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खड़ी खेती में बुलडोजर चलाने के मामले ने पकड़ा तूल, खेत पर पहुंची कांग्रेस, तो फूट-फूटकर रोने लगे किसान
Ashoknagar, MP
किसानों के खड़ी फसल पर बुलडोजर चलाने का मामला सियासी तूल पकड़ रहा है. इस मामले पर कांग्रेस ने प्रशासन और सरकार को आड़े हाथों लिया है. किसान नेता पीड़ित किसानों के बीच पहुंचे हैं. पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने भी बात की है.
बुलडोजर एक्शन के बाद मध्य प्रदेश के अशोकनगर के किसानों की पीड़ा अब भोपाल तक पहुंच गई है. बीते दिनों जिले के करीला में कानीखेड़ी के किसानों की फसलों और घरों पर प्रशासन ने बुलडोजर चलाया था. अवैध अतिक्रमण किए किसानों की जमीन को फॉरेस्ट के अधिकारियों ने राजस्व के अधिकारियों के साथ मिलकर किसानों की लहलहाती फसलों पर बुलडोजर चलाया था. लेकिन अब इस कार्रवाई न केवल सवाल खड़े हो रहे हैं. बल्कि कांग्रेस भी आक्रामक मुद्रा में नजर आ रही है. आज कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री यादवेंद्र सिंह यादव इन किसानों की उजड़े खेतों व घरों पर पहुंचे. उजड़ी फसल पर बैठकर किसानों की प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी से बात कराई, जिसमें जीतू पटवारी विधानसभा में किसानों का मुद्दा उठाने का आश्वासन देते नजर आ रहे हैं.
'पीड़ित बिलख-बिलख कर रो पड़े'
जैसे ही यादवेन्द्र ग्रामीणों के बीच पहुंचे, तो खंडहर हो चुके घरों में बची कुची गृहस्थी समेट रहे पीड़ित बिलख-बिलख कर रो पड़े. यादवेन्द्र ने खेत में ही जमीन पर बैठकर किसानों को ढांढस बंधाया और मरते दम तक उनके न्याय के लिए लड़ने का भरोसा दिया. किसानों का आरोप था कि प्रशासन द्वारा उनके मकान तोड़ने के नोटिस दिए गए थे. लेकिन ऐन वक्त पर फसलें उजाड़ दी, जबकि नोटिस मिलने के बाद उन लोगों ने अपने घरों को खुद ही खंडहर कर लिया था. किसानों का कहना था कि समूचा कानीखेड़ी गांव ही वन भूमि में बसा हुआ है. उन्हें उनके गांव से उजड़ने से पहले मुआवजा और विस्थापन के लिए पट्टे देने चाहिए थे.
प्रदेश अध्यक्ष से करवाई फोन पर बात
शुक्रवार को प्रशासन ने जिस रामपाल यादव का घर और करीब सात बीघा में खड़ी गेंहू की फसल पर बुलडोजर चलाया था. उस किसान की बात यादवेन्द्र सिंह ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी से फोन पर कराई. प्रदेश अध्यक्ष ने किसानों को न्याय का भरोसा दिया और कहा कि वह उनके साथ प्रशासन की ईंट से ईंट बजाने तैयार खड़े हैं.
पेड़ों के नीचे बिस्तर, हाथ में लेकर रोटियां खा रहे पीड़ित
वन विभाग की कार्रवाई के बाद कानीखेड़ी के पीड़ितों के बेहद बुरे हाल हैं. वह पेड़ों के नीचे गृहस्थी जमाए हैं. एक घर में बर्तन तक नहीं बचे थे, लोग हाथों में रोटियां लेकर खा रहे थे. दो बातें खुले में जागकर इन ग्रामीणों ने बिताई हैं.
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खड़ी खेती में बुलडोजर चलाने के मामले ने पकड़ा तूल, खेत पर पहुंची कांग्रेस, तो फूट-फूटकर रोने लगे किसान
Ashoknagar, MP
बुलडोजर एक्शन के बाद मध्य प्रदेश के अशोकनगर के किसानों की पीड़ा अब भोपाल तक पहुंच गई है. बीते दिनों जिले के करीला में कानीखेड़ी के किसानों की फसलों और घरों पर प्रशासन ने बुलडोजर चलाया था. अवैध अतिक्रमण किए किसानों की जमीन को फॉरेस्ट के अधिकारियों ने राजस्व के अधिकारियों के साथ मिलकर किसानों की लहलहाती फसलों पर बुलडोजर चलाया था. लेकिन अब इस कार्रवाई न केवल सवाल खड़े हो रहे हैं. बल्कि कांग्रेस भी आक्रामक मुद्रा में नजर आ रही है. आज कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री यादवेंद्र सिंह यादव इन किसानों की उजड़े खेतों व घरों पर पहुंचे. उजड़ी फसल पर बैठकर किसानों की प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी से बात कराई, जिसमें जीतू पटवारी विधानसभा में किसानों का मुद्दा उठाने का आश्वासन देते नजर आ रहे हैं.
'पीड़ित बिलख-बिलख कर रो पड़े'
जैसे ही यादवेन्द्र ग्रामीणों के बीच पहुंचे, तो खंडहर हो चुके घरों में बची कुची गृहस्थी समेट रहे पीड़ित बिलख-बिलख कर रो पड़े. यादवेन्द्र ने खेत में ही जमीन पर बैठकर किसानों को ढांढस बंधाया और मरते दम तक उनके न्याय के लिए लड़ने का भरोसा दिया. किसानों का आरोप था कि प्रशासन द्वारा उनके मकान तोड़ने के नोटिस दिए गए थे. लेकिन ऐन वक्त पर फसलें उजाड़ दी, जबकि नोटिस मिलने के बाद उन लोगों ने अपने घरों को खुद ही खंडहर कर लिया था. किसानों का कहना था कि समूचा कानीखेड़ी गांव ही वन भूमि में बसा हुआ है. उन्हें उनके गांव से उजड़ने से पहले मुआवजा और विस्थापन के लिए पट्टे देने चाहिए थे.
प्रदेश अध्यक्ष से करवाई फोन पर बात
शुक्रवार को प्रशासन ने जिस रामपाल यादव का घर और करीब सात बीघा में खड़ी गेंहू की फसल पर बुलडोजर चलाया था. उस किसान की बात यादवेन्द्र सिंह ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी से फोन पर कराई. प्रदेश अध्यक्ष ने किसानों को न्याय का भरोसा दिया और कहा कि वह उनके साथ प्रशासन की ईंट से ईंट बजाने तैयार खड़े हैं.
पेड़ों के नीचे बिस्तर, हाथ में लेकर रोटियां खा रहे पीड़ित
वन विभाग की कार्रवाई के बाद कानीखेड़ी के पीड़ितों के बेहद बुरे हाल हैं. वह पेड़ों के नीचे गृहस्थी जमाए हैं. एक घर में बर्तन तक नहीं बचे थे, लोग हाथों में रोटियां लेकर खा रहे थे. दो बातें खुले में जागकर इन ग्रामीणों ने बिताई हैं.
