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23 मई महाकाल भस्म आरती: राजा स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, उमड़े श्रद्धालु
उज्जैन (म.प्र.)
उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में 23 मई की भस्म आरती में बाबा महाकाल का दिव्य राजा स्वरूप श्रृंगार हुआ। सुबह से उमड़े श्रद्धालु।
उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार तड़के 23 मई को भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल का बेहद आकर्षक और दिव्य श्रृंगार किया गया। ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर सुबह करीब 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए, उसके बाद गर्भगृह में पूजा और खास अनुष्ठान शुरू हुए। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें नजर आईं। कई भक्त भस्म आरती में शामिल होने के लिए देर रात से ही मंदिर पहुंच गए थे। महाकाल भस्म आरती के समय पूरा परिसर 'हर-हर महादेव' और 'जय बाबा महाकाल' के जयकारों से गूंजता रहा।
धार्मिक विधियों के तहत पुजारियों ने सबसे पहले गर्भगृह में विराजमान देवी-देवताओं का पूजन किया। फिर भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। मंदिर की परंपरा के अनुसार दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया। आज के श्रृंगार में खास तौर पर भांग, चंदन और सुगंधित पुष्पों का उपयोग किया गया। भगवान महाकाल को राजा स्वरूप में सजाया गया, जिसमें रजत का मुकुट, रुद्राक्ष की माला और मुण्डमाल आकर्षण का केंद्र बना। आरती के समय गर्भगृह का दृश्य बेहद अलौकिक लग रहा था। मंदिर में मौजूद श्रद्धालु लगातार दर्शन करने की कोशिश करते नजर आए।
भस्म अर्पण से पहले परंपरा के अनुसार पहले घंटा बजाया गया और हरिओम का जल अर्पित किया गया। मंत्रोच्चार के बीच बाबा महाकाल का ध्यान किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़ों से ढंककर भस्म रमाई गई। इसी दौरान मंदिर परिसर में मौजूद भक्तों ने नंदी महाराज के दर्शन भी किए। कई लोग नंदी के कान में अपनी मनोकामनाएं कहते नजर आए। सुबह होते-होते मंदिर परिसर भक्तों से पूरी तरह भर चुका था। सप्ताहांत और खास तारीख होने के कारण दर्शनार्थियों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में अधिक रही। मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था के लिए अतिरिक्त इंतजाम भी किए थे। उज्जैन का सुबह का माहौल पूरी तरह भक्तिमय नजर आ रहा था और दूर-दूर से आए श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन कर भावुक दिखे।
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23 मई महाकाल भस्म आरती: राजा स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, उमड़े श्रद्धालु
उज्जैन (म.प्र.)
उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार तड़के 23 मई को भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल का बेहद आकर्षक और दिव्य श्रृंगार किया गया। ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर सुबह करीब 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए, उसके बाद गर्भगृह में पूजा और खास अनुष्ठान शुरू हुए। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें नजर आईं। कई भक्त भस्म आरती में शामिल होने के लिए देर रात से ही मंदिर पहुंच गए थे। महाकाल भस्म आरती के समय पूरा परिसर 'हर-हर महादेव' और 'जय बाबा महाकाल' के जयकारों से गूंजता रहा।
धार्मिक विधियों के तहत पुजारियों ने सबसे पहले गर्भगृह में विराजमान देवी-देवताओं का पूजन किया। फिर भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। मंदिर की परंपरा के अनुसार दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया। आज के श्रृंगार में खास तौर पर भांग, चंदन और सुगंधित पुष्पों का उपयोग किया गया। भगवान महाकाल को राजा स्वरूप में सजाया गया, जिसमें रजत का मुकुट, रुद्राक्ष की माला और मुण्डमाल आकर्षण का केंद्र बना। आरती के समय गर्भगृह का दृश्य बेहद अलौकिक लग रहा था। मंदिर में मौजूद श्रद्धालु लगातार दर्शन करने की कोशिश करते नजर आए।
भस्म अर्पण से पहले परंपरा के अनुसार पहले घंटा बजाया गया और हरिओम का जल अर्पित किया गया। मंत्रोच्चार के बीच बाबा महाकाल का ध्यान किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़ों से ढंककर भस्म रमाई गई। इसी दौरान मंदिर परिसर में मौजूद भक्तों ने नंदी महाराज के दर्शन भी किए। कई लोग नंदी के कान में अपनी मनोकामनाएं कहते नजर आए। सुबह होते-होते मंदिर परिसर भक्तों से पूरी तरह भर चुका था। सप्ताहांत और खास तारीख होने के कारण दर्शनार्थियों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में अधिक रही। मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था के लिए अतिरिक्त इंतजाम भी किए थे। उज्जैन का सुबह का माहौल पूरी तरह भक्तिमय नजर आ रहा था और दूर-दूर से आए श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन कर भावुक दिखे।
