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महिला कमांडो देश के लिए बन रही रोल मॉडल, AK-47 लेकर उतरती हैं नक्सली मोर्चे पर
Special News
बस्तर के जंगलों में जब इनके बूटों की धमक होती है तो नक्सली जान बचाकर जंगल में भागते फिरते हैं.
बस्तर की खूबसूरत वादियों में पिछले चार दशकों से नक्सली खून की होली खेल रहे हैं. माओवादी हिंसा को खत्म करने के लिए अब बस्तर में महिला कमांडो की तैनाती कर दी गई है. सीआरपीएफ की जांबाज महिला कमांडो लाल आतंक पर बिजली की तरह टूट रही हैं. महिला कमांडो की टीम साथी जवानों के साथ कदम से कदम मिलाकर जंगल में माओवादियों से लोहा ले रही हैं. चूड़ियों से सजी कलाइयों में जब ये कमांडो AK 47 लेकर निकलती हैं तो दुश्मनों के दिल कांप जाते हैं. इनके भीतर राष्ट्रभक्ति का ऐसा जज्बा भरा है कि बीड़ह जंगलों और माओवादियों की मांद में भी घुसने से नहीं डरती हैं. नक्सलियों से जब इनका सामना होता है तो इनका टारगेट सिर्फ एक होता है, वो है लाल आतंक का खात्मा.
महिला कमांडो की टीम संभाल रही मोर्चा: विकास के रास्ते में रोड़ा बने माओवाद से निपटने के लिए बस्तर में पैरामिलिट्री फोर्स की तैनाती की गई है. बस्तर में तैनात सीआरपीएफ के सामने जब स्थानीय भाषा और भौगोलिक जानकारियों को लेकर समस्या आने लगी तब जवान परेशान होने लगे. माओवादियों के दबाव में ग्रामीण कई बार जवानों पर झूठे आरोप लगाने लगे. तब पहली बार सीआरपीएफ ने बस्तर के युवाओं को मौका देने के उद्देश्य से बस्तर बटालियन बनाने का फैसला किया. इस फैसले के तहत इनमें एक तिहाई महिलाओं की भी भर्ती की गई. आज सीआरपीएफ की यह महिला कमांडो की टीम बस्तर के बेहद संवेदनशील क्षेत्रों में बखूबी अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं. कमांडो की टीम में शामिल महिला जवान अपनी तैनाती को लेकर बेहद उत्साहित हैं, खुद को सौभाग्यशाली मानती हैं कि उनको देश सेवा का मौका मिला.
मुझे बहुत गर्व है कि मैं एक सोल्जर हूं. मुझे इस कार्य में बहुत गर्व है. पुरुष जवान भी बस्तर में तैनात हैं. हम महिलाओं को पुरुष जवानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने में काफी गर्व हो रहा है - प्रियंका कुजूर, महिला कमांडो
''मुझे सोल्जर होने पर गर्व'': सीआरपीएफ की महिला कमांडो टीम में शामिल महिला जवान कहती हैं कि उनको अपने सोल्जर होने पर गर्व है. बस्तर के चप्पे चप्पे पर आज वो सुरक्षा की ढाल बनकर ड्यूटी दे रही हैं. साथी पुरुष जवानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अबूझमाड़ के जंगल तक को बहादुरी से खंगाल रही हैं. महिला कमांडो एक सुर में कहती हैं कि उनको गर्व है कि उनका चयन देश और प्रदेश की सेवा के लिए किया गया है.
अपने आप को बहुत भाग्यशाली मानती हूं कि देश के लिए कुछ करने का मौका मिला. मुझे यहां बहुत अच्छा लगता है. जो काम पुरुष कर सकते हैं, वह महिला भी कर सकती है. मैं नई पीढ़ी को यह संदेश देना चाहती हूं कि महिला हर वो काम कर सकती है, जो पुरुष कर सकते हैं - सुमिता नाग, महिला कमांडो
हमें प्राउड फील होता है कि हम अपने पैरों पर खड़े हैं. पहले माता पिता पर डिपेंड थे. अब खुद नौकरी भी कर रहे हैं और घर परिवार को भी देख रहे हैं, उनकी जरुरतें पूरी कर रहे हैं. बहुत लोग या परिवार ऐसे हैं जो लड़कियों को सपोर्ट नहीं करते हैं. वो सोचते हैं कि ये तो लड़कियां हैं, घर से दूर कैसे जा सकती है. ऐसी कई समस्याएं आती हैं. लेकिन लड़कियां चाहें तो वह कुछ भी काम कर सकती हैं, वह खुद फोर्स ज्वाइन कर सकती हैं - रोशनी भास्कर, महिला कमांडो
''हम किसी से कम नहीं'': महिला कमांडो कहती हैं कि जब वो सर्च ऑपरेशन पर निकलती हैं तो उनका मकसद सिर्फ अपने दुश्मनों को टारगेट करने पर होता है. महिला कमांडो टीम में शामिल जवान शारीरिक रुप से भी मजबूत हैं और मानसिक रुप से भी. ड्यूटी के साथ साथ पारिवारिक जिम्मेदारियों को भी ये बखूबी निभा रही हैं. माता पिता से लेकर पति और बच्चों का ख्याल भी उसी शिद्दत से रखती हैं जिस तरह से एक आम महिला रखती है. मुश्किल नौकरी और घर के बीच जिस तरह से ये सामांजस्य बनाकर चल रही हैं वो काबिले तारीफ है. आज ये महिला कमांडो बस्तर की बेटियों के लिए रोल मॉडल बन चुकी हैं.
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बस्तर की खूबसूरत वादियों में पिछले चार दशकों से नक्सली खून की होली खेल रहे हैं. माओवादी हिंसा को खत्म करने के लिए अब बस्तर में महिला कमांडो की तैनाती कर दी गई है. सीआरपीएफ की जांबाज महिला कमांडो लाल आतंक पर बिजली की तरह टूट रही हैं. महिला कमांडो की टीम साथी जवानों के साथ कदम से कदम मिलाकर जंगल में माओवादियों से लोहा ले रही हैं. चूड़ियों से सजी कलाइयों में जब ये कमांडो AK 47 लेकर निकलती हैं तो दुश्मनों के दिल कांप जाते हैं. इनके भीतर राष्ट्रभक्ति का ऐसा जज्बा भरा है कि बीड़ह जंगलों और माओवादियों की मांद में भी घुसने से नहीं डरती हैं. नक्सलियों से जब इनका सामना होता है तो इनका टारगेट सिर्फ एक होता है, वो है लाल आतंक का खात्मा.
महिला कमांडो की टीम संभाल रही मोर्चा: विकास के रास्ते में रोड़ा बने माओवाद से निपटने के लिए बस्तर में पैरामिलिट्री फोर्स की तैनाती की गई है. बस्तर में तैनात सीआरपीएफ के सामने जब स्थानीय भाषा और भौगोलिक जानकारियों को लेकर समस्या आने लगी तब जवान परेशान होने लगे. माओवादियों के दबाव में ग्रामीण कई बार जवानों पर झूठे आरोप लगाने लगे. तब पहली बार सीआरपीएफ ने बस्तर के युवाओं को मौका देने के उद्देश्य से बस्तर बटालियन बनाने का फैसला किया. इस फैसले के तहत इनमें एक तिहाई महिलाओं की भी भर्ती की गई. आज सीआरपीएफ की यह महिला कमांडो की टीम बस्तर के बेहद संवेदनशील क्षेत्रों में बखूबी अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं. कमांडो की टीम में शामिल महिला जवान अपनी तैनाती को लेकर बेहद उत्साहित हैं, खुद को सौभाग्यशाली मानती हैं कि उनको देश सेवा का मौका मिला.
मुझे बहुत गर्व है कि मैं एक सोल्जर हूं. मुझे इस कार्य में बहुत गर्व है. पुरुष जवान भी बस्तर में तैनात हैं. हम महिलाओं को पुरुष जवानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने में काफी गर्व हो रहा है - प्रियंका कुजूर, महिला कमांडो
''मुझे सोल्जर होने पर गर्व'': सीआरपीएफ की महिला कमांडो टीम में शामिल महिला जवान कहती हैं कि उनको अपने सोल्जर होने पर गर्व है. बस्तर के चप्पे चप्पे पर आज वो सुरक्षा की ढाल बनकर ड्यूटी दे रही हैं. साथी पुरुष जवानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अबूझमाड़ के जंगल तक को बहादुरी से खंगाल रही हैं. महिला कमांडो एक सुर में कहती हैं कि उनको गर्व है कि उनका चयन देश और प्रदेश की सेवा के लिए किया गया है.
अपने आप को बहुत भाग्यशाली मानती हूं कि देश के लिए कुछ करने का मौका मिला. मुझे यहां बहुत अच्छा लगता है. जो काम पुरुष कर सकते हैं, वह महिला भी कर सकती है. मैं नई पीढ़ी को यह संदेश देना चाहती हूं कि महिला हर वो काम कर सकती है, जो पुरुष कर सकते हैं - सुमिता नाग, महिला कमांडो
हमें प्राउड फील होता है कि हम अपने पैरों पर खड़े हैं. पहले माता पिता पर डिपेंड थे. अब खुद नौकरी भी कर रहे हैं और घर परिवार को भी देख रहे हैं, उनकी जरुरतें पूरी कर रहे हैं. बहुत लोग या परिवार ऐसे हैं जो लड़कियों को सपोर्ट नहीं करते हैं. वो सोचते हैं कि ये तो लड़कियां हैं, घर से दूर कैसे जा सकती है. ऐसी कई समस्याएं आती हैं. लेकिन लड़कियां चाहें तो वह कुछ भी काम कर सकती हैं, वह खुद फोर्स ज्वाइन कर सकती हैं - रोशनी भास्कर, महिला कमांडो
''हम किसी से कम नहीं'': महिला कमांडो कहती हैं कि जब वो सर्च ऑपरेशन पर निकलती हैं तो उनका मकसद सिर्फ अपने दुश्मनों को टारगेट करने पर होता है. महिला कमांडो टीम में शामिल जवान शारीरिक रुप से भी मजबूत हैं और मानसिक रुप से भी. ड्यूटी के साथ साथ पारिवारिक जिम्मेदारियों को भी ये बखूबी निभा रही हैं. माता पिता से लेकर पति और बच्चों का ख्याल भी उसी शिद्दत से रखती हैं जिस तरह से एक आम महिला रखती है. मुश्किल नौकरी और घर के बीच जिस तरह से ये सामांजस्य बनाकर चल रही हैं वो काबिले तारीफ है. आज ये महिला कमांडो बस्तर की बेटियों के लिए रोल मॉडल बन चुकी हैं.
