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सरकारी नौकरी का झांसा देकर लाखों की ठगी, दो आरोपी रायपुर और बलौदाबाजार से गिरफ्तार
Khairagarh
मध्य प्रदेश के खैरागढ़ जिले के गंडई थाना क्षेत्र में सरकारी नौकरी का सपना दिखाकर पांच लोगों से कुल ₹37 लाख 67 हजार 900 की ठगी करने वाले दो आरोपियों को रायपुर और बलौदाबाजार से गिरफ्तार किया गया है। यह मामला एक ऐसे ठगी रैकेट का है, जिसने नौकरी पाने की उम्मीद में लोगों को चूना लगाया।
घटना तब शुरू हुई जब पांडातराई निवासी संतोष देवांगन, जो कि स्वास्थ्य विभाग के जीवन दीप समिति में कार्यरत थे, रायपुर में एक संगठन के पंजीकरण कार्य के दौरान बिशेसर ध्रुव नामक व्यक्ति से मिले। बिशेसर ने खुद को मंत्रालय से जुड़े प्रभावशाली व्यक्तियों से संपर्क रखने वाला बताया और दावा किया कि वह सरकारी नौकरी दिलवाने में सक्षम है। उसने संतोष से लेबर इंस्पेक्टर की नौकरी के लिए ₹20 लाख, शिक्षक पद के लिए ₹15 लाख और चपरासी के लिए ₹8 लाख की मांग की।
संतोष देवांगन ने यह प्रस्ताव अपने परिवार और रिश्तेदारों से साझा किया और उनकी बहन संजू देवांगन, रिश्तेदार विद्या, त्रिलोक और विवेक देवांगन भी इस योजना से प्रभावित हो गए। इसके बाद 25 दिसंबर 2022 को गंडई में एक बैठक हुई, जहां बिशेसर ने सबको छह महीने में नौकरी दिलवाने का पक्का भरोसा दिया।
इसके बाद, आरोपियों को कुल ₹37 लाख 67 हजार 900 की रकम दी गई, जिसमें कुछ राशि ऑनलाइन ट्रांसफर हुई और कुछ नकद दी गई। संतोष ने अकेले ₹11.67 लाख, संजू ने ₹4 लाख, विद्या ने ₹11.5 लाख, त्रिलोक ने ₹8.5 लाख और विवेक ने ₹2 लाख की रकम दी।
समय बीतने के बाद जब कोई नौकरी नहीं मिली और आरोपी लगातार टालमटोल करते रहे, तो संदेह गहराया। संतोष ने जब अपनी रकम वापस मांगी तो आरोपी बिशेसर ने उसे दो चेक दिए, जिनमें से एक ₹10 लाख और दूसरा ₹3.5 लाख का था। भुवनेश देवांगन ने भी ₹2 लाख का एक चेक दिया, लेकिन यह सभी चेक धोखाधड़ी का हिस्सा निकले, क्योंकि ना तो रकम वापस मिली और न ही नियुक्ति पत्र आया।
इस मामले की शिकायत 27 अप्रैल 2025 को गंडई थाने में दर्ज कराई गई। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए रायपुर और बलौदाबाजार से दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में दोनों आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार किया। जांच में यह भी पता चला कि भुवनेश देवांगन पहले भी बीजापुर जिले में एक ठगी मामले में गिरफ्तार हो चुका था। फिलहाल दोनों आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है और पुलिस अन्य संभावित पीड़ितों की तलाश में जुटी है।
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सरकारी नौकरी का झांसा देकर लाखों की ठगी, दो आरोपी रायपुर और बलौदाबाजार से गिरफ्तार
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घटना तब शुरू हुई जब पांडातराई निवासी संतोष देवांगन, जो कि स्वास्थ्य विभाग के जीवन दीप समिति में कार्यरत थे, रायपुर में एक संगठन के पंजीकरण कार्य के दौरान बिशेसर ध्रुव नामक व्यक्ति से मिले। बिशेसर ने खुद को मंत्रालय से जुड़े प्रभावशाली व्यक्तियों से संपर्क रखने वाला बताया और दावा किया कि वह सरकारी नौकरी दिलवाने में सक्षम है। उसने संतोष से लेबर इंस्पेक्टर की नौकरी के लिए ₹20 लाख, शिक्षक पद के लिए ₹15 लाख और चपरासी के लिए ₹8 लाख की मांग की।
संतोष देवांगन ने यह प्रस्ताव अपने परिवार और रिश्तेदारों से साझा किया और उनकी बहन संजू देवांगन, रिश्तेदार विद्या, त्रिलोक और विवेक देवांगन भी इस योजना से प्रभावित हो गए। इसके बाद 25 दिसंबर 2022 को गंडई में एक बैठक हुई, जहां बिशेसर ने सबको छह महीने में नौकरी दिलवाने का पक्का भरोसा दिया।
इसके बाद, आरोपियों को कुल ₹37 लाख 67 हजार 900 की रकम दी गई, जिसमें कुछ राशि ऑनलाइन ट्रांसफर हुई और कुछ नकद दी गई। संतोष ने अकेले ₹11.67 लाख, संजू ने ₹4 लाख, विद्या ने ₹11.5 लाख, त्रिलोक ने ₹8.5 लाख और विवेक ने ₹2 लाख की रकम दी।
समय बीतने के बाद जब कोई नौकरी नहीं मिली और आरोपी लगातार टालमटोल करते रहे, तो संदेह गहराया। संतोष ने जब अपनी रकम वापस मांगी तो आरोपी बिशेसर ने उसे दो चेक दिए, जिनमें से एक ₹10 लाख और दूसरा ₹3.5 लाख का था। भुवनेश देवांगन ने भी ₹2 लाख का एक चेक दिया, लेकिन यह सभी चेक धोखाधड़ी का हिस्सा निकले, क्योंकि ना तो रकम वापस मिली और न ही नियुक्ति पत्र आया।
इस मामले की शिकायत 27 अप्रैल 2025 को गंडई थाने में दर्ज कराई गई। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए रायपुर और बलौदाबाजार से दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में दोनों आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार किया। जांच में यह भी पता चला कि भुवनेश देवांगन पहले भी बीजापुर जिले में एक ठगी मामले में गिरफ्तार हो चुका था। फिलहाल दोनों आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है और पुलिस अन्य संभावित पीड़ितों की तलाश में जुटी है।
