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"19 सितंबर महाकाल भस्म आरती: रजत मुकुट और फूलों के श्रृंगार में सजे महादेव"
UJJAIN, MP
आश्विन माह कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर शुक्रवार तड़के उज्जैन के विश्वप्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के कपाट प्रातः 4 बजे खोले गए। परंपरा के अनुसार सबसे पहले भगवान महाकाल का जलाभिषेक हुआ। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक कर विशेष पूजन किया गया।
दिव्य श्रृंगार और भस्म चढ़ाई
इस अवसर पर भगवान महाकाल को भस्म चढ़ाई गई। बाबा को रजत निर्मित शेषनाग मुकुट, रजत की मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों से बनी मालाओं से अलंकृत किया गया। विशेष भोग के रूप में फल और मिष्ठान अर्पित किए गए। साथ ही ड्रायफ्रूट से आकर्षक श्रृंगार कर बाबा को भक्तिरस में रंजित किया गया।
जयकारों से गूंजा मंदिर परिसर
पूरे मंदिर परिसर में "जय श्री महाकाल" और "हर-हर महादेव" के गगनभेदी जयकारों से वातावरण गूंजायमान रहा। श्रद्धालुओं ने गहरी आस्था और भक्ति भाव से बाबा का दर्शन किया।
महाकाल की भस्म आरती अपने आप में अद्वितीय और विश्व प्रसिद्ध है, जो हर दिन अलसुबह होने वाली इस परंपरा को और भी विशेष बना देती है।

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"19 सितंबर महाकाल भस्म आरती: रजत मुकुट और फूलों के श्रृंगार में सजे महादेव"
UJJAIN, MP
आश्विन माह कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर शुक्रवार तड़के उज्जैन के विश्वप्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के कपाट प्रातः 4 बजे खोले गए। परंपरा के अनुसार सबसे पहले भगवान महाकाल का जलाभिषेक हुआ। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक कर विशेष पूजन किया गया।
दिव्य श्रृंगार और भस्म चढ़ाई
इस अवसर पर भगवान महाकाल को भस्म चढ़ाई गई। बाबा को रजत निर्मित शेषनाग मुकुट, रजत की मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों से बनी मालाओं से अलंकृत किया गया। विशेष भोग के रूप में फल और मिष्ठान अर्पित किए गए। साथ ही ड्रायफ्रूट से आकर्षक श्रृंगार कर बाबा को भक्तिरस में रंजित किया गया।
जयकारों से गूंजा मंदिर परिसर
पूरे मंदिर परिसर में "जय श्री महाकाल" और "हर-हर महादेव" के गगनभेदी जयकारों से वातावरण गूंजायमान रहा। श्रद्धालुओं ने गहरी आस्था और भक्ति भाव से बाबा का दर्शन किया।
महाकाल की भस्म आरती अपने आप में अद्वितीय और विश्व प्रसिद्ध है, जो हर दिन अलसुबह होने वाली इस परंपरा को और भी विशेष बना देती है।

