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4 मई महाकाल भस्म आरती: तड़के दिव्य श्रृंगार में दिखे बाबा महाकाल
Ujjain, MP
उज्जैन में सोमवार तड़के एक बार फिर बाबा महाकाल की भस्म आरती का दिव्य नजारा देखने को मिला। 4 मई को ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि पर सुबह करीब 4 बजे मंदिर के कपाट खुले और इसके साथ ही Mahakal Bhasma Aarti की शुरुआत हुई। असुबह ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंच गए थे। जैसे ही गर्भगृह में पूजा की प्रक्रिया शुरू हुई, पूरे परिसर में घंटियों और मंत्रोच्चार की आवाज गूंजने लगी। माहौल ऐसा था कि ठंडी हवा के बीच भी श्रद्धालु पूरी श्रद्धा से आरती का इंतजार करते नजर आए।
बताया जा रहा है कि मंदिर के पट खुलते ही सबसे पहले गर्भगृह में स्थापित देवी-देवताओं का पूजन किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक शुरू हुआ। पुजारियों ने विधि-विधान से दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया। इस दौरान लगातार मंत्रोच्चार चलता रहा। धीरे-धीरे भगवान का श्रृंगार आकार लेने लगा। भांग, चंदन और विभिन्न आभूषणों से महाकाल का अलंकरण किया गया। शुरुआती समय में गर्भगृह के भीतर सिर्फ पुजारी ही मौजूद थे, लेकिन बाहर खड़े श्रद्धालु हर झलक को अपने मन में बसाने की कोशिश करते रहे।
भस्म अर्पण की प्रक्रिया शुरू होने से पहले पहला घंटाल बजाया गया और हरिओम का जल अर्पित किया गया। इसके बाद कुछ देर के लिए वातावरण पूरी तरह शांत हो गया, मानो सबकी नजरें एक ही क्षण पर टिकी हों। फिर कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढंककर भस्म रमाई गई। यह वह पल था जिसका इंतजार हर श्रद्धालु करता है। Mahakal Bhasma Aarti के दौरान जैसे ही भस्म अर्पित हुई, बाहर खड़े लोगों के बीच भी जयकारे गूंजने लगे। इसके बाद भगवान को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल और रुद्राक्ष की माला पहनाई गई। फूलों की सुगंध से पूरा गर्भगृह महक उठा।
सुबह की इस आरती में शामिल श्रद्धालुओं ने दर्शन के बाद नंदी महाराज के पास भी पहुंचकर अपनी मनोकामनाएं कही। कुछ लोग कान के पास जाकर धीरे-धीरे कुछ बोलते दिखे, तो कई लोग बस हाथ जोड़कर खड़े रहे। मंदिर परिसर में “जय महाकाल” के नारे लगातार सुनाई दे रहे थे। सुरक्षा व्यवस्था भी तैनात रही, हालांकि सुबह का समय होने की वजह से भीड़ नियंत्रित नजर आई। अधिकारियों के अनुसार हर दिन की तरह आज भी भस्म आरती व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुई और श्रद्धालुओं को दर्शन में किसी तरह की परेशानी नहीं हुई।
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4 मई महाकाल भस्म आरती: तड़के दिव्य श्रृंगार में दिखे बाबा महाकाल
Ujjain, MP
उज्जैन में सोमवार तड़के एक बार फिर बाबा महाकाल की भस्म आरती का दिव्य नजारा देखने को मिला। 4 मई को ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि पर सुबह करीब 4 बजे मंदिर के कपाट खुले और इसके साथ ही Mahakal Bhasma Aarti की शुरुआत हुई। असुबह ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंच गए थे। जैसे ही गर्भगृह में पूजा की प्रक्रिया शुरू हुई, पूरे परिसर में घंटियों और मंत्रोच्चार की आवाज गूंजने लगी। माहौल ऐसा था कि ठंडी हवा के बीच भी श्रद्धालु पूरी श्रद्धा से आरती का इंतजार करते नजर आए।
बताया जा रहा है कि मंदिर के पट खुलते ही सबसे पहले गर्भगृह में स्थापित देवी-देवताओं का पूजन किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक शुरू हुआ। पुजारियों ने विधि-विधान से दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया। इस दौरान लगातार मंत्रोच्चार चलता रहा। धीरे-धीरे भगवान का श्रृंगार आकार लेने लगा। भांग, चंदन और विभिन्न आभूषणों से महाकाल का अलंकरण किया गया। शुरुआती समय में गर्भगृह के भीतर सिर्फ पुजारी ही मौजूद थे, लेकिन बाहर खड़े श्रद्धालु हर झलक को अपने मन में बसाने की कोशिश करते रहे।
भस्म अर्पण की प्रक्रिया शुरू होने से पहले पहला घंटाल बजाया गया और हरिओम का जल अर्पित किया गया। इसके बाद कुछ देर के लिए वातावरण पूरी तरह शांत हो गया, मानो सबकी नजरें एक ही क्षण पर टिकी हों। फिर कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढंककर भस्म रमाई गई। यह वह पल था जिसका इंतजार हर श्रद्धालु करता है। Mahakal Bhasma Aarti के दौरान जैसे ही भस्म अर्पित हुई, बाहर खड़े लोगों के बीच भी जयकारे गूंजने लगे। इसके बाद भगवान को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल और रुद्राक्ष की माला पहनाई गई। फूलों की सुगंध से पूरा गर्भगृह महक उठा।
सुबह की इस आरती में शामिल श्रद्धालुओं ने दर्शन के बाद नंदी महाराज के पास भी पहुंचकर अपनी मनोकामनाएं कही। कुछ लोग कान के पास जाकर धीरे-धीरे कुछ बोलते दिखे, तो कई लोग बस हाथ जोड़कर खड़े रहे। मंदिर परिसर में “जय महाकाल” के नारे लगातार सुनाई दे रहे थे। सुरक्षा व्यवस्था भी तैनात रही, हालांकि सुबह का समय होने की वजह से भीड़ नियंत्रित नजर आई। अधिकारियों के अनुसार हर दिन की तरह आज भी भस्म आरती व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुई और श्रद्धालुओं को दर्शन में किसी तरह की परेशानी नहीं हुई।
