठकों के बीच अपनी सर्वश्रेष्ठ जगह बनाए हुए है। गुरूदेव जी के बताए मार्ग पर आज भी जागरण परिवार अग्रसर है इसी का परिणाम है कि हर दुर्गम मोड़ को बगैर किसी परेशानी के पार करते चले गए और आज भी करते जा रहे हैं। जागरण परिवार के संस्थापक गुरूदेव गुप्त जी की जयंती पर दैनिक जागरण परिवार का सादर प्रणाम! राष्ट्रहित के संकल्प को बल देने और अजेय भारत के निर्माण के लिए गुरूदेव गुप्त जी के साथ हम सभी कल भी एक साथ चले थे आज चल रहे हैं और आगे भी यूँ ही चलते रहेंगे।
अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आवाज बना दैनिक जागरण : 15 अगस्त 1942 में आदरणीय गुरूदेव गुप्त जी ने इस सोच के साथ दैनिक जागरण की नींव रखी थी कि इसे अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आम लोगों की आवाज बनाना है। 8 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी ने अंग्रेजों भारत छोड़ो नारा बुलंद किया और इसके ठीक 8 दिन बाद दैनिक जागरण का अभ्युदय हुआ- वीरांगना लक्ष्मीबाई की कर्मस्थली झांसी में जिसने स्वतंत्रता आंदोलन की प्रथम ज्योति यहीं से प्रज्ज्वलित की थी। गुरूदेव जी की सोच सार्थक साबित हुई दैनिक जागरण समाचार पत्र बुन्देलखण्ड में राष्ट्रीय चेतना और स्वतंत्रता की अलख जगाने वाला सिद्ध हुआ। और यह यूंही सिद्ध नहीं हुआ इसके पीछे गुरूदेव जी की समभाव वाली समाचारीय सोच थी। उस समय से लेकर अब तक दैनिक जागरण में प्रकाशित समाचार की विश्वसनीयता और पारदर्शिता उसकी ऐसी पूंजी है जो उस समय भी पाठकों के साथ उसकी प्रतिबद्धता को बनाए हुए थी और आज भी है।
1942 में झांसी से, 1947 में कानपुर से और 1953 में रीवा से तथा नवम्बर 1956 में भोपाल से स्वतंत्र रूप से दैनिक जागरण हिन्दी दैनिक प्रारंभ किया।
छात्र जीवन के दौरान भारत की स्वाधीनता के लिये रिवोल्यूशनरी पार्टी के साथ कार्य किया,
सक्रिय सदस्य – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस 1938 से, रीवा जिला कांग्रेस कमेटी, मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी,भोपाल
विंध्य प्रदेश पत्रकार संघ रीवा और मध्यप्रदेश पत्रकार संघ, कोषाध्यक्ष मध्यप्रदेश रामचरितमानस चतु:शताब्दी समारोह समिति, केंद्रीय और राज्य सरकारों की विभिन्न समितियों में कार्य किया
सदस्य राज्यसभा 1960-66 और अप्रैल 1976 में राज्यसभा के लिये पुन: चुने गए।
विदेश यात्रा : भारत के राष्ट्रपति के प्रेस दल के साथ मिस्र और सूडान की यात्रा की।
प्रकाशन : श्रीमती इंदिरा गांधी के स्वरों से गूंजते अफ्रीकी देश तथा विभिन्न विषयों पर लेख
विशेष रूचि : हिन्दी और हिन्दी पत्रकारिता का उन्नयन, हरिजनों, जन-जाति और पिछड़े वर्ग के लोगों का उन्नयन, आर्थिक क्षेत्र में असमानताओं को दूर करना तथा सामाजिक कार्य।
