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छत्तीसगढ़ में आज से स्कूलों की रौनक लौटी, सरकार का दावा- राज्य में अब कोई भी स्कूल शिक्षक विहीन नहीं
Raipur, CG
गर्मियों की छुट्टियों के बाद सोमवार, 16 जून से छत्तीसगढ़ के सभी सरकारी और गैर-सरकारी स्कूल पुनः खुल गए। राजधानी रायपुर समेत प्रदेश भर में ‘शाला प्रवेश उत्सव’ की धूम रही। बिलासपुर, जगदलपुर, रायगढ़, दुर्ग और भिलाई जैसे प्रमुख जिलों में शिक्षकों ने विद्यार्थियों का उत्साहपूर्वक स्वागत किया।
ब्लॉक और जिला स्तर पर भी होंगे आयोजन
रायपुर के जिला शिक्षा अधिकारी विजय खंडेलवाल ने जानकारी दी कि शाला प्रवेश उत्सव 18 जून को ब्लॉक स्तर और 20 जून को जिला स्तर पर आयोजित किया जाएगा। इन आयोजनों का मुख्य उद्देश्य स्कूलों में अधिकतम नामांकन सुनिश्चित करना और शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। रायपुर के दानी गर्ल्स स्कूल में इस अवसर पर एक बड़ा आयोजन प्रस्तावित है।
अब शिक्षकविहीन नहीं कोई स्कूल: सरकार
राज्य सरकार ने हाल ही में शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया पूरी की है। इसके तहत यह दावा किया गया है कि अब प्रदेश का कोई भी स्कूल शिक्षक विहीन नहीं है। जानकारी के अनुसार, पूर्व में 212 प्राथमिक और 48 पूर्व माध्यमिक स्कूलों में शिक्षक नहीं थे। इसके अलावा, 6872 प्राथमिक और 255 पूर्व माध्यमिक स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे थे। अब इन सभी में उचित संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति की गई है।
कम उपस्थिति वाले 166 स्कूलों का हुआ विलय
राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए 211 ऐसे स्कूलों की भी पहचान की गई थी जहां छात्र नहीं थे लेकिन शिक्षक पदस्थ थे। सरकार ने इनमें से 166 स्कूलों को मर्ज कर दिया है, जिनमें 133 ग्रामीण क्षेत्र के और 33 शहरी क्षेत्र के स्कूल शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने लिखी जनप्रतिनिधियों को चिट्ठी
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेश के सभी जनप्रतिनिधियों को पत्र लिखकर ‘शाला प्रवेश उत्सव’ में भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि राज्य को शत-प्रतिशत साक्षर बनाने का लक्ष्य कठिन अवश्य है, लेकिन असंभव नहीं। उन्होंने इस दिशा में सामूहिक प्रयास की आवश्यकता पर बल दिया।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम और राष्ट्रीय शिक्षा नीति को मिलेगा बल
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत यह प्रयास किया जा रहा है कि कक्षा 12वीं तक स्कूली शिक्षा छोड़ने की दर शून्य पर लाई जा सके। इसके लिए मुख्यमंत्री ‘शिक्षा गुणवत्ता अभियान’ की शुरुआत करने जा रहे हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर को मिली प्राथमिकता
सीएम साय ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर और मूलभूत सुविधाओं के विकास को अपनी शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल कर चुकी है। साथ ही, उन्होंने जनप्रतिनिधियों से भी अपील की कि वे इस अभियान में व्यक्तिगत भागीदारी निभाकर यह सुनिश्चित करें कि राज्य का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।
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Raipur, CG
ब्लॉक और जिला स्तर पर भी होंगे आयोजन
रायपुर के जिला शिक्षा अधिकारी विजय खंडेलवाल ने जानकारी दी कि शाला प्रवेश उत्सव 18 जून को ब्लॉक स्तर और 20 जून को जिला स्तर पर आयोजित किया जाएगा। इन आयोजनों का मुख्य उद्देश्य स्कूलों में अधिकतम नामांकन सुनिश्चित करना और शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। रायपुर के दानी गर्ल्स स्कूल में इस अवसर पर एक बड़ा आयोजन प्रस्तावित है।
अब शिक्षकविहीन नहीं कोई स्कूल: सरकार
राज्य सरकार ने हाल ही में शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया पूरी की है। इसके तहत यह दावा किया गया है कि अब प्रदेश का कोई भी स्कूल शिक्षक विहीन नहीं है। जानकारी के अनुसार, पूर्व में 212 प्राथमिक और 48 पूर्व माध्यमिक स्कूलों में शिक्षक नहीं थे। इसके अलावा, 6872 प्राथमिक और 255 पूर्व माध्यमिक स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे थे। अब इन सभी में उचित संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति की गई है।
कम उपस्थिति वाले 166 स्कूलों का हुआ विलय
राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए 211 ऐसे स्कूलों की भी पहचान की गई थी जहां छात्र नहीं थे लेकिन शिक्षक पदस्थ थे। सरकार ने इनमें से 166 स्कूलों को मर्ज कर दिया है, जिनमें 133 ग्रामीण क्षेत्र के और 33 शहरी क्षेत्र के स्कूल शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने लिखी जनप्रतिनिधियों को चिट्ठी
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेश के सभी जनप्रतिनिधियों को पत्र लिखकर ‘शाला प्रवेश उत्सव’ में भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि राज्य को शत-प्रतिशत साक्षर बनाने का लक्ष्य कठिन अवश्य है, लेकिन असंभव नहीं। उन्होंने इस दिशा में सामूहिक प्रयास की आवश्यकता पर बल दिया।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम और राष्ट्रीय शिक्षा नीति को मिलेगा बल
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत यह प्रयास किया जा रहा है कि कक्षा 12वीं तक स्कूली शिक्षा छोड़ने की दर शून्य पर लाई जा सके। इसके लिए मुख्यमंत्री ‘शिक्षा गुणवत्ता अभियान’ की शुरुआत करने जा रहे हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर को मिली प्राथमिकता
सीएम साय ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर और मूलभूत सुविधाओं के विकास को अपनी शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल कर चुकी है। साथ ही, उन्होंने जनप्रतिनिधियों से भी अपील की कि वे इस अभियान में व्यक्तिगत भागीदारी निभाकर यह सुनिश्चित करें कि राज्य का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।
