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जवानों से मिले विजय शर्मा, लाल आतंक के खात्मे का दिया डेडलाइन, नई सरेंडर पॉलिसी का किया जिक्र
Bijapur, cg
बीजापुर नक्सल एनकाउंटर के बाद डिप्टी सीएम विजय शर्मा बीजापुर पहुंचे. उन्होंने यहां वीर जवानों से मुलाकात की.
डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने बीजापुर का दौरा किया. इस दौरान उन्होंने बस्तर से लाल आतंक के खात्मे का प्रण दोहराया. जवानों से मुलाकात करने के बाद डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने एक जनसभा को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि साल 2026 में बस्तर से लाल आतंक का अंत हो जाएगा. बस्तर के लोग शिक्षा, सड़क, अस्पताल, बिजली, पानी और अन्य सुविधाएं चाह रहे हैं. नक्सली इन सुविधाओं को यहां बनने नहीं देना चाह रहे हैं. बस्तर के लोगों के बच्चों की पढ़ाई पर रोक लगा रहे हैं. नक्सली अपने बच्चों को बाहर भेजकर पढ़ा रहे हैं लेकिन बस्तर के लोगों के बच्चों को पढ़ने नहीं देना चाह रहे हैं. अब बंदूक का भय नहीं चलेगा.
सरेंडर कर चुके नक्सलियों को दे रहे ट्रेनिंग: गृह मंत्री और डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा कि साय सरकार सरेंडर कर चुके नक्सलियों को मुख्य धारा में वापस लाने के लिए कौशल विकास की ट्रेनिंग दे रहे हैं. तेलंगाना के सीमा से लगे पामेड़ सहित पालागुड़ा, मारूड़बाका, भैरमगढ़ के 28 आत्मसमर्पित नक्सलियों को कौशल विकास के तहत राजमिस्त्री एवं अन्य प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है. विगत तीन माह से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे आत्मसमर्पित नक्सलियों ने उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा का स्वागत भारत माता की जय के साथ किया.
स्कूल, अस्पताल, आंगनबाड़ी, सड़क, बिजली, मोबाइल टावर यह बुनियादि चीजें है. इसे गांव-गांव तक पहुंचाना चाहिए. कोई इसे क्यों रोक कर रखेगा.नक्सली जिनके खुद के बच्चे विदेश में पढ़ते हैं गांव में छोटा सा स्कूल नहीं बनाने देते. जिससे गांव के बच्चे पढ़ सके. सारे गांव की उन्नति और विकास को रोक कर रखा है. केंद्रीय गृह मंत्री के मुताबिक मार्च 2026 तक सशस्त्र नक्सलियों का समापन पूरे देश में होकर रहेगा- विजय शर्मा, डिप्टी सीएम और गृह मंत्री, छत्तीसगढ़
सरेंडर कर चुके नक्सलियों ने विजय शर्मा ने की बात: इस दौरान सरेंडर कर चुके नक्सलियों ने डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने बात की है. सरेंडर नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ सरकार के पुनर्वास नीति की प्रशंसा करते हुए कहा कि पहले हमारा जीवन गुमराह था. अब हम समाज की मुख्यधारा में जुड़कर कार्य कर रहे हैं. सरकार की पुनर्वास नीति के तहत सरेंडर कर हम बेहतर जीवन जी रहे हैं.
"बस्तर की संस्कृति महान": डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने बस्तर पंडुम कार्यक्रम में हिस्सा लिया. इस दौरान उन्होंने कहा कि बस्तर की संस्कृति पूरी दुनिया में सबसे महान है जिसे संजोए रखने संरक्षित एवं संवर्धित करने का फैसला साय सरकार ने किया है. उन्होंने कहा कि बस्तर पण्डुम का ब्लॉक एवं जिला स्तरीय प्रतियोगिता के बाद 01 अप्रैल से 03 अप्रैल तक संभाग स्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन दंतेवाड़ा में होगा. इसमें प्रदेश के मुख्यमंत्री सहित केन्द्रीय मंत्रीगण एवं देश-विदेश के लोग हमारी सभ्यता, संस्कृति और पांरपरिक विधाओं को देखने आएंगे.बस्तर को लाल आतंक से मुक्त होना चाहिए. इस लाल आतंक ने किसी को कुछ नहीं दिया.
अभी हर जिले के, हर पंचायत से युवाओं को रायपुर घुमाने ले जाया गया. हर एक पंचायत के युवाओं से खड़े होकर बात करता हूं. मुझे आश्चर्य होता है और दुख है इस बात का कि बीजापुर के अंदरूनी क्षेत्र के बच्चे 25 वर्ष के हो गए हैं. उसके बाद भी उन्होंने कभी टीवी नहीं देखी. कोई जगदलपुर नहीं पहुंचा है. कोई रायपुर नहीं पहुंचा है.- विजय शर्मा, डिप्टी सीएम और गृह मंत्री, छत्तीसगढ़
नई नक्सल सरेंडर पॉलिसी का किया जिक्र: डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने नई नक्सल सरेंडर पॉलिसी का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि जो लोग अपने पंचायत के भटके हुए सदस्यों जो किसी भी कारण नक्सल संगठन से जुड़े हैं, उनकी वापसी का काम करते हैं तो ऐसे लोगों का कोई प्रकरण नहीं बनेगा. ऐसे ग्राम पंचायत जो लाल आतंक से मुक्त होते हैं तो उन ग्राम पंचायतों को तत्काल एक करोड़ रुपये के निर्माण कार्य की स्वीकृति दी जाएगी. उस पंचायत में विद्युत, मोबाईल नेटवर्क तुरंत उपलब्ध कराया जाएगा.
पुलिस की बड़ी कार्रवाई चल रही है और उस पूरी कार्रवाई के बीच में सरकार की तरफ से सरकार एक गोली नहीं चलाना चाहती. नक्सली सरेंडर कर मुख्यधारा में आ जाएं. मुख्यधारा में आने पर सभी सुविधाएं मिलेगी. अगर किसी ने आतंक का रास्ता नहीं छोड़ा तो कठोर कार्रवाई की जाएगी. देशद्रोह को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा- विजय शर्मा, डिप्टी सीएम और गृह मंत्री, छत्तीसगढ़
वीर जवानों से डिप्टी सीएम ने की मुलाकात: बीजापुर नक्सल एनकाउंटर में शामिल वीर जवानों से डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने मुलाकात की है. उन्होंने जवानों के साहसिक और सफल ऑपरेशन की सराहना की और उनका हौसला बढ़ाया. विजय शर्मा ने कहा कि सुरक्षा बलों के जवानों की भुजाओं की ताकत के बदौलत आज मैं सड़क मार्ग से बीजपुर आया हूं. इसके पूर्व कोई भी गृहमंत्री सड़क मार्ग से बीजापुर नहीं आया. 20 मार्च को बीजापुर में हुए मुठभेड़ में 14 महिला माओवादी सहित कुल 26 वर्दीधारी माओवादियों के शव बरामद किए जा चुके हैं. मारे गए माओवादियों में डीवीसीएम, एसीएम, पीपीसीएम और पीएलजीए सदस्य शामिल थे.

मैं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की ओर सभी जवानों के लिए शुभकामना संदेश लेकर आया हूं.आपके अद्भुत पराक्रम और शौर्य से बस्तर में सुख-शांति फिर से लौटेगी. इस अभियान से आपने देश और दुनिया की सोच बदली है.भीषण मुठभेड़ में हमारे एक जांबाज जवान शहीद हुए उन मैं श्रद्धांजलि देता हूं-विजय शर्मा, डिप्टी सीएम और गृह मंत्री, छत्तीसगढ़
"बस्तर शांति का टापू रहा है": डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा कि बस्तर शांति का टापू रहा है. कुछ भटके हुए लोगों ने इस शांति के टापू की शांति को भंग कर दिया है. हमारे सुरक्षा बल और पुलिस के जवान ऐसे लोगों को नेस्तनाबूद करके ही रहेंगे. बीजापुर का नक्सल ऑपरेशन छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा ऑपरेशन रहा है. छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति के सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं.
साय सरकार की नई नक्सल सरेंडर पॉलिसी ( छत्तीसगढ़ नक्सल आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत और पुनर्वास नीति-2025) की पूरी जानकारी
रायपुर में छत्तीसगढ़ सरकार की तरफ से छत्तीसगढ़ नक्सल आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत और पुनर्वास नीति-2025 के बारे में जानकारी दी गई है. जिनमें मुख्य बिंदु कुछ इस प्रकार है.
- छत्तीसगढ़ नक्सल आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत और पुनर्वास नीति-2025 का उद्देश्य नक्सल हिंसा के पीड़ितों को अधिक मुआवजा, मुफ्त शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और नौकरी के अवसर प्रदान करना है.
- आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को पुनर्वास और नया जीवन शुरू करने के लिए कानूनी सहायता भी मिलेगी। नई नीति का प्राथमिक उद्देश्य नक्सल हिंसा से प्रभावित लोगों की सहायता करना और आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को समाज में फिर से शामिल करना है.
- नक्सलवाद को खत्म करने के लिए सख्त कार्रवाई और पुनर्वास के बीच संतुलन जरूरी है। नक्सल विरोधी अभियानों में पुलिस की विशेष सहायता करने वाले 'गोपनीय सैनिकों' (पुलिस मुखबिरों) की मृत्यु के मामले में दिए जाने वाले मुआवजे को 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये (केंद्रीय योजनाओं के तहत देय मुआवजे के अतिरिक्त) कर दिया गया है
- ऐसे व्यक्ति को स्थायी विकलांगता के मामले में दिए जाने वाले मुआवजे को 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया गया है.
- नागरिकों की हत्या, गंभीर चोट या स्थायी विकलांगता के मामले में, पीड़ितों या परिवारों को शहरी क्षेत्रों में 1.5 हेक्टेयर कृषि भूमि या 4 डेसीमल (1,742 वर्ग फीट) आवासीय भूमि प्रदान की जाएगी. यदि भूमि उपलब्ध नहीं कराई जा सकी, तो ग्रामीण क्षेत्रों में पीड़ितों को 4 लाख रुपये और शहरी क्षेत्रों में 8 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी.
- पीड़ित परिवार घटना के तीन साल के भीतर कृषि भूमि खरीदता है, तो उन्हें अधिकतम दो एकड़ भूमि की खरीद पर स्टांप शुल्क और पंजीकरण शुल्क से पूरी छूट मिलेगी.
- नागरिकों की मृत्यु के मामले में, यदि परिवार के किसी सदस्य को सरकारी नौकरी नहीं दी जा सकती है, तो 15 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी. नक्सली हिंसा के शिकार पति/पत्नी को 10 लाख रुपये और माता-पिता को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी. सरकार ने नक्सली हिंसा से प्रभावित लोगों के लिए विशेष रोजगार योजनाएं भी शुरू की हैं.
- कोई पीड़ित निजी क्षेत्र की नौकरी हासिल करता है, तो सरकार पांच साल तक वेतन का 40 प्रतिशत भुगतान करेगी, जिसकी सीमा 5 लाख रुपये प्रति वर्ष होगी.
- नक्सली हिंसा में पीड़ित परिवार के बच्चों को प्रयास आवासीय विद्यालयों और एकलव्य मॉडल स्कूलों में मुफ्त शिक्षा मिलेगी. अगर वे निजी स्कूलों में पढ़ना चाहते हैं, तो उन्हें शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत आरक्षित सीटों पर प्राथमिकता मिलेगी. इसके अतिरिक्त, उच्च शिक्षा या तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले छात्रों को 25,000 रुपये वार्षिक छात्रवृत्ति मिलेगी
- सरेंडर करने वाले नक्सली को 50,000 रुपये नकद सहायता मिलेगी. उन्हें आत्मसमर्पण किए गए हथियार के लिए 'प्रोत्साहन राशि' भी प्रदान की जाएगी. एलएमजी (लाइट मशीन गन) के लिए आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली को 5 लाख रुपये, एके-47 राइफल के लिए 4 लाख रुपये, इंसास या एसएलआर (सेल्फ लोडिंग राइफल) राइफल के लिए 2 लाख रुपये आदि मिलेंगे.
- 5 लाख रुपये या उससे अधिक का इनाम रखने वाले आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली को शहरी क्षेत्र में अधिकतम 4 डिसमिल (1742 वर्ग फीट) जमीन या ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतम 1 हेक्टेयर कृषि भूमि आवंटित की जाएगी. यदि जमीन उपलब्ध नहीं कराई जा सकी तो अचल संपत्ति खरीदने के लिए 2 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी
- सरेंडर करने वाले नक्सलियों को 5 किलोग्राम या उससे अधिक वजन वाले इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) की जब्ती में मदद करने पर 15,000 रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी. इसके साथ ही 10 किलोग्राम या उससे अधिक वजन वाले आईईडी की जब्ती पर 25,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी.
- 20 किलोग्राम या उससे अधिक विस्फोटक के साथ हथियार की जब्ती के मामले में मदद करने वाले शख्स को एक लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी.
- किसी भी ग्राम पंचायत में सक्रिय सभी नक्सली सदस्यों और मिलिशिया के सरेंडर पर एक करोड़ रुपये के विकास कार्य की स्वीकृति तुरंत मिलेगी.
नक्सलवाद के खिलाफ साय सरकार जंग तेज कर चुकी है. आने वाले समय में एंटी नक्सल ऑपरेशन में और तेजी आने की उम्मीद है. नक्सलवाद पर चारों तरफ से प्रहार की तैयारी साय सरकार की पॉलिसी में दिख रही है.
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जवानों से मिले विजय शर्मा, लाल आतंक के खात्मे का दिया डेडलाइन, नई सरेंडर पॉलिसी का किया जिक्र
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डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने बीजापुर का दौरा किया. इस दौरान उन्होंने बस्तर से लाल आतंक के खात्मे का प्रण दोहराया. जवानों से मुलाकात करने के बाद डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने एक जनसभा को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि साल 2026 में बस्तर से लाल आतंक का अंत हो जाएगा. बस्तर के लोग शिक्षा, सड़क, अस्पताल, बिजली, पानी और अन्य सुविधाएं चाह रहे हैं. नक्सली इन सुविधाओं को यहां बनने नहीं देना चाह रहे हैं. बस्तर के लोगों के बच्चों की पढ़ाई पर रोक लगा रहे हैं. नक्सली अपने बच्चों को बाहर भेजकर पढ़ा रहे हैं लेकिन बस्तर के लोगों के बच्चों को पढ़ने नहीं देना चाह रहे हैं. अब बंदूक का भय नहीं चलेगा.
सरेंडर कर चुके नक्सलियों को दे रहे ट्रेनिंग: गृह मंत्री और डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा कि साय सरकार सरेंडर कर चुके नक्सलियों को मुख्य धारा में वापस लाने के लिए कौशल विकास की ट्रेनिंग दे रहे हैं. तेलंगाना के सीमा से लगे पामेड़ सहित पालागुड़ा, मारूड़बाका, भैरमगढ़ के 28 आत्मसमर्पित नक्सलियों को कौशल विकास के तहत राजमिस्त्री एवं अन्य प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है. विगत तीन माह से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे आत्मसमर्पित नक्सलियों ने उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा का स्वागत भारत माता की जय के साथ किया.
स्कूल, अस्पताल, आंगनबाड़ी, सड़क, बिजली, मोबाइल टावर यह बुनियादि चीजें है. इसे गांव-गांव तक पहुंचाना चाहिए. कोई इसे क्यों रोक कर रखेगा.नक्सली जिनके खुद के बच्चे विदेश में पढ़ते हैं गांव में छोटा सा स्कूल नहीं बनाने देते. जिससे गांव के बच्चे पढ़ सके. सारे गांव की उन्नति और विकास को रोक कर रखा है. केंद्रीय गृह मंत्री के मुताबिक मार्च 2026 तक सशस्त्र नक्सलियों का समापन पूरे देश में होकर रहेगा- विजय शर्मा, डिप्टी सीएम और गृह मंत्री, छत्तीसगढ़
सरेंडर कर चुके नक्सलियों ने विजय शर्मा ने की बात: इस दौरान सरेंडर कर चुके नक्सलियों ने डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने बात की है. सरेंडर नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ सरकार के पुनर्वास नीति की प्रशंसा करते हुए कहा कि पहले हमारा जीवन गुमराह था. अब हम समाज की मुख्यधारा में जुड़कर कार्य कर रहे हैं. सरकार की पुनर्वास नीति के तहत सरेंडर कर हम बेहतर जीवन जी रहे हैं.
"बस्तर की संस्कृति महान": डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने बस्तर पंडुम कार्यक्रम में हिस्सा लिया. इस दौरान उन्होंने कहा कि बस्तर की संस्कृति पूरी दुनिया में सबसे महान है जिसे संजोए रखने संरक्षित एवं संवर्धित करने का फैसला साय सरकार ने किया है. उन्होंने कहा कि बस्तर पण्डुम का ब्लॉक एवं जिला स्तरीय प्रतियोगिता के बाद 01 अप्रैल से 03 अप्रैल तक संभाग स्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन दंतेवाड़ा में होगा. इसमें प्रदेश के मुख्यमंत्री सहित केन्द्रीय मंत्रीगण एवं देश-विदेश के लोग हमारी सभ्यता, संस्कृति और पांरपरिक विधाओं को देखने आएंगे.बस्तर को लाल आतंक से मुक्त होना चाहिए. इस लाल आतंक ने किसी को कुछ नहीं दिया.
अभी हर जिले के, हर पंचायत से युवाओं को रायपुर घुमाने ले जाया गया. हर एक पंचायत के युवाओं से खड़े होकर बात करता हूं. मुझे आश्चर्य होता है और दुख है इस बात का कि बीजापुर के अंदरूनी क्षेत्र के बच्चे 25 वर्ष के हो गए हैं. उसके बाद भी उन्होंने कभी टीवी नहीं देखी. कोई जगदलपुर नहीं पहुंचा है. कोई रायपुर नहीं पहुंचा है.- विजय शर्मा, डिप्टी सीएम और गृह मंत्री, छत्तीसगढ़
नई नक्सल सरेंडर पॉलिसी का किया जिक्र: डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने नई नक्सल सरेंडर पॉलिसी का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि जो लोग अपने पंचायत के भटके हुए सदस्यों जो किसी भी कारण नक्सल संगठन से जुड़े हैं, उनकी वापसी का काम करते हैं तो ऐसे लोगों का कोई प्रकरण नहीं बनेगा. ऐसे ग्राम पंचायत जो लाल आतंक से मुक्त होते हैं तो उन ग्राम पंचायतों को तत्काल एक करोड़ रुपये के निर्माण कार्य की स्वीकृति दी जाएगी. उस पंचायत में विद्युत, मोबाईल नेटवर्क तुरंत उपलब्ध कराया जाएगा.
पुलिस की बड़ी कार्रवाई चल रही है और उस पूरी कार्रवाई के बीच में सरकार की तरफ से सरकार एक गोली नहीं चलाना चाहती. नक्सली सरेंडर कर मुख्यधारा में आ जाएं. मुख्यधारा में आने पर सभी सुविधाएं मिलेगी. अगर किसी ने आतंक का रास्ता नहीं छोड़ा तो कठोर कार्रवाई की जाएगी. देशद्रोह को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा- विजय शर्मा, डिप्टी सीएम और गृह मंत्री, छत्तीसगढ़
वीर जवानों से डिप्टी सीएम ने की मुलाकात: बीजापुर नक्सल एनकाउंटर में शामिल वीर जवानों से डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने मुलाकात की है. उन्होंने जवानों के साहसिक और सफल ऑपरेशन की सराहना की और उनका हौसला बढ़ाया. विजय शर्मा ने कहा कि सुरक्षा बलों के जवानों की भुजाओं की ताकत के बदौलत आज मैं सड़क मार्ग से बीजपुर आया हूं. इसके पूर्व कोई भी गृहमंत्री सड़क मार्ग से बीजापुर नहीं आया. 20 मार्च को बीजापुर में हुए मुठभेड़ में 14 महिला माओवादी सहित कुल 26 वर्दीधारी माओवादियों के शव बरामद किए जा चुके हैं. मारे गए माओवादियों में डीवीसीएम, एसीएम, पीपीसीएम और पीएलजीए सदस्य शामिल थे.

मैं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की ओर सभी जवानों के लिए शुभकामना संदेश लेकर आया हूं.आपके अद्भुत पराक्रम और शौर्य से बस्तर में सुख-शांति फिर से लौटेगी. इस अभियान से आपने देश और दुनिया की सोच बदली है.भीषण मुठभेड़ में हमारे एक जांबाज जवान शहीद हुए उन मैं श्रद्धांजलि देता हूं-विजय शर्मा, डिप्टी सीएम और गृह मंत्री, छत्तीसगढ़
"बस्तर शांति का टापू रहा है": डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा कि बस्तर शांति का टापू रहा है. कुछ भटके हुए लोगों ने इस शांति के टापू की शांति को भंग कर दिया है. हमारे सुरक्षा बल और पुलिस के जवान ऐसे लोगों को नेस्तनाबूद करके ही रहेंगे. बीजापुर का नक्सल ऑपरेशन छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा ऑपरेशन रहा है. छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति के सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं.
साय सरकार की नई नक्सल सरेंडर पॉलिसी ( छत्तीसगढ़ नक्सल आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत और पुनर्वास नीति-2025) की पूरी जानकारी
रायपुर में छत्तीसगढ़ सरकार की तरफ से छत्तीसगढ़ नक्सल आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत और पुनर्वास नीति-2025 के बारे में जानकारी दी गई है. जिनमें मुख्य बिंदु कुछ इस प्रकार है.
- छत्तीसगढ़ नक्सल आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत और पुनर्वास नीति-2025 का उद्देश्य नक्सल हिंसा के पीड़ितों को अधिक मुआवजा, मुफ्त शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और नौकरी के अवसर प्रदान करना है.
- आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को पुनर्वास और नया जीवन शुरू करने के लिए कानूनी सहायता भी मिलेगी। नई नीति का प्राथमिक उद्देश्य नक्सल हिंसा से प्रभावित लोगों की सहायता करना और आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को समाज में फिर से शामिल करना है.
- नक्सलवाद को खत्म करने के लिए सख्त कार्रवाई और पुनर्वास के बीच संतुलन जरूरी है। नक्सल विरोधी अभियानों में पुलिस की विशेष सहायता करने वाले 'गोपनीय सैनिकों' (पुलिस मुखबिरों) की मृत्यु के मामले में दिए जाने वाले मुआवजे को 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये (केंद्रीय योजनाओं के तहत देय मुआवजे के अतिरिक्त) कर दिया गया है
- ऐसे व्यक्ति को स्थायी विकलांगता के मामले में दिए जाने वाले मुआवजे को 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया गया है.
- नागरिकों की हत्या, गंभीर चोट या स्थायी विकलांगता के मामले में, पीड़ितों या परिवारों को शहरी क्षेत्रों में 1.5 हेक्टेयर कृषि भूमि या 4 डेसीमल (1,742 वर्ग फीट) आवासीय भूमि प्रदान की जाएगी. यदि भूमि उपलब्ध नहीं कराई जा सकी, तो ग्रामीण क्षेत्रों में पीड़ितों को 4 लाख रुपये और शहरी क्षेत्रों में 8 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी.
- पीड़ित परिवार घटना के तीन साल के भीतर कृषि भूमि खरीदता है, तो उन्हें अधिकतम दो एकड़ भूमि की खरीद पर स्टांप शुल्क और पंजीकरण शुल्क से पूरी छूट मिलेगी.
- नागरिकों की मृत्यु के मामले में, यदि परिवार के किसी सदस्य को सरकारी नौकरी नहीं दी जा सकती है, तो 15 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी. नक्सली हिंसा के शिकार पति/पत्नी को 10 लाख रुपये और माता-पिता को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी. सरकार ने नक्सली हिंसा से प्रभावित लोगों के लिए विशेष रोजगार योजनाएं भी शुरू की हैं.
- कोई पीड़ित निजी क्षेत्र की नौकरी हासिल करता है, तो सरकार पांच साल तक वेतन का 40 प्रतिशत भुगतान करेगी, जिसकी सीमा 5 लाख रुपये प्रति वर्ष होगी.
- नक्सली हिंसा में पीड़ित परिवार के बच्चों को प्रयास आवासीय विद्यालयों और एकलव्य मॉडल स्कूलों में मुफ्त शिक्षा मिलेगी. अगर वे निजी स्कूलों में पढ़ना चाहते हैं, तो उन्हें शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत आरक्षित सीटों पर प्राथमिकता मिलेगी. इसके अतिरिक्त, उच्च शिक्षा या तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले छात्रों को 25,000 रुपये वार्षिक छात्रवृत्ति मिलेगी
- सरेंडर करने वाले नक्सली को 50,000 रुपये नकद सहायता मिलेगी. उन्हें आत्मसमर्पण किए गए हथियार के लिए 'प्रोत्साहन राशि' भी प्रदान की जाएगी. एलएमजी (लाइट मशीन गन) के लिए आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली को 5 लाख रुपये, एके-47 राइफल के लिए 4 लाख रुपये, इंसास या एसएलआर (सेल्फ लोडिंग राइफल) राइफल के लिए 2 लाख रुपये आदि मिलेंगे.
- 5 लाख रुपये या उससे अधिक का इनाम रखने वाले आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली को शहरी क्षेत्र में अधिकतम 4 डिसमिल (1742 वर्ग फीट) जमीन या ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतम 1 हेक्टेयर कृषि भूमि आवंटित की जाएगी. यदि जमीन उपलब्ध नहीं कराई जा सकी तो अचल संपत्ति खरीदने के लिए 2 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी
- सरेंडर करने वाले नक्सलियों को 5 किलोग्राम या उससे अधिक वजन वाले इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) की जब्ती में मदद करने पर 15,000 रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी. इसके साथ ही 10 किलोग्राम या उससे अधिक वजन वाले आईईडी की जब्ती पर 25,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी.
- 20 किलोग्राम या उससे अधिक विस्फोटक के साथ हथियार की जब्ती के मामले में मदद करने वाले शख्स को एक लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी.
- किसी भी ग्राम पंचायत में सक्रिय सभी नक्सली सदस्यों और मिलिशिया के सरेंडर पर एक करोड़ रुपये के विकास कार्य की स्वीकृति तुरंत मिलेगी.
नक्सलवाद के खिलाफ साय सरकार जंग तेज कर चुकी है. आने वाले समय में एंटी नक्सल ऑपरेशन में और तेजी आने की उम्मीद है. नक्सलवाद पर चारों तरफ से प्रहार की तैयारी साय सरकार की पॉलिसी में दिख रही है.
