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5 मई महाकाल भस्म आरती: तड़के खुले पट, भव्य श्रृंगार के दर्शन
Ujjain, MP
उज्जैन में मंगलवार 5 मई 2026 की सुबह फिर वही दृश्य रहा, जब अंधेरे में ही भक्तों की कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में तड़के करीब 4 बजे कपाट खुले और उसके साथ ही भस्म आरती की तैयारियां तेज हो गईं। ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि होने के कारण आज की आरती को लेकर श्रद्धालुओं में अलग ही उत्साह नजर आया। जैसे ही मंदिर के पट खुले, भीतर से घंटों और मंत्रों की आवाज बाहर तक सुनाई देने लगी, माहौल धीरे-धीरे पूरी तरह शिवमय हो गया।
प्रारंभिक पूजन के बाद पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित देवी-देवताओं का विधिवत पूजन किया और फिर भगवान महाकाल का जलाभिषेक शुरू हुआ। बताया जा रहा है कि इसके बाद पंचामृत से अभिषेक किया गया, जिसमें दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस का उपयोग हुआ। भांग और चंदन से भगवान का लेप किया गया, फिर आभूषणों और पुष्पों से दिव्य श्रृंगार किया गया। आरती से पहले घंटाल बजाकर विशेष विधि के तहत जल अर्पित किया गया, इस दौरान पूरा गर्भगृह मंत्रोच्चार से गूंजता रहा। कपूर आरती के बाद परंपरा के अनुसार ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंका गया और फिर भस्म अर्पण की प्रक्रिया पूरी की गई।
भस्म रमाने के बाद भगवान को शेषनाग का रजत मुकुट, मुण्डमाल और रुद्राक्ष की मालाएं अर्पित की गईं। फूलों की खुशबू और धूप की सुगंध से पूरा मंदिर परिसर भर गया। सुबह-सुबह बड़ी संख्या में श्रद्धालु आरती में शामिल हुए, कई लोग रात से ही लाइन में लगे थे। दर्शन के बाद भक्त नंदी महाराज के पास जाकर उनके कान में अपनी मनोकामनाएं कहते नजर आए। मंदिर परिसर में “जय महाकाल” के जयकारे लगातार गूंजते रहे, जिससे माहौल पूरी तरह भक्तिमय बना रहा।
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5 मई महाकाल भस्म आरती: तड़के खुले पट, भव्य श्रृंगार के दर्शन
Ujjain, MP
उज्जैन में मंगलवार 5 मई 2026 की सुबह फिर वही दृश्य रहा, जब अंधेरे में ही भक्तों की कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में तड़के करीब 4 बजे कपाट खुले और उसके साथ ही भस्म आरती की तैयारियां तेज हो गईं। ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि होने के कारण आज की आरती को लेकर श्रद्धालुओं में अलग ही उत्साह नजर आया। जैसे ही मंदिर के पट खुले, भीतर से घंटों और मंत्रों की आवाज बाहर तक सुनाई देने लगी, माहौल धीरे-धीरे पूरी तरह शिवमय हो गया।
प्रारंभिक पूजन के बाद पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित देवी-देवताओं का विधिवत पूजन किया और फिर भगवान महाकाल का जलाभिषेक शुरू हुआ। बताया जा रहा है कि इसके बाद पंचामृत से अभिषेक किया गया, जिसमें दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस का उपयोग हुआ। भांग और चंदन से भगवान का लेप किया गया, फिर आभूषणों और पुष्पों से दिव्य श्रृंगार किया गया। आरती से पहले घंटाल बजाकर विशेष विधि के तहत जल अर्पित किया गया, इस दौरान पूरा गर्भगृह मंत्रोच्चार से गूंजता रहा। कपूर आरती के बाद परंपरा के अनुसार ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंका गया और फिर भस्म अर्पण की प्रक्रिया पूरी की गई।
भस्म रमाने के बाद भगवान को शेषनाग का रजत मुकुट, मुण्डमाल और रुद्राक्ष की मालाएं अर्पित की गईं। फूलों की खुशबू और धूप की सुगंध से पूरा मंदिर परिसर भर गया। सुबह-सुबह बड़ी संख्या में श्रद्धालु आरती में शामिल हुए, कई लोग रात से ही लाइन में लगे थे। दर्शन के बाद भक्त नंदी महाराज के पास जाकर उनके कान में अपनी मनोकामनाएं कहते नजर आए। मंदिर परिसर में “जय महाकाल” के जयकारे लगातार गूंजते रहे, जिससे माहौल पूरी तरह भक्तिमय बना रहा।
