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रायपुर सेंट्रल जेल में विचाराधीन कैदी की मौत: पॉक्सो मामले में बंद युवक ने की आत्महत्या
रायपुर (छ.ग.)
पीपल के पेड़ से लटका मिला कैदी, परिजनों ने जेल प्रशासन पर लगाए प्रताड़ना और सूचना छुपाने के आरोप
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित सेंट्रल जेल में रविवार शाम उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब पॉक्सो एक्ट के एक मामले में बंद विचाराधीन कैदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतक की पहचान 30 वर्षीय सुनील महानंद के रूप में हुई है, जो बीते 11 नवंबर से जेल में बंद था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, सुनील ने जेल परिसर में लगे पीपल के पेड़ से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
जेल सूत्रों के मुताबिक, रविवार शाम करीब 6:45 बजे सुनील रोज़ाना की तरह बैरक से बाहर टहल रहा था। इसी दौरान वह जेल परिसर के एक कोने में स्थित पीपल के पेड़ के पास पहुंचा। वहां उसने अपने पास मौजूद गमछे से फंदा बनाकर पेड़ की टहनी पर फांसी लगा ली। कुछ ही देर में ड्यूटी पर तैनात पहरेदारों की नजर उस पर पड़ी।
पहरेदारों ने तुरंत उसे नीचे उतारा। उस समय उसकी सांसें चल रही थीं। जेल प्रशासन ने बिना देरी किए उसे डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल (मेकाहारा) ले जाने की व्यवस्था की। हालांकि, अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
परिजनों के गंभीर आरोप
घटना के बाद मृतक के परिजनों ने जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि सुनील को जेल में लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था, जिसके चलते उसने यह कदम उठाया। उनका आरोप है कि आत्महत्या के बाद भी जेल प्रशासन ने पारदर्शिता नहीं बरती और बिना सूचना दिए शव को सीधे मार्चुरी भेज दिया गया।
परिजनों का कहना है कि उन्हें घटना की जानकारी काफी देर बाद दी गई। यदि समय रहते सूचना दी जाती, तो वे अस्पताल या जेल पहुंच सकते थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सूचना देने में जानबूझकर देरी की गई।
जेल प्रशासन की सफाई
जेल अधिकारियों ने प्रताड़ना के सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। प्रशासन का कहना है कि कैदी के साथ किसी भी प्रकार का मानसिक या शारीरिक दुर्व्यवहार नहीं किया गया। अधिकारियों के अनुसार, घटना के बाद उनकी पहली प्राथमिकता कैदी की जान बचाना थी, इसलिए पहले उसे अस्पताल भेजा गया। परिवार को बाद में सूचना दी गई।
पुलिस जांच और सीसीटीवी फुटेज
मामला गंज थाना क्षेत्र का है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मार्चुरी पहुंची और जांच शुरू कर दी गई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जेल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में पूरी घटना रिकॉर्ड हुई है। फुटेज में कैदी को स्वयं फांसी लगाते हुए देखा गया है। शुरुआती जांच में पुलिस इसे आत्महत्या का मामला मान रही है, हालांकि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। वहीं, यह घटना जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों की मानसिक स्थिति और निगरानी व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर रही है, जिसे लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी मंथन शुरू हो गया है।
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रायपुर सेंट्रल जेल में विचाराधीन कैदी की मौत: पॉक्सो मामले में बंद युवक ने की आत्महत्या
रायपुर (छ.ग.)
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित सेंट्रल जेल में रविवार शाम उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब पॉक्सो एक्ट के एक मामले में बंद विचाराधीन कैदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतक की पहचान 30 वर्षीय सुनील महानंद के रूप में हुई है, जो बीते 11 नवंबर से जेल में बंद था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, सुनील ने जेल परिसर में लगे पीपल के पेड़ से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
जेल सूत्रों के मुताबिक, रविवार शाम करीब 6:45 बजे सुनील रोज़ाना की तरह बैरक से बाहर टहल रहा था। इसी दौरान वह जेल परिसर के एक कोने में स्थित पीपल के पेड़ के पास पहुंचा। वहां उसने अपने पास मौजूद गमछे से फंदा बनाकर पेड़ की टहनी पर फांसी लगा ली। कुछ ही देर में ड्यूटी पर तैनात पहरेदारों की नजर उस पर पड़ी।
पहरेदारों ने तुरंत उसे नीचे उतारा। उस समय उसकी सांसें चल रही थीं। जेल प्रशासन ने बिना देरी किए उसे डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल (मेकाहारा) ले जाने की व्यवस्था की। हालांकि, अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
परिजनों के गंभीर आरोप
घटना के बाद मृतक के परिजनों ने जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि सुनील को जेल में लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था, जिसके चलते उसने यह कदम उठाया। उनका आरोप है कि आत्महत्या के बाद भी जेल प्रशासन ने पारदर्शिता नहीं बरती और बिना सूचना दिए शव को सीधे मार्चुरी भेज दिया गया।
परिजनों का कहना है कि उन्हें घटना की जानकारी काफी देर बाद दी गई। यदि समय रहते सूचना दी जाती, तो वे अस्पताल या जेल पहुंच सकते थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सूचना देने में जानबूझकर देरी की गई।
जेल प्रशासन की सफाई
जेल अधिकारियों ने प्रताड़ना के सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। प्रशासन का कहना है कि कैदी के साथ किसी भी प्रकार का मानसिक या शारीरिक दुर्व्यवहार नहीं किया गया। अधिकारियों के अनुसार, घटना के बाद उनकी पहली प्राथमिकता कैदी की जान बचाना थी, इसलिए पहले उसे अस्पताल भेजा गया। परिवार को बाद में सूचना दी गई।
पुलिस जांच और सीसीटीवी फुटेज
मामला गंज थाना क्षेत्र का है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मार्चुरी पहुंची और जांच शुरू कर दी गई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जेल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में पूरी घटना रिकॉर्ड हुई है। फुटेज में कैदी को स्वयं फांसी लगाते हुए देखा गया है। शुरुआती जांच में पुलिस इसे आत्महत्या का मामला मान रही है, हालांकि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। वहीं, यह घटना जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों की मानसिक स्थिति और निगरानी व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर रही है, जिसे लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी मंथन शुरू हो गया है।
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