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11 साल की दिव्यांग ने दुर्व्यवहार के हफ्तेभर बाद तोड़ा दम, दर्द में अस्पताल के वेंटिलेटर पर रही, पुलिस ने जलाई चिता
Rajgad, MP
दुर्व्यवहार की शिकार 11 वर्षीय मूक-बधिर लड़की ने करीब एक हफ्ते जीवन संघर्ष करने के बाद दम तोड़ दिया। पुलिस को अब तक दोषी का सुराग नहीं मिला है। बच्ची खून से सने कपड़ों में मिली थी और हालत गंभीर थी। मामले की जांच के लिए 20 सदस्यीय एसआईटी टीम बनाई गई है।
मध्य प्रदेश के नरसिंहगढ़ में दुर्व्यवहार की शिकार 11 वर्षीय मूक-बधिर लड़की ने लगभग एक हफ़्ते तक ज़िंदगी की जंग लड़ने के बाद शुक्रवार रात अस्पताल में दम तोड़ दिया। इस बीच पुलिस को अपराधी के बारे में कोई सुराग नहीं मिला। यह घटना 1 फरवरी को संजय नगर के जंगलों में हुई थी, जो नरसिंहगढ़ पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आता है।
शनिवार को पुलिस ने ही बच्ची की चिता जलाई। उसके पिता और दादा की बहुत पहले मौत हो चुकी थी। वह अपनी दादी, एक चाची और एक गंभीर रूप से बीमार चाचा के साथ रहती थी। परिवार खानाबदोश है और एक 'डेरा' में रहता है।
एक हफ्ते पहले गायब हुई थी मासूम
1 फरवरी की रात को बच्ची लापता हो गई थी। पुलिस ने पुष्टि की है कि अगले दिन 2 फरवरी को बच्ची नरसिंहगढ़ विश्राम गृह के पीछे खून से लथपथ हालत में मिली थी। 3 फरवरी तक उसे चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाई थी।
खून से सने मिले कपड़े
बच्ची के परिवार ने अपराध के कम से कम दो दिन बाद तक शिकायत दर्ज नहीं कराई, जब तक कि एक स्थानीय आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने बच्ची के खून से सने कपड़े नहीं देखे और उसने शोर नहीं मचाया। नाबालिग की हालत तब तक गंभीर हो चुकी थी।
अस्पताल में वेंटिलेटर पर रही दिव्यांग
पुलिस लड़की को अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने दुर्व्यहार का संदेह जताया और उसकी तबीयत बिगड़ने पर उसे भोपाल रेफर कर दिया। वह भोपाल के अस्पताल में वेंटिलेटर पर थी और उसकी सुधारात्मक सर्जरी की गई, लेकिन उसकी हालत बिगड़ती रही। 3 फरवरी को उसे भोपाल के हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि नरसिंहगढ़ पुलिस ने मामला दर्ज किया। चार दिन बाद रात करीब 10 बजे उसकी मौत हो गई
पुलिस का कहना
एसपी मिश्रा ने मामले पर कहा कि 20 सदस्यीय एसआईटी का गठन किया गया है। इसमें फॉरेंसिक और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं। इसमें दो वरिष्ठ निरीक्षक और पांच उपनिरीक्षक हैं। मामले पर एक साइबर टीम भी है। उन्होंने कहा कि वे अपराधी को गिरफ्तार करने के लिए दृढ़ हैं।
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11 साल की दिव्यांग ने दुर्व्यवहार के हफ्तेभर बाद तोड़ा दम, दर्द में अस्पताल के वेंटिलेटर पर रही, पुलिस ने जलाई चिता
Rajgad, MP
मध्य प्रदेश के नरसिंहगढ़ में दुर्व्यवहार की शिकार 11 वर्षीय मूक-बधिर लड़की ने लगभग एक हफ़्ते तक ज़िंदगी की जंग लड़ने के बाद शुक्रवार रात अस्पताल में दम तोड़ दिया। इस बीच पुलिस को अपराधी के बारे में कोई सुराग नहीं मिला। यह घटना 1 फरवरी को संजय नगर के जंगलों में हुई थी, जो नरसिंहगढ़ पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आता है।
शनिवार को पुलिस ने ही बच्ची की चिता जलाई। उसके पिता और दादा की बहुत पहले मौत हो चुकी थी। वह अपनी दादी, एक चाची और एक गंभीर रूप से बीमार चाचा के साथ रहती थी। परिवार खानाबदोश है और एक 'डेरा' में रहता है।
एक हफ्ते पहले गायब हुई थी मासूम
1 फरवरी की रात को बच्ची लापता हो गई थी। पुलिस ने पुष्टि की है कि अगले दिन 2 फरवरी को बच्ची नरसिंहगढ़ विश्राम गृह के पीछे खून से लथपथ हालत में मिली थी। 3 फरवरी तक उसे चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाई थी।
खून से सने मिले कपड़े
बच्ची के परिवार ने अपराध के कम से कम दो दिन बाद तक शिकायत दर्ज नहीं कराई, जब तक कि एक स्थानीय आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने बच्ची के खून से सने कपड़े नहीं देखे और उसने शोर नहीं मचाया। नाबालिग की हालत तब तक गंभीर हो चुकी थी।
अस्पताल में वेंटिलेटर पर रही दिव्यांग
पुलिस लड़की को अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने दुर्व्यहार का संदेह जताया और उसकी तबीयत बिगड़ने पर उसे भोपाल रेफर कर दिया। वह भोपाल के अस्पताल में वेंटिलेटर पर थी और उसकी सुधारात्मक सर्जरी की गई, लेकिन उसकी हालत बिगड़ती रही। 3 फरवरी को उसे भोपाल के हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि नरसिंहगढ़ पुलिस ने मामला दर्ज किया। चार दिन बाद रात करीब 10 बजे उसकी मौत हो गई
पुलिस का कहना
एसपी मिश्रा ने मामले पर कहा कि 20 सदस्यीय एसआईटी का गठन किया गया है। इसमें फॉरेंसिक और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं। इसमें दो वरिष्ठ निरीक्षक और पांच उपनिरीक्षक हैं। मामले पर एक साइबर टीम भी है। उन्होंने कहा कि वे अपराधी को गिरफ्तार करने के लिए दृढ़ हैं।
