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28 अक्टूबर महाकाल भस्म आरती: बाबा के मस्तक पर ॐ अंकित कर ड्रायफ्रूट से हुआ दिव्य अलंकरण
Ujjain, MP
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में कार्तिक माह शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर मंगलवार तड़के भस्म आरती भव्यता और वैदिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। तड़के 4 बजे मंदिर के कपाट खुलने के साथ ही गर्भगृह में भगवान महाकाल का दिव्य श्रृंगार प्रारंभ हुआ।
पूजन-अर्चन के दौरान पुजारियों ने पहले गर्भगृह में स्थापित देवी-देवताओं का पूजन किया, फिर भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक हुआ।
भस्म अर्पण से पहले प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान किया गया। इसके बाद कपूर आरती के उपरांत ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढांककर भस्म रमाई गई।
आज के श्रृंगार में भगवान महाकाल के मस्तक पर ॐ का चिह्न अंकित कर ड्रायफ्रूट से विशेष श्रृंगार किया गया। तत्पश्चात रजत शेषनाग मुकुट, रजत मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों की मालाएं अर्पित की गईं। मंदिर परिसर भक्ति, भजन और घंटानाद से गूंज उठा।
पूरे मंदिर परिसर में दिव्यता और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला, जबकि पुजारियों ने दिनभर चलने वाले विशेष कार्तिक पूजन की शुरुआत की।

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28 अक्टूबर महाकाल भस्म आरती: बाबा के मस्तक पर ॐ अंकित कर ड्रायफ्रूट से हुआ दिव्य अलंकरण
Ujjain, MP
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में कार्तिक माह शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर मंगलवार तड़के भस्म आरती भव्यता और वैदिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। तड़के 4 बजे मंदिर के कपाट खुलने के साथ ही गर्भगृह में भगवान महाकाल का दिव्य श्रृंगार प्रारंभ हुआ।
पूजन-अर्चन के दौरान पुजारियों ने पहले गर्भगृह में स्थापित देवी-देवताओं का पूजन किया, फिर भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक हुआ।
भस्म अर्पण से पहले प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान किया गया। इसके बाद कपूर आरती के उपरांत ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढांककर भस्म रमाई गई।
आज के श्रृंगार में भगवान महाकाल के मस्तक पर ॐ का चिह्न अंकित कर ड्रायफ्रूट से विशेष श्रृंगार किया गया। तत्पश्चात रजत शेषनाग मुकुट, रजत मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों की मालाएं अर्पित की गईं। मंदिर परिसर भक्ति, भजन और घंटानाद से गूंज उठा।
पूरे मंदिर परिसर में दिव्यता और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला, जबकि पुजारियों ने दिनभर चलने वाले विशेष कार्तिक पूजन की शुरुआत की।

