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आज से शुरू हो रहा है छत्तीसगढ़ राजिम कुंभ कल्प, तैयारी पूरी
Raipur, CG
छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहे जाने वाले राजिम में कुंभ की तैयारी पूरी हो गई हैं। यह मेला 12 फरवरी से शुरू होगा और 26 फरवरी तक चलेगा। इस दौरान 21 फरवरी से 26 फरवरी तक संत समागम होगा। राजमि कुंभ में तीन पर्व स्नान होंगे और इस दौरान शाही जुलूस भी निकाले जाएंगे।
छत्तीसगढ़ के राजिम कुंभ कल्प को देश के पांचवे कुंभ के नाम से जाना जाता है। प्रसिद्ध राजिम कुंभ कल्प मेले की शुरूआत 12 फरवरी से हो रही है। राजिम कुंभ त्रिवेणी संगम में आयोजित होने होने वाला मेला है। इस मेले की देश और दुनिया में अलग ही पहचान है। 12 फरवरी माघ पूर्णिमा से प्रारंभ होने वाले राजिम कुंभ कल्प मेला का समापन 26 फरवरी महाशिवरात्रि को होगा। इसके साथ ही 21 फरवरी से 26 फरवरी तक संत समागम होगा।
शाही जुलूस निकलेंगे
12 फरवरी माघ पूर्णिमा, 21 फरवरी जानकी जयंती और 26 फरवरी महाशिवरात्रि को पर्व स्नान होंगे। इस दौरान शाही जुलूस भी निकालेंगे। 12 फरवरी सुबह माघ पूर्णिमा के अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं के यहां आने की उम्मीद है। इस बार नए मेला मैदान में कुंभ कल्प का आयोजन हो रहा है। यह लगभग 54 एकड़ में फैला है। मेला मैदान में मुख्यमंच, विभागीय स्टॉल, फूड जोन, मीना बाजार आदि लगाए जाएंगे।
वहीं पुराने मेला स्थल पर संत समागम, महानदी आरती किया जाएगा। प्रशासन ने इस बार लोमष ऋषि आश्रम से कुलेश्वर महादेव मंदिर, मामा-भांचा मंदिर, महानदी आरती स्थल के लिए अलग से एक सड़क का निर्माण किया है।
राजिम कहलाता है छत्तीसगढ़ का प्रयाग
राजिम को'छत्तीसगढ़ का प्रयाग' कहा जाता है, सदियों से श्रद्धालुओं और संत समाज के लिए आस्था का केंद्र रहा है। राज्य सरकार ने राजिम माघी पुन्नी मेले को उसके मूल स्वरूप में प्रतिष्ठित करते हुए राजिम कुंभ कल्प का नाम दिया है। सीएम ने कहा- छत्तीसगढ़ का प्रयाग राजिम कुंभ कल्प के स्वागत के लिए तैयार है। राजिम कुंभ कल्प में संत-समागम, धार्मिक प्रवचन, लोक संस्कृति के विविध रंग और आध्यात्मिक चेतना की अनूठी झलक देखने को मिलेगी। इस आयोजन में छत्तीसगढ़ के साथ-साथ आसपास के राज्यों के श्रद्धालु बड़ी संख्या में सम्मिलित होकर पुण्य लाभ अर्जित करेंगे।
तीन नदियों के संगम में लगता है यहा मेला
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि माघ पूर्णिमा के अवसर पर शिवरीनारायण में महानदी, शिवनाथ और जोंक नदी के पावन संगम पर मेले का आयोजन होता है, जो श्रद्धा और आस्था का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि राजिम कुंभ कल्प और शिवरीनारायण मेला केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि ये आयोजन प्रदेश की समृद्ध परंपराओं और आध्यात्मिक चेतना को सशक्त करने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।
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आज से शुरू हो रहा है छत्तीसगढ़ राजिम कुंभ कल्प, तैयारी पूरी
Raipur, CG
छत्तीसगढ़ के राजिम कुंभ कल्प को देश के पांचवे कुंभ के नाम से जाना जाता है। प्रसिद्ध राजिम कुंभ कल्प मेले की शुरूआत 12 फरवरी से हो रही है। राजिम कुंभ त्रिवेणी संगम में आयोजित होने होने वाला मेला है। इस मेले की देश और दुनिया में अलग ही पहचान है। 12 फरवरी माघ पूर्णिमा से प्रारंभ होने वाले राजिम कुंभ कल्प मेला का समापन 26 फरवरी महाशिवरात्रि को होगा। इसके साथ ही 21 फरवरी से 26 फरवरी तक संत समागम होगा।
शाही जुलूस निकलेंगे
12 फरवरी माघ पूर्णिमा, 21 फरवरी जानकी जयंती और 26 फरवरी महाशिवरात्रि को पर्व स्नान होंगे। इस दौरान शाही जुलूस भी निकालेंगे। 12 फरवरी सुबह माघ पूर्णिमा के अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं के यहां आने की उम्मीद है। इस बार नए मेला मैदान में कुंभ कल्प का आयोजन हो रहा है। यह लगभग 54 एकड़ में फैला है। मेला मैदान में मुख्यमंच, विभागीय स्टॉल, फूड जोन, मीना बाजार आदि लगाए जाएंगे।
वहीं पुराने मेला स्थल पर संत समागम, महानदी आरती किया जाएगा। प्रशासन ने इस बार लोमष ऋषि आश्रम से कुलेश्वर महादेव मंदिर, मामा-भांचा मंदिर, महानदी आरती स्थल के लिए अलग से एक सड़क का निर्माण किया है।
राजिम कहलाता है छत्तीसगढ़ का प्रयाग
राजिम को'छत्तीसगढ़ का प्रयाग' कहा जाता है, सदियों से श्रद्धालुओं और संत समाज के लिए आस्था का केंद्र रहा है। राज्य सरकार ने राजिम माघी पुन्नी मेले को उसके मूल स्वरूप में प्रतिष्ठित करते हुए राजिम कुंभ कल्प का नाम दिया है। सीएम ने कहा- छत्तीसगढ़ का प्रयाग राजिम कुंभ कल्प के स्वागत के लिए तैयार है। राजिम कुंभ कल्प में संत-समागम, धार्मिक प्रवचन, लोक संस्कृति के विविध रंग और आध्यात्मिक चेतना की अनूठी झलक देखने को मिलेगी। इस आयोजन में छत्तीसगढ़ के साथ-साथ आसपास के राज्यों के श्रद्धालु बड़ी संख्या में सम्मिलित होकर पुण्य लाभ अर्जित करेंगे।
तीन नदियों के संगम में लगता है यहा मेला
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि माघ पूर्णिमा के अवसर पर शिवरीनारायण में महानदी, शिवनाथ और जोंक नदी के पावन संगम पर मेले का आयोजन होता है, जो श्रद्धा और आस्था का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि राजिम कुंभ कल्प और शिवरीनारायण मेला केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि ये आयोजन प्रदेश की समृद्ध परंपराओं और आध्यात्मिक चेतना को सशक्त करने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।
