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29 सितंबर भस्म आरती: त्रिपुंड और आभूषणों से सजे बाबा महाकालेश्वर, अलसुबह भक्तों ने किए दर्शन
UJJAIN, MP
श्री महाकालेश्वर मंदिर में आश्विन माह शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि (सोमवार) तड़के अलसुबह भस्म आरती का आयोजन दिव्य श्रृंगार के साथ संपन्न हुआ। प्रातः 4 बजे मंदिर के कपाट खुलते ही गर्भगृह में विशेष पूजन-अभिषेक की शुरुआत हुई।
पुजारियों ने पहले सभी देवी-देवताओं का पूजन कर भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक कर आराधना की गई।
भस्म अर्पण से पहले का वैदिक क्रम
आरती की शुरुआत प्रथम घंटाल बजाकर और ‘हरिओम’ का जल अर्पित करने से हुई। मंत्रोच्चार के बीच ज्योतिर्लिंग का ध्यान किया गया। कपूर आरती के उपरांत ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढककर भस्म अर्पित की गई।
दिव्य श्रृंगार और अलंकरण
इस अवसर पर भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और पुष्पहार पहनाए गए। सुगंधित पुष्पों और आभूषणों से विशेष अलंकरण कर त्रिपुंड का श्रृंगार किया गया।

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29 सितंबर भस्म आरती: त्रिपुंड और आभूषणों से सजे बाबा महाकालेश्वर, अलसुबह भक्तों ने किए दर्शन
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श्री महाकालेश्वर मंदिर में आश्विन माह शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि (सोमवार) तड़के अलसुबह भस्म आरती का आयोजन दिव्य श्रृंगार के साथ संपन्न हुआ। प्रातः 4 बजे मंदिर के कपाट खुलते ही गर्भगृह में विशेष पूजन-अभिषेक की शुरुआत हुई।
पुजारियों ने पहले सभी देवी-देवताओं का पूजन कर भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक कर आराधना की गई।
भस्म अर्पण से पहले का वैदिक क्रम
आरती की शुरुआत प्रथम घंटाल बजाकर और ‘हरिओम’ का जल अर्पित करने से हुई। मंत्रोच्चार के बीच ज्योतिर्लिंग का ध्यान किया गया। कपूर आरती के उपरांत ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढककर भस्म अर्पित की गई।
दिव्य श्रृंगार और अलंकरण
इस अवसर पर भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और पुष्पहार पहनाए गए। सुगंधित पुष्पों और आभूषणों से विशेष अलंकरण कर त्रिपुंड का श्रृंगार किया गया।

